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Sant Kabir Nagar News: सरयू का जलस्तर फिर बढ़ा, ग्रामीणों की चिंता बढ़ी
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संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। सरयू नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने लगा है। पिछले 24 घंटे में नदी के जलस्तर में 20 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। इससे नदी किनारे बसे गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि इस बार फिर बाढ़ आई तो पहले से हुए नुकसान के बाद बची फसल और अन्य संसाधन भी बर्बाद हो जाएंगे। धनघटा तहसील क्षेत्र के 32 गांव एमबीडी बांध और सरयू नदी के बीच स्थित हैं। नदी का जलस्तर बढ़ने पर इनमें से अधिकतर गांव बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। हाल ही में जलस्तर बढ़ने से 18 गांवों की करीब 11 हजार आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई थी। कई लोगों के घरों के दरवाजे तक पानी पहुंच गया था। ग्रामीण पलायन की तैयारी में जुट गए थे।
इसी बीच नदी का जलस्तर घटने लगा और बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम होने लगा। करीब चार दिनों में अधिकतर स्थानों से पानी हट गया था। इससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली थी, लेकिन अब एक बार फिर जलस्तर बढ़ने से उनकी चिंता बढ़ गई है।
ग्राम प्रधान बालेंद्र, लालचंद, रामरूप, दयाशंकर, लालदेव, श्रीराम और मोहनलाल आदि ने बताया कि निचले हिस्से में बोई गई धान की फसल बाढ़ के पानी में बर्बाद हो गई है।
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बाढ़ के कारण ग्रामीणों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। नदी का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो लोग तीसरी बार बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं।
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धनघटा। सरयू नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने लगा है। पिछले 24 घंटे में नदी के जलस्तर में 20 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। इससे नदी किनारे बसे गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि इस बार फिर बाढ़ आई तो पहले से हुए नुकसान के बाद बची फसल और अन्य संसाधन भी बर्बाद हो जाएंगे। धनघटा तहसील क्षेत्र के 32 गांव एमबीडी बांध और सरयू नदी के बीच स्थित हैं। नदी का जलस्तर बढ़ने पर इनमें से अधिकतर गांव बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। हाल ही में जलस्तर बढ़ने से 18 गांवों की करीब 11 हजार आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई थी। कई लोगों के घरों के दरवाजे तक पानी पहुंच गया था। ग्रामीण पलायन की तैयारी में जुट गए थे।
इसी बीच नदी का जलस्तर घटने लगा और बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम होने लगा। करीब चार दिनों में अधिकतर स्थानों से पानी हट गया था। इससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली थी, लेकिन अब एक बार फिर जलस्तर बढ़ने से उनकी चिंता बढ़ गई है।
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ग्राम प्रधान बालेंद्र, लालचंद, रामरूप, दयाशंकर, लालदेव, श्रीराम और मोहनलाल आदि ने बताया कि निचले हिस्से में बोई गई धान की फसल बाढ़ के पानी में बर्बाद हो गई है।
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बाढ़ के कारण ग्रामीणों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। नदी का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो लोग तीसरी बार बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं।