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भैया दूज : पर्व के मायने वही लेकिन बदल गया अभिव्यक्ति का तरीका

Fri, 24 Oct 2025 12:10 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर Updated Fri, 24 Oct 2025 12:10 AM IST
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Bhaiya Dooj: The meaning of the festival remains the same, but the way of expressing it has changed.
भैयादूज के पर्व पर भाई को तिलक लगाती हुई बहन । स्रोत - स्वयं - फोटो : स्वयं
हरिहरपुर। भैया दूज पर्व के मायने आज भी वही हैं लेकिन उसके अभिव्यक्ति का तरीका बदल गया है। शिक्षा और नौकरी के चलते घर से दूर रह रहे भाई और शादी के बाद ससुराल से शहर चली गई बहनों के लिए भैया दूज का त्योहार अब सोशल मीडिया तक सिमट कर रह गया है।
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एक दूसरे से दूर सोशल मीडिया के जरिए ही बहने अपने भाईयों को भैया दूज की शुभकामनाएं दे रही हैं। इसके पहले भैया दूज कैसे मनाया जाता था इसकी यादें साझा करती हुई महिलाएं बताती हैं कि भैया दूज के दिन बहने अपने भाई के लिए तमाम पकवान बनाती हैं। इस दिन भाई अपने बहनों के वहां जाकर उनके बनाए पकवान खाते थे और उपहार भी देते थे। किंवदंतियाें की माने तो इसी दिन कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया को यमराज अपनी बहन यमुना के घर पहुंचे थे। बहन के स्नेह और मेहमानी से खुश यमराज ने वर दिया था कि जो भी बहन इस तिथि को अपने भाई को स्नेह सहित पकवान खिलाएंगी उसे यम का भय नहीं होगा।
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