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प्रधानों को कुपोषण के बारे में जागरूक किया
ब्यूरो/अमर उजाला संतकबीरनगर
Updated Fri, 11 Mar 2016 01:17 AM IST
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प्रशिक्षण दिया गया।
- फोटो : अंबरीश मिश्रा
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राज्य पोषण मिशन उत्तर प्रदेश के तत्वाधान में गुरुवार को नाथनगर ब्लॉक के सभागार में ग्राम प्रधानों को पोषण संबंधी अभिमुखीकरण एवं प्रशिक्षण दिया गया।
जिला कार्यक्रम अधिकारी अरुण दूबे ने कहा कि प्रदेश सरकार ने प्रदेश को कुपोषण मुक्त करने का अभियान चलाया है। जिसमें कुपोषित गर्भवती महिला व बच्चों केा आंगनबाड़ी केंद्रो के माध्यम से चिन्हित कर उनको कुपोषण मुक्त किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि 11 साल से 18 साल की किशोरी आगे चलकर मां बनती है। वह जब किशोर अवस्था में प्रवेश करती है। तो उनको कुपोषण की ज्यादा संभावना होती है। इस अवस्था में उनके खान पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में 42 प्रतिशत बच्चें कुपोषण के शिकार है। महिलाएं जब गर्भ धारण करती है। तब से लेकर एक हजार दिन तक उसको और बच्चें को कुपोषण का ख्तरा ज्यादा रहता है। इस दौरान लापरवाही होने पर वह तमाम तरह की बीमारियों की शिकार हो सकती है।
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बच्चा जब छह माह का हो जाएं तो उसे फलो का जूस और सूप बिना चीनी के दिन में दो बार दो -दो चम्मच जो टमाटर, प्याज, गाजर, पालक, मूंग, दाल और चावल से तैयार हो या मसला हुआ केला, चीकू, पका सेब, जो दूध पकाया गया हो।
डीसी मनरेगा विनय कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि गांव में कोई भी बच्चा कुपोषित न रहे। सीडीपीओ रोमा सिंह ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर खंड शिक्षाधिकारी चंद्रभूषण त्रिपाठी, अपर जिला कृषि अधिकारी रामसजीवन सिंह, सीएचसी अधीक्षक रमेश कुमार, प्रधान संघ के ब्लॉक अध्यक्ष राजमन यादव, प्रदीप त्रिपाठी, ग्राम प्रधान महेश यादव, कृष्णचंद यादव, रामसजीवन कसौधन, विश्वभर नाथ श्रीवास्तव, राजू अंसारी, उदयराज यादव, रामसहाय चौरसिया, पवन ओझा, अनिल प्रजापति आदि मौजूद रहे।
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जिला कार्यक्रम अधिकारी अरुण दूबे ने कहा कि प्रदेश सरकार ने प्रदेश को कुपोषण मुक्त करने का अभियान चलाया है। जिसमें कुपोषित गर्भवती महिला व बच्चों केा आंगनबाड़ी केंद्रो के माध्यम से चिन्हित कर उनको कुपोषण मुक्त किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि 11 साल से 18 साल की किशोरी आगे चलकर मां बनती है। वह जब किशोर अवस्था में प्रवेश करती है। तो उनको कुपोषण की ज्यादा संभावना होती है। इस अवस्था में उनके खान पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
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उन्होंने बताया कि प्रदेश में 42 प्रतिशत बच्चें कुपोषण के शिकार है। महिलाएं जब गर्भ धारण करती है। तब से लेकर एक हजार दिन तक उसको और बच्चें को कुपोषण का ख्तरा ज्यादा रहता है। इस दौरान लापरवाही होने पर वह तमाम तरह की बीमारियों की शिकार हो सकती है।
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बच्चा जब छह माह का हो जाएं तो उसे फलो का जूस और सूप बिना चीनी के दिन में दो बार दो -दो चम्मच जो टमाटर, प्याज, गाजर, पालक, मूंग, दाल और चावल से तैयार हो या मसला हुआ केला, चीकू, पका सेब, जो दूध पकाया गया हो।
डीसी मनरेगा विनय कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि गांव में कोई भी बच्चा कुपोषित न रहे। सीडीपीओ रोमा सिंह ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर खंड शिक्षाधिकारी चंद्रभूषण त्रिपाठी, अपर जिला कृषि अधिकारी रामसजीवन सिंह, सीएचसी अधीक्षक रमेश कुमार, प्रधान संघ के ब्लॉक अध्यक्ष राजमन यादव, प्रदीप त्रिपाठी, ग्राम प्रधान महेश यादव, कृष्णचंद यादव, रामसजीवन कसौधन, विश्वभर नाथ श्रीवास्तव, राजू अंसारी, उदयराज यादव, रामसहाय चौरसिया, पवन ओझा, अनिल प्रजापति आदि मौजूद रहे।