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Sant Kabir Nagar News: घाघरा नदी की बाढ़ से डूब गई 500 हेक्टेयर फसल, चारे का भी संकट

Sun, 13 Aug 2023 12:01 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर Updated Sun, 13 Aug 2023 12:01 AM IST
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500 hectares of crop submerged due to flood of Ghaghra river, crisis of fodder also
धनघटा में घाघरा नदी के पानी से डूबी धान की फसल।
-जलस्तर में गिरावट से तटवर्ती गांवों के लोगों को राहत, चारे के लिए 3-4 किमी नाव से करनी पड़ रही यात्रा
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संवाद न्यूज़ एजेंसी
पौली/धनघटा(संतकबीरनगर)। घाघरा नदी की बाढ़ से करीब 500 हेक्टेयर फसल डूब गई है। पशुओं के लिए चोर का संकट खड़ा हो गया है। हालांकि, जलस्तर में शनिवार सुबह से गिरावट होने लगी है। इससे तटवर्ती गांव के लोग राहत महसूस कर रहे हैं लेकिन, बाढ़ में डूब चुकी फसल के नष्ट होने की चिंता सता रही है।
सोमवार से शुक्रवार तक पहाड़ी और मैदानी बारिश से घाघरा नदी खतरे के निशान के करीब पहुंच गई थी। तटवर्ती गांव पटौवा, केवटहिया टोला, कुर्मियान टोला, तेजपुर, भोतहा, आगापुर गुलरिहा, खाले पुरवा, मदरहा आदि बाढ़ से घिरने लगे थे। शनिवार को नदी के जलस्तर में 10 सेंटीमीटर कमी आई और जलस्तर 79.150 मीटर पर पहुंच गया। बाढ़ का पानी कम होने से तटवर्ती गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली है। उनका कहना है कि नदी और एमबीडी बांध के बीच 35 गांवों के किसानों की 500 हेक्टेयर से अधिक फसल डूब चुकी है। फसल नष्ट होने की आशंका है। साथ ही पशुओं के लिए चारे का भी संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीण राम प्रकाश, शिवपूजन, राम पलट, बृजमोहन, संतोष कुमार आदि ने बताया कि चारे के लिए नाव पर सवार होकर तीन से चार किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है। उसी से पशुओं को खिलाने की व्यवस्था हो पाती है। गांव वालों का कहना है कि कटान के कारण धान की अधिकतर फसल नदी की धारा में समा गई है। जो बची है उसके बाढ़ नष्ट होने की चिंता बनी हुई है। तहसील प्रशासन ने अब तक कोई सहायता प्रदान नहीं कर सका है।
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पिछले साल बाढ़ के कारण फसल बर्बाद हो गई थी, लेकिन मुआवजा के नाम पर एक भी रुपये नहीं मिला। इस वर्ष भी बाढ़ के कारण फसल डूब गई है। फसल का नष्ट होना लगभग तय है। शासन-प्रशासन न तो बाढ़ से नुकसान मानने को तैयार है और न ही कोई मुआवजा मिलने की उम्मीद है। -हरिचरन, किसान तेजपुर
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घाघरा नदी का जलस्तर घटने के बाद भी नदी का पानी रामपुर मकदुमपुर बांध से सटकर बह रहा है। नदी कटान भी कर रही है। बांध के पास बाढ़ का पानी आ जाने के बाद भोतहा, नारायणपुर, तेजपुर, मदरहा समेत पश्चिम में 12 गांवों के लोग परेशान हैं। पशुओं के लिए चारे का संकट उत्पन्न हो गया है। प्रशासन की तरफ से कोई व्यवस्था नहीं की गई है। पारस, किसान तेजपुर
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घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद से माझा वासी परेशान हैं। पशुओं को खिलाने के लिए चारा का संकट बना हुआ है। बाढ़ के कारण तेजपुर के पास बना ठोकर धंसने लगा है, लेकिन किसी का भी ध्यान इस समस्या की तरफ नहीं है। -राममिलन, किसान भोतहा
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रामपुर मकदूमपुर और मकदूमपुर बहराडाड़ी बांध से दक्षिण बसे गांव की सैकड़ों हेक्टेयर फसल बाढ़ में नष्ट हो रही है। धान की रोपाई भी जल्द हुई है। फसल पूरी तरह विकास नहीं कर पाई है। ऐसे में फसल नष्ट हो जाएगी, लेकिन माझा वासियों के दर्द को कोई समझने वाला नहीं है। -प्रवेश कुमार, किसान भोतहा

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नदी का जलस्तर घटना शुरू हो गया है। जिन स्थान पर बाढ़ का पानी पहुंचा था, वह स्थान अब खाली होने लगे हैं। तहसील प्रशासन बाढ़ को लेकर पूरी तरह मुस्तैद है। -योगेंद्र कुमार पांडेय, प्रभारी तहसीलदार, धनघटा
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