UP: संभल में 46 वर्षों के बाद 24 कोसी परिक्रमा फिर शुरू, 1978 के दंगों के बाद हो गई थी बंद, भक्तों में उत्साह
संभल में 46 वर्षों के बाद 24 कोसी परिक्रमा फिर से शुरू हुई। यात्रा बेनीपुर चक के श्री वंश गोपाल तीर्थ से आरंभ होकर 68 प्रमुख स्थल और 87 छोटे मंदिरों से होकर गुजरेगी। इसको लेकर भक्तों में उत्साह है।
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उत्तर प्रदेश के संभल में 46 वर्षों के अंतराल के बाद ऐतिहासिक 24 कोसी परिक्रमा का आयोजन फिर से शुरू हो गया। यह परिक्रमा 1978 में सांप्रदायिक दंगों के कारण स्थगित कर दी गई थी। बेनीपुर चक स्थित श्री वंश गोपाल स्थल से यह यात्रा आरंभ हुई। सरकार के मुताबिक इस धार्मिक यात्रा में कुल 68 प्रमुख स्थल और 19 प्राचीन कुएं शामिल हैं।
परिक्रमा का मार्ग श्रीवंश गोपाल तीर्थ से शुरू होकर भुवनेश्वर, क्षेमनाथ और चंदेश्वर सहित 87 छोटे मंदिरों और धार्मिक स्थलों से गुजरते हुए वापस उसी तीर्थ पर समाप्त होगा। यह यात्रा धार्मिक आस्था का प्रतीक होने के साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को भी पुनर्जीवित करती है।
1978 के बाद शहर में पलायन और धार्मिक संपत्तियों पर अवैध कब्जे बढ़ गए थे। इस संदर्भ में सरकार ने विशेष कार्रवाई की। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत 495 मामले दर्ज किए गए। इसके चलते 1000 से अधिक अवैध कब्जों को हटाकर लगभग 69 हेक्टेयर भूमि मुक्त की गई।
इसके अतिरिक्त, 37 अवैध संरचनाओं जिनमें मस्जिद, मजार, कब्रिस्तान और मदरसे को हटाया गया। सरकार का कहना है कि इन प्रयासों से परिक्रमा मार्ग और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। स्थानीय प्रशासन ने भी परिक्रमा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए विशेष प्रबंध किए हैं।
चौबीस कोसीय परिक्रमा के लिए उमड़ा भक्तों का सैलाब
संभल के 68 तीर्थ और 19 कूपों की चौबीस कोसीय परिक्रमा प्राचीन तीर्थ श्री वंश गोपाल कल्किधाम बेनीपुर चक से शुरू हुई। परिक्रमा के लिए शुक्रवार रात्रि में ही वंश गोपाल तीर्थ पर भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे। कलाकारों ने रंगमंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति झूमने पर मजबूर कर दिया।
श्री वंश गोपाल कल्किधाम तीर्थ पर श्री वंश गोपाल कल्कि धाम फेरी परिक्रमा महोत्सव की पूर्व संध्या पर हवन हुआ। इसमें विश्व कल्याण के लिए आहुतियां दी गईं। भगवान श्री कल्कि के शीघ्र प्राकट्य की कामना की गई। वंश गोपाल मंदिर के महंत स्वामी भगवत प्रिय महाराज ने बताया कि बड़ी संख्या में भक्त तीर्थ पर आ गए हैं।
इनके लिए व्यवस्थाएं की गई हैं। शनिवार की भोर में धर्म ध्वजा फहराकर और भक्तों को तिलक लगाकर फेरी के लिए रवाना किया जाएगा। रास्ते में विभिन्न जगहों पर भक्तों के स्वागत की तैयारी की गई है। रात्रि में चंद्रेश्वर तीर्थ चंदायन में विश्राम की व्यवस्था की गई है। परिक्रमा समिति के प्रभारी राजेश सिंघल ने बताया कि किसी भी तरह की असुविधाा भक्तों को नहीं होगी।
विभिन्न स्थानों पर चाक-चौबंद व्यवस्थाएं की गई हैं। कमेटी के पदाधिकारी इसके लिए शिद्दत से जुटे हुए हैं। संरक्षक कमलकांत तिवारी ने बताया कि परिक्रमा को सफल बनाने के लिए पूरी टीम लगी है। तैयारी के लिए किसी भी ऐसे बिंदु को नहीं छोड़ा गया, जिससे कोई समस्या हो। पुलिस प्रशासन भी अलर्ट है।
2006 से पहले 30 वर्ष तक बंद रही परिक्रमा, लेकिन लगते रहे तीर्थों पर मेले
संभल के 68 तीर्थ 19 कूपों की आध्यात्मिक परिक्रमा की स्थापना देवताओं के द्वारा की गई है। यह परंपरा नगर, देहात सुदूरवर्ती क्षेत्र से लोग अपने परिवार सहित आकर संभल की दो दिवसीय परिक्रमा करते रहे। सीधे रास्ते ना होने के कारण कालांतर में परिक्रमा करने वालों में तथा खेतों के मालिकों से विवाद होना शुरू हो गया और झगड़े होते होते परिक्रमा बंद हो गई।
लगभग 30 वर्षों तक परिक्रमा बंद रही। लेकिन परिक्रमा जिसे फेरी कहा जाता है, नीमसार, वंशगोपाल मनोकामना सूरजकुंड अनेक तीर्थ पर फेरी के मेले लगते रहे। हिंदू जागृति मंच के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार शर्मा बताते हैं कि 2006 में भूली बिसरी परंपरा को पुनर्जीवित करना बहुत बड़ा जोखिम भरा कार्य था। परंतु सभी राजनीतिक दलों समाज सेवी संगठनों जन सामान्य के सहयोग से आज से 18 वर्ष पूर्व सन 2006 में संभल तीर्थ परिक्रमा को पुनर्जीवित किया गया।
परिक्रमा के शुभारंभ स्थल वंश गोपाल कल्किधाम तीर्थ पर बड़ी संख्या में भक्त पहुंच रहे हैं। भोर में परिक्रमा शुरू होगी। दो दिवसीय आयोजन को शांतिपूर्वक संपन्न कराना ही प्राथमिकता रहेगी। -राजेश सिंघल, परिक्रमा के प्रभारी