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टिकट बंटवारे में लगाए समीकरण, दिग्गजों का टकराव भी टला
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल
Updated Thu, 29 Dec 2016 01:28 AM IST
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समाजवादी पार्टी
- फोटो : अमर उजाला
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लोकसभा चुनाव के वक्त कैबिनेट मंत्री नवाब इकबाल महमूद और पूर्व सांसद डा. शफीकुर्रहमान बर्क के बीच वर्चस्व की जंग छिड़ गई थी। नेतृत्व ने उस जंग को देखते हुए सबक लिया और अबकी बार पहली लिस्ट में ही दोनों दिग्गजों को तोहफा दे दिया।
संभल शहर की सीट से जहां एक बार फिर नवाब इकबाल महमूद को उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं संभल की सियासत में एक ही राजनीतिक दल में होने के बाद भी उनके मुखालिफ रहे डा. शफीकुर्रहमान बर्क के पोते जियारउर्रमान बर्क को बिलारी से उम्मीदवार बनाया गया है।
बिलारी के सिटिंग विधायक फहीम का टिकट काटा गया है। जियाउर्रमाहन बर्क को टिकट देने से आने वाले चुनाव में दोनों के बीच का टकराव कम होगा। वहीं सपा के लिए तुर्क वोट बैंक को साधना आसान हो गया है। वहीं असमोली से पिंकी यादव को उम्मीदवार बनाया गया है। पिंकी यादव मुलायम सिंह यादव की रिश्तेदार भी हैं। पार्टी में शिवपाल सिंह यादव से भी उनका सीधा संपर्क है। उन्हें टिकट मिलने से उनके समर्थक खुश हैं। माना जा रहा है कि क्षेत्र में अच्छी छवि और पार्टी आलाकमान से सीधे रिश्ते होने का उन्हें लाभ मिला है।
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गुन्नौर से सीएम की उम्मीदवारी पर होती रही चर्चा
संभल। सैफई और गुन्नौर का सियासी रिश्ता पुराना है। मुलायम सिंह यादव 2004 में गुन्नौर से विधायक रहे हैं। वे रिकार्ड मतों से जीते थे। तब से हर चुनाव से पहले यहां यह मांग उठती रही है कि इस सीट पर मुलायम सिंह यादव के परिवार से ही कोई व्यक्ति उम्मीदवार बन जाए। सपा के उम्मीदवारों की सूची आने पर जब गुन्नौर का टिकट फाइनल नहीं हुआ तो इसके तत्काल बाद सियासी हलकों में यह चर्चा होने लगी कि अबकी बार अखिलेश यादव भी गुन्नौर से उम्मीदवार हो सकते हैं।
गुन्नौर में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सपा को कई झटके लगे हैं। पूर्व मंत्री अजीत राजू, पूर्व विधायक राजेश यादव और सपा नेता काली यादव सपा का साथ छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए हैं। ऐसे में सपा को उसके परंपरागत गढ़ में तगड़ा झटका लगा है। अब पार्टी जब टिकट घोषित कर रही है तो फिर इस ओर भी ध्यान दे रही है। सियासी दिग्गजों का मानना है कि गुन्नौर सीट से इस बार खुद सीएम अखिलेश यादव दावेदारी कर सकते हैं। उनके भाई धर्मेंद्र यादव पहले ही बदायूं से सांसद हैं।
लेकिन उसके बावजूद सपा की मजबूती में कुछ कमी देखी जा रही है। ऐसे मेें सपा की शीर्ष नेतृत्व किसी मजबूत प्रत्याशी को यहां से उतारने की तैयारी में है। हालांकि मौजूदा विधायक रामखिलाड़ी यादव खुद यहां से प्रत्याशी हैं। लेकिन सपा प्रमुख के परिवार से किसी की दावेदारी हो सकती है, ऐसा माना जा रहा है। सीएम अखिलेश यादव के नाम की चर्चाएं ज्यादा हैं।
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संभल शहर की सीट से जहां एक बार फिर नवाब इकबाल महमूद को उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं संभल की सियासत में एक ही राजनीतिक दल में होने के बाद भी उनके मुखालिफ रहे डा. शफीकुर्रहमान बर्क के पोते जियारउर्रमान बर्क को बिलारी से उम्मीदवार बनाया गया है।
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बिलारी के सिटिंग विधायक फहीम का टिकट काटा गया है। जियाउर्रमाहन बर्क को टिकट देने से आने वाले चुनाव में दोनों के बीच का टकराव कम होगा। वहीं सपा के लिए तुर्क वोट बैंक को साधना आसान हो गया है। वहीं असमोली से पिंकी यादव को उम्मीदवार बनाया गया है। पिंकी यादव मुलायम सिंह यादव की रिश्तेदार भी हैं। पार्टी में शिवपाल सिंह यादव से भी उनका सीधा संपर्क है। उन्हें टिकट मिलने से उनके समर्थक खुश हैं। माना जा रहा है कि क्षेत्र में अच्छी छवि और पार्टी आलाकमान से सीधे रिश्ते होने का उन्हें लाभ मिला है।
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गुन्नौर से सीएम की उम्मीदवारी पर होती रही चर्चा
संभल। सैफई और गुन्नौर का सियासी रिश्ता पुराना है। मुलायम सिंह यादव 2004 में गुन्नौर से विधायक रहे हैं। वे रिकार्ड मतों से जीते थे। तब से हर चुनाव से पहले यहां यह मांग उठती रही है कि इस सीट पर मुलायम सिंह यादव के परिवार से ही कोई व्यक्ति उम्मीदवार बन जाए। सपा के उम्मीदवारों की सूची आने पर जब गुन्नौर का टिकट फाइनल नहीं हुआ तो इसके तत्काल बाद सियासी हलकों में यह चर्चा होने लगी कि अबकी बार अखिलेश यादव भी गुन्नौर से उम्मीदवार हो सकते हैं।
गुन्नौर में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सपा को कई झटके लगे हैं। पूर्व मंत्री अजीत राजू, पूर्व विधायक राजेश यादव और सपा नेता काली यादव सपा का साथ छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए हैं। ऐसे में सपा को उसके परंपरागत गढ़ में तगड़ा झटका लगा है। अब पार्टी जब टिकट घोषित कर रही है तो फिर इस ओर भी ध्यान दे रही है। सियासी दिग्गजों का मानना है कि गुन्नौर सीट से इस बार खुद सीएम अखिलेश यादव दावेदारी कर सकते हैं। उनके भाई धर्मेंद्र यादव पहले ही बदायूं से सांसद हैं।
लेकिन उसके बावजूद सपा की मजबूती में कुछ कमी देखी जा रही है। ऐसे मेें सपा की शीर्ष नेतृत्व किसी मजबूत प्रत्याशी को यहां से उतारने की तैयारी में है। हालांकि मौजूदा विधायक रामखिलाड़ी यादव खुद यहां से प्रत्याशी हैं। लेकिन सपा प्रमुख के परिवार से किसी की दावेदारी हो सकती है, ऐसा माना जा रहा है। सीएम अखिलेश यादव के नाम की चर्चाएं ज्यादा हैं।