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'उलझना सोच समझकर जरा गुलामों से, यह कौम खुद में अली का शेआर रखती है'
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संभल। नगर के मोहल्ला कोटगर्बी स्थित एमजीएम कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डा. आबिद हुसैन हैदरी के आवास पर अल्लामा इकबाल फाउंडेशन की ओर से तहरी मुशायरे का आयोजन हुआ। इसमें मुख्य अतिथि मुशीर खां तरीन व विशिष्ट अतिथि कवि डा. नसीमुजफ्फर रहे।
फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. आबिद हुसैन हैदरी ने कहा कि यह महीना मुसलमानों के खलीफा हजरत ए अली की पैदाइश का महीना है और इसी महीने रजब की 13 तारीख को हजरत अली काबे में पैदा हुए थे। उसी की याद में यह जश्न मनाया गया है। उपाध्यक्ष डा. किश्वर जहां जैदी ने कहा कि इस महीने नगर के प्रसिद्ध कवि शफीकुर्रहमान बरकाती को बेदम शाह वारसी अवार्ड देकर सम्मानित किया जाएगा। जश्ने मौलूद ए काबा में शायरों ने अपने तरही कलाम प्रस्तुत किए।
हकीम बुरहान संभली ने कहा कि उलझना सोच समझकर जरा गुलामों से, यह कौम खुद में अली का शेआर रखती है। नौशाद गोविंदपुरी ने कहा कि मेरी निगाह में वह खुतबये गदीरी है, मैं इश्क हूं मुझे इरफाने बेनजीरी है। मुशायरे में डा. मुनव्वर ताबिश, शाह आलम रौनक, मीर शाह हुसैन आरिफ, फरमान अब्बासी, पैकर संभली, हाफिज माजिद अशरफी, शफीक बरकाती, सुल्तान मोहम्मद खान कलीम, डा. नसीमुजजफर, ताहिर सलामी आदि मौजूद रहे।
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फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. आबिद हुसैन हैदरी ने कहा कि यह महीना मुसलमानों के खलीफा हजरत ए अली की पैदाइश का महीना है और इसी महीने रजब की 13 तारीख को हजरत अली काबे में पैदा हुए थे। उसी की याद में यह जश्न मनाया गया है। उपाध्यक्ष डा. किश्वर जहां जैदी ने कहा कि इस महीने नगर के प्रसिद्ध कवि शफीकुर्रहमान बरकाती को बेदम शाह वारसी अवार्ड देकर सम्मानित किया जाएगा। जश्ने मौलूद ए काबा में शायरों ने अपने तरही कलाम प्रस्तुत किए।
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हकीम बुरहान संभली ने कहा कि उलझना सोच समझकर जरा गुलामों से, यह कौम खुद में अली का शेआर रखती है। नौशाद गोविंदपुरी ने कहा कि मेरी निगाह में वह खुतबये गदीरी है, मैं इश्क हूं मुझे इरफाने बेनजीरी है। मुशायरे में डा. मुनव्वर ताबिश, शाह आलम रौनक, मीर शाह हुसैन आरिफ, फरमान अब्बासी, पैकर संभली, हाफिज माजिद अशरफी, शफीक बरकाती, सुल्तान मोहम्मद खान कलीम, डा. नसीमुजजफर, ताहिर सलामी आदि मौजूद रहे।
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