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जिले के 7 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर नहीं है एक्स-रे मशीन 17-21-26
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बहजोई। जिले के सात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एक्स-रे मशीन न होने से सैकड़ों मरीजों को भटकना पड़ता है। ऐसे में मरीज निजी खर्च पर दूसरे केंद्रों पर एक्स-रे कराने को मजबूर हैं। खास बात यह है कि जिले के कुछ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर बिना एक्स-रे मशीन के टेक्नीशियन की तैनाती भी है।
जिले में 10 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनमें तहसील स्तर पर बने तीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर तो एक्स-रे मशीन है, लेकिन शेष सात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में बहजोई, नरौली (बनियाखेड़ा), मनौटा (असमोली), पवांसा, जुनावई, रजपुरा व कैला देवी पर एक्स-रे मशीन नहीं है। इससे मरीजों को सांस समेत छाती व पीठ आदि में दर्द आदि तथा शरीर के विभिन्न अंगों की जांच कराने के लिए दूर-दराज के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व निजी केंद्रों पर भटकना पड़ता है।
बाहरी केंद्रों पर पहुंचकर मरीजों को निजी खर्च कर एक्स-रे कराना पड़ता है। वहीं बहजोई, पवांसा व नरौली के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर वर्ष 2016 से एक्स-रे टेक्नीशियन की भी तैनाती है। ऐसे में बिना एक्स-रे मशीन के टेक्नीशियन भी इन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर दूसरे कार्य कर अपनी जिम्मेदारी की औपचारिकता पूरी कर रहे हैं। नतीजा, इन सात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आने वाले ग्रामीण अंचलों के करीब एक हजार मरीजों को महीने भर में एक्स-रे की जांच के लिए भटकना पड़ता है।
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जिले में 10 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनमें तहसील स्तर पर बने तीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर तो एक्स-रे मशीन है, लेकिन शेष सात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में बहजोई, नरौली (बनियाखेड़ा), मनौटा (असमोली), पवांसा, जुनावई, रजपुरा व कैला देवी पर एक्स-रे मशीन नहीं है। इससे मरीजों को सांस समेत छाती व पीठ आदि में दर्द आदि तथा शरीर के विभिन्न अंगों की जांच कराने के लिए दूर-दराज के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व निजी केंद्रों पर भटकना पड़ता है।
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बाहरी केंद्रों पर पहुंचकर मरीजों को निजी खर्च कर एक्स-रे कराना पड़ता है। वहीं बहजोई, पवांसा व नरौली के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर वर्ष 2016 से एक्स-रे टेक्नीशियन की भी तैनाती है। ऐसे में बिना एक्स-रे मशीन के टेक्नीशियन भी इन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर दूसरे कार्य कर अपनी जिम्मेदारी की औपचारिकता पूरी कर रहे हैं। नतीजा, इन सात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आने वाले ग्रामीण अंचलों के करीब एक हजार मरीजों को महीने भर में एक्स-रे की जांच के लिए भटकना पड़ता है।
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