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पुराने नोट से नहीं मिली खाद, किसानों का प्रदर्शन
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल
Updated Wed, 23 Nov 2016 12:57 AM IST
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प्रदर्शन
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मंडी समिति स्थित इफको किसान सेवा केंद्र पर किसान उवर्रक लेने पहुंचे। उवर्रक के बदले किसानों ने हजार पांच सौ रुपये के नोट दिए। केंद्र संचालक ने हजार पांच सौ रुपये के नोट लेने से इंकार कर दिया। किसानों ने फसल की बुबाई का हवाला दिया। लेकिन नियम विरुद्घ बताते हुए केंद्र संचालक ने मना कर दिया।
इसके बाद किसानों ने नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। विष्णु प्रताप सिंह, मुकेश पाल, सत्यपाल, सुखपाल, प्रेमपाल, सत्यवीर सिंह, नन्हे राम, कृपाल सिंह, विशन पाल, रवि गुप्ता, विनेश कुमार, धर्म सिंह, शिशुपाल सिंह, मनवीर सिंह, महीलाल, यादराम, गणेश ईशु प्रखर, नरेश राघव, मुकेश राघव, विनोद राघव, सुरेंद्र राघव मौजूद रहे।
उधर, किसान संघर्ष समिति की बैठक कान्हा धाम में हुई। इसमें वक्ताओं ने नोटबंदी से पैदा हुए हालात को किसान विरोधी बताया। इसके लिए आंदोलन शुरु किए जाने की मांग की गई। राष्ट्रीय अध्यक्ष रामेश्वर दयाल शर्मा ने कहा कि अभी तक किसानों को फसल नुकसान का मुआवजा नहीं मिला है। अब एक हजार व पांच सौ के नोटबंदी ने किसान की कमर तोड़कर रख दी। पूरनलाल, गीता देवी, देवपाल, संजीव कुमार, सोमपाल सिंह, छुटटन सिंह, गंगाराम मौर्य, लेखराज मौर्य, कैलाश यादव, प्रेमपाल चौहान, रोहित कुमार आदि शामिल रहे। अध्यक्षता बलवंत सिंह ने की तथा संचालन मंगल सैन सैनी ने किया।
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सहकारी समितियों पर नहीं मिली खाद, प्रदर्शन
संभल। किसानों को सहकारी समितियों पर हजार और पांच सौ के पुराने नोटों से खाद बीज नहीं मिल पा रहा है। इससे नाराज किसानों ने एडीएम से मिलकर अपनी समस्या बताई। वहीं, मंडी समिति में किसानों ने प्रदर्शन किया। सहकारी समितियों के 40 बीज विक्रय केंद्र 40 हैं। किसी भी केंद्र पर हजार और पांच सौ रुपये के पुराने नोट नहीं लिए जा रहे हैं। केंद्रों पर चेक से छोटे नोट और आरटीजीएस और नेफ्ट के माध्यम से आने वाली धनराशि पर बीज दिए जा रहे हैं।
जिनके पास छोेटे नोट और बैंक से धनराशि ट्रांसफर करने का विकल्प नहीं है। उनको खाद-बीज के लिए भटकना पड़ रहा है। जिला सहायक निबंधक योगेंद्र पाल सिंह ने बताया कि टीवी और अखबार में पुराने नोट से बीज मिलने के संबंध में जब लखनऊ में एडीशनल रजिस्ट्रार से बातचीत की। तो उन्होंने शासन से बातचीत के ही स्थिति स्पष्ट करने की बात कही। बताया कि सहकारी समितियां, सहकारी बैंकों से जुड़ी हुई हैं। जिला सहकारी बैंक में पुरानी करेंसी जमा किए जाने पर पाबंदी लग चुकी है।
इफ्को के एरिया मैनेजर बीआर वर्मा ने कहा कि सरकारी संस्थाओं से पुराने नोटों पर खाद-बीज दिए जाने का अभी कोई आदेश उनके पास नहीं आया है। अपर जिलाधिकारी आरपी यादव ने बताया कि शासन ने राजकीय बीज भंडारों से पुराने नोटों पर बीज दिए जाने के आदेश दिए हैं। सहकारी संस्थाओं के लिए अभी आदेश नहीं हुए हैं।
चंदौसी(ब्यूरो)। मंडी समिति में अपनी फसल बेचने के लिए गए किसानों को बैरंग ही वापस लौटना पड़ा। मंडी समिति स्थिति आढ़तियों ने नकदी की समस्या के चलते किसानों की फसल खरीदना बंद कर दिया है। मंडी में कारोबार की बंदी के बाद परेशान किसान मंडी सचिव से मिले। समस्या के निदान की मांग की। लाल सिंह, मंसूर अली खां, सत्य प्रकाश, बिजेंद्र सिंह, भीकम सिंह, मनोज कुमार, सुमित सिंह, सुरेश पाल, प्रभाकर, अजय कुमार, महेंद्र सिंह, बबलू, प्रेमपाल, राजपाल, होती राम मौजूद रहे।
संभल। नोटबंदी के बाद खाद की बिक्री घट गई है। सरकारी केंद्रों पर एटीएम और डेबिट कार्ड से पेमेंट लेने की कोई व्यवस्था नहीं है। इससे किसान परेशान हो रहे हैं। कुछ किसान अपने बैंक खातों के माध्यम से आरटीजीएस और नेफ्ट के माध्यम से धनराशि सरकारी क्रय केंद्रों पर जमा कर रहे हैं। उन्हें ही खाद और बीज मिल रहा है। इफ्को के संभल जनपद के एरिया मैनेजर बीआर वर्मा ने कहा कि जिले में इफ्को के आठ केंद्र हैं। नोटबंदी के बाद बिक्री घटकर चौथाई रह गई है। आने वाले दिनों में स्वैप मशीनें लगाकर किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड से धन स्वीकार करने की व्यवस्था की जाएगी।
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इसके बाद किसानों ने नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। विष्णु प्रताप सिंह, मुकेश पाल, सत्यपाल, सुखपाल, प्रेमपाल, सत्यवीर सिंह, नन्हे राम, कृपाल सिंह, विशन पाल, रवि गुप्ता, विनेश कुमार, धर्म सिंह, शिशुपाल सिंह, मनवीर सिंह, महीलाल, यादराम, गणेश ईशु प्रखर, नरेश राघव, मुकेश राघव, विनोद राघव, सुरेंद्र राघव मौजूद रहे।
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उधर, किसान संघर्ष समिति की बैठक कान्हा धाम में हुई। इसमें वक्ताओं ने नोटबंदी से पैदा हुए हालात को किसान विरोधी बताया। इसके लिए आंदोलन शुरु किए जाने की मांग की गई। राष्ट्रीय अध्यक्ष रामेश्वर दयाल शर्मा ने कहा कि अभी तक किसानों को फसल नुकसान का मुआवजा नहीं मिला है। अब एक हजार व पांच सौ के नोटबंदी ने किसान की कमर तोड़कर रख दी। पूरनलाल, गीता देवी, देवपाल, संजीव कुमार, सोमपाल सिंह, छुटटन सिंह, गंगाराम मौर्य, लेखराज मौर्य, कैलाश यादव, प्रेमपाल चौहान, रोहित कुमार आदि शामिल रहे। अध्यक्षता बलवंत सिंह ने की तथा संचालन मंगल सैन सैनी ने किया।
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सहकारी समितियों पर नहीं मिली खाद, प्रदर्शन
संभल। किसानों को सहकारी समितियों पर हजार और पांच सौ के पुराने नोटों से खाद बीज नहीं मिल पा रहा है। इससे नाराज किसानों ने एडीएम से मिलकर अपनी समस्या बताई। वहीं, मंडी समिति में किसानों ने प्रदर्शन किया। सहकारी समितियों के 40 बीज विक्रय केंद्र 40 हैं। किसी भी केंद्र पर हजार और पांच सौ रुपये के पुराने नोट नहीं लिए जा रहे हैं। केंद्रों पर चेक से छोटे नोट और आरटीजीएस और नेफ्ट के माध्यम से आने वाली धनराशि पर बीज दिए जा रहे हैं।
जिनके पास छोेटे नोट और बैंक से धनराशि ट्रांसफर करने का विकल्प नहीं है। उनको खाद-बीज के लिए भटकना पड़ रहा है। जिला सहायक निबंधक योगेंद्र पाल सिंह ने बताया कि टीवी और अखबार में पुराने नोट से बीज मिलने के संबंध में जब लखनऊ में एडीशनल रजिस्ट्रार से बातचीत की। तो उन्होंने शासन से बातचीत के ही स्थिति स्पष्ट करने की बात कही। बताया कि सहकारी समितियां, सहकारी बैंकों से जुड़ी हुई हैं। जिला सहकारी बैंक में पुरानी करेंसी जमा किए जाने पर पाबंदी लग चुकी है।
इफ्को के एरिया मैनेजर बीआर वर्मा ने कहा कि सरकारी संस्थाओं से पुराने नोटों पर खाद-बीज दिए जाने का अभी कोई आदेश उनके पास नहीं आया है। अपर जिलाधिकारी आरपी यादव ने बताया कि शासन ने राजकीय बीज भंडारों से पुराने नोटों पर बीज दिए जाने के आदेश दिए हैं। सहकारी संस्थाओं के लिए अभी आदेश नहीं हुए हैं।
चंदौसी(ब्यूरो)। मंडी समिति में अपनी फसल बेचने के लिए गए किसानों को बैरंग ही वापस लौटना पड़ा। मंडी समिति स्थिति आढ़तियों ने नकदी की समस्या के चलते किसानों की फसल खरीदना बंद कर दिया है। मंडी में कारोबार की बंदी के बाद परेशान किसान मंडी सचिव से मिले। समस्या के निदान की मांग की। लाल सिंह, मंसूर अली खां, सत्य प्रकाश, बिजेंद्र सिंह, भीकम सिंह, मनोज कुमार, सुमित सिंह, सुरेश पाल, प्रभाकर, अजय कुमार, महेंद्र सिंह, बबलू, प्रेमपाल, राजपाल, होती राम मौजूद रहे।
संभल। नोटबंदी के बाद खाद की बिक्री घट गई है। सरकारी केंद्रों पर एटीएम और डेबिट कार्ड से पेमेंट लेने की कोई व्यवस्था नहीं है। इससे किसान परेशान हो रहे हैं। कुछ किसान अपने बैंक खातों के माध्यम से आरटीजीएस और नेफ्ट के माध्यम से धनराशि सरकारी क्रय केंद्रों पर जमा कर रहे हैं। उन्हें ही खाद और बीज मिल रहा है। इफ्को के संभल जनपद के एरिया मैनेजर बीआर वर्मा ने कहा कि जिले में इफ्को के आठ केंद्र हैं। नोटबंदी के बाद बिक्री घटकर चौथाई रह गई है। आने वाले दिनों में स्वैप मशीनें लगाकर किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड से धन स्वीकार करने की व्यवस्था की जाएगी।