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शिक्षक की टेबल पर गिरा छत का प्लास्टर
अमर उजाला/ ब्यूरोसंभल
Updated Sun, 24 Jul 2016 01:17 AM IST
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शिक्षक की टेबल पर गिरा लिंटर का मलबा।
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शहर के सरकारी स्कूलों में कई ऐसे हैं जिनके भवन जर्जर हैं फिर भी पढ़ाई हो रही है। जोखिम भरे भवनों में बच्चों की पढ़ाई कराई जा रही है। बालक प्राइमरी विद्यालय डूंगरसराय और कन्या प्राथमिक विद्यालय मियांसराय की इमारतें जर्जर हैं, वहां पढ़ाई प्रभावित होती है।
शुक्रवार को स्कूलों की दशा के बारे में सर्वे के दौरान यह जानकारी सामने आई थी। इसके बाद शनिवार को एक और स्कूल सामनेे आया है जहां पर भवन जर्जर है। कन्या प्राइमरी पाठशाला कोटगर्बी नवीन के नाम से संचालित इस विद्यालय में 8.15 बजे हादसा होते होते बचा। स्कूल में सिर्फ दो ही कक्ष हैं। एक कक्ष की छत कमजोर है और बारिश में पानी टपकता है। दूसरे कक्ष की छत जर्जर हो गई है और प्लास्टर टूटकर गिरता है। प्लास्टर टूटकर गिरने वाले कक्ष को बंद ही कर दिया गया है।
इंचार्ज अध्यापक सादिक हुसैन ने बताया कि जब वह आठ बजे स्कूल पहुंचे तो बारिश का पानी टपक रहा था इसलिए उन्होंने दूसरा कक्ष खोला तभी उसने सामने ही छत का प्लास्टर टूटकर टेबिल पर गिरा। इसलिए उस कक्ष में बच्चों को नहीं बैठाया जा सका। बरामदे में पढ़ाई कराई गई। इस विद्यालय में 130 बच्चे पंजीकृत हैं। कक्ष सिर्फ दो ही हैं। जबकि पांच कक्षाओँ के संचालन के लिए पांच कक्ष जरूरी हैं। साथ ही पांच शिक्षक होनेे चाहिए। शिक्षक भी दो हैं।
शुक्रवार को स्कूलों की दशा के बारे में सर्वे के दौरान यह जानकारी सामने आई थी। इसके बाद शनिवार को एक और स्कूल सामनेे आया है जहां पर भवन जर्जर है। कन्या प्राइमरी पाठशाला कोटगर्बी नवीन के नाम से संचालित इस विद्यालय में 8.15 बजे हादसा होते होते बचा। स्कूल में सिर्फ दो ही कक्ष हैं। एक कक्ष की छत कमजोर है और बारिश में पानी टपकता है। दूसरे कक्ष की छत जर्जर हो गई है और प्लास्टर टूटकर गिरता है। प्लास्टर टूटकर गिरने वाले कक्ष को बंद ही कर दिया गया है।
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इंचार्ज अध्यापक सादिक हुसैन ने बताया कि जब वह आठ बजे स्कूल पहुंचे तो बारिश का पानी टपक रहा था इसलिए उन्होंने दूसरा कक्ष खोला तभी उसने सामने ही छत का प्लास्टर टूटकर टेबिल पर गिरा। इसलिए उस कक्ष में बच्चों को नहीं बैठाया जा सका। बरामदे में पढ़ाई कराई गई। इस विद्यालय में 130 बच्चे पंजीकृत हैं। कक्ष सिर्फ दो ही हैं। जबकि पांच कक्षाओँ के संचालन के लिए पांच कक्ष जरूरी हैं। साथ ही पांच शिक्षक होनेे चाहिए। शिक्षक भी दो हैं।
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