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बस से आए प्रवासी मजदूरों की नहीं हुई थर्मल स्क्रीनिंग, स्वास्थ्य विभाग ने जांच बिना घर भेजा
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संभल। स्वास्थ्य विभाग की प्रवासी मजदूरों को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आई है। शुक्रवार की रात आठ बजे करीब राजस्थान से असमोली क्षेत्र में लौटे 12 मजदूरों की थर्मल स्क्रीनिंग नहीं की गई। बल्कि मजदूरों को घर जाने दिया गया। इन मजदूरों व ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से सेहत का परीक्षण कराने का आग्रह किया लेकिन इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से कह दिया गया कि शनिवार को सेहत का परीक्षण किया जाएगा।
अब सवाल उठता है कि जहां प्रवासी मजदूर लगातार संक्रमित निकल रहे हैं वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग इन्हें लेकर लापरवाही बरत रहा है। ऐसे में संक्रमण को रोकना कैसे संभव है। असमोली के गांव शाहबाजपुर कला निवासी 12 लोग राजस्थान के बागडेर में लॉकडाउन के चलते फंस गए थे। यह सभी लोग सैलून चलाते थे। राजस्थान सरकार ने इन प्रवासी मजदूरों को गांव के लिए रवाना कर दिया। इसकी जानकारी संभल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को भी थी। शुक्रवार को रात यह प्रवासी मजदूर गांव पहुंच गए। इन मजदूरों और ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग को जांच के लिए सूचना दी।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से कहा गया कि फिलहाल जांच करने वाला कोई नहीं है। सभी मजदूरों को उनके घर भेज दिया जाए। असमोली विकास खंड अधिकारी ने ग्राम प्रधान को सूचना कर स्कूल में ठहरने की व्यवस्था कराने के लिए कहा लेकिन जब तक मजदूर अपने घरों में पहुंच चुके थे।
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शनिवार को सुबह इन मजदूरों की सेहत का परीक्षण किया गया है। अब सवाल यह उठता है कि इन प्रवासी मजदूरों का रात के समय ही स्वास्थ्य परीक्षण क्यों नहीं किया गया। यदि सेहत का परीक्षण होना संभव नहीं था तो इनके ठहरने की व्यवस्था पहले से क्यों नहीं की गई। यदि इन प्रवासी मजदूरों में कोई संक्रमित हुआ तो संक्रमण दूसरे लोगों में भी फैल गया होगा। स्वास्थ्य विभाग इस खतरे से अंजान बनने का प्रयास कर रहा है।
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अब सवाल उठता है कि जहां प्रवासी मजदूर लगातार संक्रमित निकल रहे हैं वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग इन्हें लेकर लापरवाही बरत रहा है। ऐसे में संक्रमण को रोकना कैसे संभव है। असमोली के गांव शाहबाजपुर कला निवासी 12 लोग राजस्थान के बागडेर में लॉकडाउन के चलते फंस गए थे। यह सभी लोग सैलून चलाते थे। राजस्थान सरकार ने इन प्रवासी मजदूरों को गांव के लिए रवाना कर दिया। इसकी जानकारी संभल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को भी थी। शुक्रवार को रात यह प्रवासी मजदूर गांव पहुंच गए। इन मजदूरों और ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग को जांच के लिए सूचना दी।
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से कहा गया कि फिलहाल जांच करने वाला कोई नहीं है। सभी मजदूरों को उनके घर भेज दिया जाए। असमोली विकास खंड अधिकारी ने ग्राम प्रधान को सूचना कर स्कूल में ठहरने की व्यवस्था कराने के लिए कहा लेकिन जब तक मजदूर अपने घरों में पहुंच चुके थे।
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शनिवार को सुबह इन मजदूरों की सेहत का परीक्षण किया गया है। अब सवाल यह उठता है कि इन प्रवासी मजदूरों का रात के समय ही स्वास्थ्य परीक्षण क्यों नहीं किया गया। यदि सेहत का परीक्षण होना संभव नहीं था तो इनके ठहरने की व्यवस्था पहले से क्यों नहीं की गई। यदि इन प्रवासी मजदूरों में कोई संक्रमित हुआ तो संक्रमण दूसरे लोगों में भी फैल गया होगा। स्वास्थ्य विभाग इस खतरे से अंजान बनने का प्रयास कर रहा है।