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Sambhal News: भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच में लापरवाही, बीएसए समेत चार अधिकारियों का वेतन रोका
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संभल। ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार जैसे आरोपों की जांच में लापरवाही बरतने वाले जिला स्तरीय चार अधिकारियों के वेतन पर डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने रोक लगा दी है। तीन दिन में रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट न मिलने पर सभी के खिलाफ कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है। डीएम की इस कार्रवाई से जांच अधिकारियों में खलबली है।दरअसल, संभल ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत मवई ठाकुरान, असमोली ब्लॉक क्षेत्र की सैंधरी, असमोली और बाबूखेड़ा, जबकि पवांसा ब्लॉक क्षेत्र की सौंधन मोहम्मदपुर के ग्रामीणों द्वारा गांव में कराए गए विकास कार्यों में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार करने संबंधी आरोप लगाकर डीएम से शिकायतें की गईं। इन शिकायतों का डीएम ने संज्ञान लिया और जांच के लिए जिला स्तरीय अधिकारियों को नियुक्त किया और तय समय में जांच करके रिपोर्ट मांगी लेकिन अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
यही कारण है कि नियत बीत जाने के बावजूद किसी भी ग्राम पंचायत की जांच रिपोर्ट डीएम तक नहीं पहुंची। सूत्र बताते हैं कि इस संबंध में जिला प्रशासन के ढुलमुल रवैये और लापरवाही के चलते विभिन्न माध्यमों से शासन स्तर पर भी शिकायतें पहुंचीं। इसके बाद शासन ने सख्ती की।
डीएम ने आदेश जारी किया है। इस आदेश के मुताबिक, ग्राम पंचायत मवई ठाकुरान के लिए नियुक्त जिला प्रोबेशन अधिकारी, सैंधरी में जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी और जिला लेखा परीक्षा अधिकारी, सौंधन मोहम्मदपुर में बीएसए, जबकि बाबूखेड़ा में डीआईओएस का अग्रिम महीनों में मिलने वाले भुगतान पर रोक लगा दी गई है। साथ ही, चेतावनी दी गई है कि जांच आख्या अधिकतम तीन दिनों के अंदर उपलब्ध कराई जाए। अन्यथा फिर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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इनसेट
जिले की 80 ग्राम पंचायतों में लंबित हैं जांचें
डीएम के द्वारा भले ही चार जिला स्तरीय अधिकारियों का वेतन रोका गया है लेकिन रिकॉर्ड के मुताबिक, संभल जिले में करीब 80 ग्राम पंचायतों में जांच इसी तरह लंबित हैं। इनमें 62 ऐसी हैं, जो वर्तमान प्रधानों से जुड़ीं हैं, जबकि आठ पूर्व प्रधानों से जुड़ी हैं। वहीं, सात ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जहां अंतिम जांच रिपोर्ट ही लंबित है। हालांकि, अगस्त माह में डीएम ने इन सभी ग्राम पंचायतों में नियुक्त जांच अधिकारियों के साथ बैठक की थी और शिकायतों का निस्तारण शीघ्र करने का निर्देश दिया था। लेकिन इसके बाद भी निस्तारण नहीं हो सका है।
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2018 से अब तक लंबित हैं यह जांच
बता दें कि 80 शिकायतों में कई ऐसी शिकायतें शामिल हैं, जो 2018 तक की हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब इतने लंबे समय से यह शिकायतें लंबित हैं तो फिर अगस्त में डीएम के द्वारा ली गई बैठक का असर कितना हुआ होगा। जांच लंबित होने में भी सांठगांठ की जाती है। इससे समय पर जांच पूरी नहीं हो सके और शिकायत लंबित ही रहे।
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव नजदीक, जांच की हलचल ने बढ़ाईं मुश्किलें
डीएम की ओर से ऐसे समय में सख्त कार्रवाई की गई, जब त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव नजदीक हों। जांच की हलचल ने उन लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, जो सीधे इससे प्रभावित होंगे। आमतौर पर प्रधान और सचिव इसमें मुख्य होते हैं, जिनकी सहमति से ही विकास कार्य कराए जाते हैं और फिर संयुक्त रूप से शासकीय धनराशि की निकासी की जाती है। जांच रिपोर्ट सामने आने पर कार्रवाई भी होना तय है।
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यही कारण है कि नियत बीत जाने के बावजूद किसी भी ग्राम पंचायत की जांच रिपोर्ट डीएम तक नहीं पहुंची। सूत्र बताते हैं कि इस संबंध में जिला प्रशासन के ढुलमुल रवैये और लापरवाही के चलते विभिन्न माध्यमों से शासन स्तर पर भी शिकायतें पहुंचीं। इसके बाद शासन ने सख्ती की।
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डीएम ने आदेश जारी किया है। इस आदेश के मुताबिक, ग्राम पंचायत मवई ठाकुरान के लिए नियुक्त जिला प्रोबेशन अधिकारी, सैंधरी में जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी और जिला लेखा परीक्षा अधिकारी, सौंधन मोहम्मदपुर में बीएसए, जबकि बाबूखेड़ा में डीआईओएस का अग्रिम महीनों में मिलने वाले भुगतान पर रोक लगा दी गई है। साथ ही, चेतावनी दी गई है कि जांच आख्या अधिकतम तीन दिनों के अंदर उपलब्ध कराई जाए। अन्यथा फिर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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जिले की 80 ग्राम पंचायतों में लंबित हैं जांचें
डीएम के द्वारा भले ही चार जिला स्तरीय अधिकारियों का वेतन रोका गया है लेकिन रिकॉर्ड के मुताबिक, संभल जिले में करीब 80 ग्राम पंचायतों में जांच इसी तरह लंबित हैं। इनमें 62 ऐसी हैं, जो वर्तमान प्रधानों से जुड़ीं हैं, जबकि आठ पूर्व प्रधानों से जुड़ी हैं। वहीं, सात ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जहां अंतिम जांच रिपोर्ट ही लंबित है। हालांकि, अगस्त माह में डीएम ने इन सभी ग्राम पंचायतों में नियुक्त जांच अधिकारियों के साथ बैठक की थी और शिकायतों का निस्तारण शीघ्र करने का निर्देश दिया था। लेकिन इसके बाद भी निस्तारण नहीं हो सका है।
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2018 से अब तक लंबित हैं यह जांच
बता दें कि 80 शिकायतों में कई ऐसी शिकायतें शामिल हैं, जो 2018 तक की हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब इतने लंबे समय से यह शिकायतें लंबित हैं तो फिर अगस्त में डीएम के द्वारा ली गई बैठक का असर कितना हुआ होगा। जांच लंबित होने में भी सांठगांठ की जाती है। इससे समय पर जांच पूरी नहीं हो सके और शिकायत लंबित ही रहे।
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव नजदीक, जांच की हलचल ने बढ़ाईं मुश्किलें
डीएम की ओर से ऐसे समय में सख्त कार्रवाई की गई, जब त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव नजदीक हों। जांच की हलचल ने उन लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, जो सीधे इससे प्रभावित होंगे। आमतौर पर प्रधान और सचिव इसमें मुख्य होते हैं, जिनकी सहमति से ही विकास कार्य कराए जाते हैं और फिर संयुक्त रूप से शासकीय धनराशि की निकासी की जाती है। जांच रिपोर्ट सामने आने पर कार्रवाई भी होना तय है।