संभल। नगर के मोहल्ला बेगम सराय स्थित इंतेखाब संभली के आवास पर बज्मे इंतेखाब के तत्वाधान में मुशायरे का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि हाफिज तंजीम सैफी रहे। शायरों ने कलाम पेश किए। मुशायरे की शुरुआत हकीम अब्दुल मजीद ने तिलावते कलामे पाक से की। नाते पाक पेश करके इसे आगे बढ़ाया। गजल के दौर का आगाज करते हुए गुलजार नोशाही ने कहा दुनिया में उसके होने न होने से क्या गरज, मां बाप का जो बेटा सहारा नहीं हुआ। शाह आलम रौनक ने कहा, खुद्दारियों ने डाल दी जंजीर पांव में हमसे अमीरी शहर को सजदा नहीं हुआ। वकील खां ने कहा बेदिल चराग ही नहीं तुम आफताब थे, फिर क्यों तुम्हारे घर में उजाला नहीं हुआ। साजिद ने कहा दुखतर अमीर शख्स की तो हो गई विदा, मुफलिस की नेक बेटी का रिश्ता नहीं हुआ।
हकीम अब्दुल मजीद ने कहा मजीद हमारे गांव में हर धर्म के हैं लोग, यह खास बात है कभी झगड़ा नहीं हुआ। दानिश गदीरी, तौफीक आजाद, तनवीर अशरफी, सय्यद हुसैन अफसर, मोहम्मद सुल्तान खां कलीम ने भी कलाम पेश किए। अध्यक्षता कर रहे वकार रोमानी ने कहा अदना की एक सदा पे उतर आए तूर पर, यह शौके खुद नुमाई के पर्दा नहीं हुआ। संचालन कर रहे अजहर मुरादाबादी ने कहा दिल चीख उठा कभी, कभी रोया गया लहू, जालिम तेरे फिराक में क्या क्या नहीं हुआ। देर रात तक चले मुशायरे में रिजवान मसरूर, उस्मान अंसारी, कौसर संभली, शाह आलम, रौनक, शुजा अनवर, शफीक बरकाती, हकीम बुरहान संभली, नोशाद संभली, मुजाहिद आदि मौजूद रहे।