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Sambhal News: भगवान शिव ने कल्कि को चार वेद समेत सिखाईं 18 विद्याएं
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संभल में श्री कल्कि कथा प्रवचन करते तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य महाराज।संवाद
संभल। गांव ऐंचोड़ा कंबोह में चल रही श्री कल्कि कथा में तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने शनिवार को कथा में प्रवचन करते हुए कहा कि भगवान शिव जी ने भगवान कल्कि को चार वेद, चार उपनिषद, मीमांसा समेत 18 विद्याएं सिखाईं। इसके साथ ही भगवान कल्कि और पद्मा के विवाह का प्रसंग सुनाया। मनोहारी प्रसंग सुनकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठे।
श्री कल्कि महोत्सव के क्रम में आयोजित श्री कल्कि कथा के छठवें दिन तुलसी पीठाधीश्वर रामभद्राचार्य महाराज ने कल्कि कथा सुनाने से पहले सनातन धर्म की व्याख्या की। बताया कि हिंदू अपने धर्म के प्रति सजग नहीं है। इस कारण पतन हो रहा है। उन्हें धर्म के प्रति सजग होना पड़ेगा। कथा में प्रवचन करते हुए कहा कि भगवान शिव जी ने भगवान कल्कि को चार वेद, चार उपनिषद, मीमांसा समेत 18 विद्याएं सिखाईं। इसके बाद वह घर लौटे।
आठ वर्ष की आयु में उन्हें संभल का राजा बनाया गया। पंडाल में यह प्रसंग सुनकर कल्कि भगवान की जय के जयकारे गूंज उठे। इसके बाद उनके विवाह की चिंता परिजनों को हुई। महाराज ने सुनाया कि पद्मा नाम की कन्या का विवाह भगवान कल्कि के साथ तय हुआ। लेकिन इसके पहले स्वयंवर हुआ। पद्मा सुंदर थीं और उन्हें वरदान मिला हुआ था कि उनकी ओर कोई भी पुरुष कामवासना की दृष्टि से देखेगा तो वह नारी बन जाएगा। स्वयंवर में आए सभी राजा नारी बन गए। यह देख सब अचरज में पड़ गए।
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इसके बाद भगवान कल्कि को बुलवाया गया। भगवान कल्कि अपने शिवदत्त नामक घोड़े से आए और पद्मा से अपना विवाह रचाया। सात फेरे पड़े। विवाह रचाने के बाद वह घर लौटे और मां-पिता का आशीर्वाद लिया। भगवान ने अपने पिता से कहा कि अब मुझे अश्वमेघ यज्ञ कराना है लेकिन इसका यज्ञमान मैं खुद नहीं बनूंगा। पिता को यज्ञमान बनाया और यज्ञ करवाया। इस तरह संभल राजधानी बना।
पीठाधीश्वर ने जौहर करने वाली पदमावती की भी चर्चा की। इस दौरान उत्तर प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल, विधान परिषद के सदस्य डॉ. जयपाल सिंह व्यस्त, पूर्व विधायक सतीश गौतम, बाल योगी दीनानाथ महाराज, खिलेंद्र चाहल, दुष्यंत शास्त्री, त्यागी अशोका कृष्णम आदि रहे।
रामचरित मानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करें सरकार : रामभद्राचार्य
संभल। तुलसी पीठाधीश्वर रामभद्राचार्य ने कल्कि कथा के दौरान राम चरित मानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की मांग उठाई। विस्तार से व्याख्या करते हुए बताया कि रामचरित मानस ही ऐसा ग्रंथ है, जिनकी चौपाई के शब्द महात्मा गांधी ने रघुपति राघव राजारनाम, पतित पावन सीताराम में शामिल की। सरकार को पहला फायदा तो यही होगा कि इसके राष्ट्र गंथ बनने से महात्मा गांधी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। बताया कि रामचरित मानस ही ऐसा ग्रंथ है, जिसका 150 देशों में पाठ होता है। संवाद
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श्री कल्कि महोत्सव के क्रम में आयोजित श्री कल्कि कथा के छठवें दिन तुलसी पीठाधीश्वर रामभद्राचार्य महाराज ने कल्कि कथा सुनाने से पहले सनातन धर्म की व्याख्या की। बताया कि हिंदू अपने धर्म के प्रति सजग नहीं है। इस कारण पतन हो रहा है। उन्हें धर्म के प्रति सजग होना पड़ेगा। कथा में प्रवचन करते हुए कहा कि भगवान शिव जी ने भगवान कल्कि को चार वेद, चार उपनिषद, मीमांसा समेत 18 विद्याएं सिखाईं। इसके बाद वह घर लौटे।
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आठ वर्ष की आयु में उन्हें संभल का राजा बनाया गया। पंडाल में यह प्रसंग सुनकर कल्कि भगवान की जय के जयकारे गूंज उठे। इसके बाद उनके विवाह की चिंता परिजनों को हुई। महाराज ने सुनाया कि पद्मा नाम की कन्या का विवाह भगवान कल्कि के साथ तय हुआ। लेकिन इसके पहले स्वयंवर हुआ। पद्मा सुंदर थीं और उन्हें वरदान मिला हुआ था कि उनकी ओर कोई भी पुरुष कामवासना की दृष्टि से देखेगा तो वह नारी बन जाएगा। स्वयंवर में आए सभी राजा नारी बन गए। यह देख सब अचरज में पड़ गए।
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इसके बाद भगवान कल्कि को बुलवाया गया। भगवान कल्कि अपने शिवदत्त नामक घोड़े से आए और पद्मा से अपना विवाह रचाया। सात फेरे पड़े। विवाह रचाने के बाद वह घर लौटे और मां-पिता का आशीर्वाद लिया। भगवान ने अपने पिता से कहा कि अब मुझे अश्वमेघ यज्ञ कराना है लेकिन इसका यज्ञमान मैं खुद नहीं बनूंगा। पिता को यज्ञमान बनाया और यज्ञ करवाया। इस तरह संभल राजधानी बना।
पीठाधीश्वर ने जौहर करने वाली पदमावती की भी चर्चा की। इस दौरान उत्तर प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल, विधान परिषद के सदस्य डॉ. जयपाल सिंह व्यस्त, पूर्व विधायक सतीश गौतम, बाल योगी दीनानाथ महाराज, खिलेंद्र चाहल, दुष्यंत शास्त्री, त्यागी अशोका कृष्णम आदि रहे।
रामचरित मानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करें सरकार : रामभद्राचार्य
संभल। तुलसी पीठाधीश्वर रामभद्राचार्य ने कल्कि कथा के दौरान राम चरित मानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की मांग उठाई। विस्तार से व्याख्या करते हुए बताया कि रामचरित मानस ही ऐसा ग्रंथ है, जिनकी चौपाई के शब्द महात्मा गांधी ने रघुपति राघव राजारनाम, पतित पावन सीताराम में शामिल की। सरकार को पहला फायदा तो यही होगा कि इसके राष्ट्र गंथ बनने से महात्मा गांधी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। बताया कि रामचरित मानस ही ऐसा ग्रंथ है, जिसका 150 देशों में पाठ होता है। संवाद