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तेंदुए के खौफ ने ग्रामीणों का छीना चैन
ब्यूरो/अमर उजाला संभल
Updated Wed, 06 Jul 2016 01:16 AM IST
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तेंदुआ
- फोटो : ANI
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मुरादाबाद, अमरोहा आदि पड़ोसी जनपदों में बरकरार तेंदुए का खौफ संभल तक फैल गया है। अब मंगलवार को असमोली क्षेत्र के सैुदपुर इम्मा में तेंदुए के शावक दिखाई दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि, खेत में इनके पंजों के निशान भी हैं। जल्द ही यह बात पूरे गांव में फैल गई। दहशतजदा ग्रामीण खेतों में जाने से भी डर रहे हैं। सूचना पर वनमहकमे की टीम पहुंचे, टीम का कहना है कि ये तेंदुए के पंजे नहीं लगते। फिलहाल ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
सैदनगली चौधपुरपुर मार्ग पर सैदपुर इम्मा गांव है। गांव के एक बड़े हिस्सा जंगल है। खेतों में आए दिन जंगली जानवर दिखाई पड़ जाते हैं। सैदपुर इम्मा निवासी छत्रपाल मंगलवार को सुबह 11.30 बजे अपने खेत पर था। उनके साथ सचिन, हरिओम गजराम आदि भी थे। किसानों की बातों पर यकीन करें तो अचानक उनके सामने से तेंदुए के दो शावक निकल आए। इससे वे घबरा गए। कुछ देर बाद उधर देखा तो पंजों के बड़े निशान दिखाई पड़े।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि, ये पंजे तेंदुए के हैं। इस पर असमोली थाना पुलिस मौके पहुंची। वन दरोगा रजीउल अब्बास भी टीम के साथ पहुंचे और निशान देखे। साथ ही व्हाट्सएप पर निशान के फोटो डीएफओ को भेजे गए। डीएफओ ने कंजरवेटर और वन्य जीव विशेषज्ञों को पंजों के निशान दिखाकर राय मांगी। विशेषज्ञों का कहना है कि, पंजों के निशान तेंदुए के नहीं हैं।
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डीएओ के मुताबिक तेंदुआ बिल्ली प्रजाति में आता है। उसके नाखून होते हैं। इन पंजों में नाखून नहीं दिखते हैं। यह कुत्ता प्रजाति के जानवर के पंजे हैं। यह जानवर जंगली कुत्ता या लकड़बग्घा हो सकता है। फिलहाल ग्रामीणों को समूह में ही खेतों की ओर जाने की सलाह दी गई है। कहा कि, बच्चों को अकेले जंगल में न भेजें।
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सैदनगली चौधपुरपुर मार्ग पर सैदपुर इम्मा गांव है। गांव के एक बड़े हिस्सा जंगल है। खेतों में आए दिन जंगली जानवर दिखाई पड़ जाते हैं। सैदपुर इम्मा निवासी छत्रपाल मंगलवार को सुबह 11.30 बजे अपने खेत पर था। उनके साथ सचिन, हरिओम गजराम आदि भी थे। किसानों की बातों पर यकीन करें तो अचानक उनके सामने से तेंदुए के दो शावक निकल आए। इससे वे घबरा गए। कुछ देर बाद उधर देखा तो पंजों के बड़े निशान दिखाई पड़े।
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प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि, ये पंजे तेंदुए के हैं। इस पर असमोली थाना पुलिस मौके पहुंची। वन दरोगा रजीउल अब्बास भी टीम के साथ पहुंचे और निशान देखे। साथ ही व्हाट्सएप पर निशान के फोटो डीएफओ को भेजे गए। डीएफओ ने कंजरवेटर और वन्य जीव विशेषज्ञों को पंजों के निशान दिखाकर राय मांगी। विशेषज्ञों का कहना है कि, पंजों के निशान तेंदुए के नहीं हैं।
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डीएओ के मुताबिक तेंदुआ बिल्ली प्रजाति में आता है। उसके नाखून होते हैं। इन पंजों में नाखून नहीं दिखते हैं। यह कुत्ता प्रजाति के जानवर के पंजे हैं। यह जानवर जंगली कुत्ता या लकड़बग्घा हो सकता है। फिलहाल ग्रामीणों को समूह में ही खेतों की ओर जाने की सलाह दी गई है। कहा कि, बच्चों को अकेले जंगल में न भेजें।