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रुदायन के जंगल में खूंखार कुत्तों के हमले में मारा गया था ब्लैक बक
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल
Updated Sat, 15 Oct 2016 12:49 AM IST
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हयातनगर थाना क्षेत्र के रुदायन गांव के जंगल में गुरुवार को शाम 6.30 बजे मृत हालत में एक ब्लैक बक मिला था।
गांव वालों ने थाना पुलिस और वन विभाग को सूचना दी थी। थाना पुलिस के साथ वन विभाग की टीम ने पहुंचकर ब्लैक बक को अपने कब्जे में लिया। ब्लैक बक के शरीर का 30 प्रतिशत हिस्सा खूंखार कुत्ते और जंगली जानवर खा चुके थे। पुलिस और वन विभाग की टीम ने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया।
इसके बाद शुक्रवार को सुबह वन विभाग की पवांसा स्थित नर्सरी में पवांसा के पशु चिकित्साधिकारी डा.आलोक कुमार सेहरावत ने पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम के बाद पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि ब्लैक बक की मौत गोली लगने या धारदार हथियार के हमले से नहीं हुई है। हालात जंगली जानवर के हमले से मौत की ओर संकेत कर रहे हैं।
हमले के बाद रक्तस्राव हो जाने से उसने दम तोड़ा है। बताया कि संभल के आसपास जहां पर ब्लैक बक पाए जाते हैं। वे कुत्ते मांसाहारी हैं और खूंखार हैं। इनके हमलों में पहले भी ब्लैक बक तथा हिरन घायल हुए हैं।
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गंगा की कटरी से लेकर संभल जिले के भूड़ इलाके में बड़ी संख्या में ब्लैक बक पाए जाते हैं। स्थानीय आबादी तो ब्लैक बक की सुरक्षा के लिए सतर्क है लेकिन कुत्तों के हमलों से सुरक्षा करना कठिन हो रहा है। जिले में ब्लैक बक के लिए शिकारियों से कहीं ज्यादा कुत्तों और जंगली जानवरों का खतरा है।
संभल जिले के गुन्नौर तहसील की गंगा कटरी और बहजोई और हयातनगर थाना क्षेत्र से जुड़े रेतीले इलाकों में ब्लैक डक का विचरण है। करीब 40-50 किलोमीटर क्षेत्र में ब्लैक बक देखे जाते हैं। ब्लैक डक को खतरा तब होता है, जब खेत फसलों से खाली होते हैं। ब्लैक डक अपने भोजन की तलाश में निकलते हैं और उन पर लोगों की नजर पड़ती है। आमतौर पर क्षेत्रीय लोग ब्लैक बक की सुरक्षा करते हैं। इसलिए यहां दो वर्ष में शिकार के मामले सामने नहीं आए हैं, लेकिन कुत्तों और जंगली जानवरों का खतरा इनके लिए सबसे बड़ा है।
पशु चिकित्सा विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक दो वर्ष के भीतर ब्लैक बक और डीयर पर जंगली जानवरों और कुत्तों के हमले में घायल हुए हैं। घायल ब्लैक बक और डीयर हमले के कुछ ही घंटों में मारे गए हैं। जबकि तीन ब्लैक बक ऐसे रहे हैं, जिनका वन विभाग और ग्रामीणों ने उपचार कराया है। उपचार के एक दो दिन में यह ब्लैक बक भी दम तोड़ गए।
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गांव वालों ने थाना पुलिस और वन विभाग को सूचना दी थी। थाना पुलिस के साथ वन विभाग की टीम ने पहुंचकर ब्लैक बक को अपने कब्जे में लिया। ब्लैक बक के शरीर का 30 प्रतिशत हिस्सा खूंखार कुत्ते और जंगली जानवर खा चुके थे। पुलिस और वन विभाग की टीम ने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया।
इसके बाद शुक्रवार को सुबह वन विभाग की पवांसा स्थित नर्सरी में पवांसा के पशु चिकित्साधिकारी डा.आलोक कुमार सेहरावत ने पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम के बाद पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि ब्लैक बक की मौत गोली लगने या धारदार हथियार के हमले से नहीं हुई है। हालात जंगली जानवर के हमले से मौत की ओर संकेत कर रहे हैं।
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हमले के बाद रक्तस्राव हो जाने से उसने दम तोड़ा है। बताया कि संभल के आसपास जहां पर ब्लैक बक पाए जाते हैं। वे कुत्ते मांसाहारी हैं और खूंखार हैं। इनके हमलों में पहले भी ब्लैक बक तथा हिरन घायल हुए हैं।
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गंगा की कटरी से लेकर संभल जिले के भूड़ इलाके में बड़ी संख्या में ब्लैक बक पाए जाते हैं। स्थानीय आबादी तो ब्लैक बक की सुरक्षा के लिए सतर्क है लेकिन कुत्तों के हमलों से सुरक्षा करना कठिन हो रहा है। जिले में ब्लैक बक के लिए शिकारियों से कहीं ज्यादा कुत्तों और जंगली जानवरों का खतरा है।
संभल जिले के गुन्नौर तहसील की गंगा कटरी और बहजोई और हयातनगर थाना क्षेत्र से जुड़े रेतीले इलाकों में ब्लैक डक का विचरण है। करीब 40-50 किलोमीटर क्षेत्र में ब्लैक बक देखे जाते हैं। ब्लैक डक को खतरा तब होता है, जब खेत फसलों से खाली होते हैं। ब्लैक डक अपने भोजन की तलाश में निकलते हैं और उन पर लोगों की नजर पड़ती है। आमतौर पर क्षेत्रीय लोग ब्लैक बक की सुरक्षा करते हैं। इसलिए यहां दो वर्ष में शिकार के मामले सामने नहीं आए हैं, लेकिन कुत्तों और जंगली जानवरों का खतरा इनके लिए सबसे बड़ा है।
पशु चिकित्सा विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक दो वर्ष के भीतर ब्लैक बक और डीयर पर जंगली जानवरों और कुत्तों के हमले में घायल हुए हैं। घायल ब्लैक बक और डीयर हमले के कुछ ही घंटों में मारे गए हैं। जबकि तीन ब्लैक बक ऐसे रहे हैं, जिनका वन विभाग और ग्रामीणों ने उपचार कराया है। उपचार के एक दो दिन में यह ब्लैक बक भी दम तोड़ गए।