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कर्ज में डूबे मनरेगा मजदूर ने लगाया फंदा, मौत
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल
Updated Sat, 17 Dec 2016 12:46 AM IST
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परिवार की हालत बेहद दयनीय थी। किसी तरह की सरकारी सहायता भी उसे नहीं मिली थी। मजदूर की मौत के बाद से परिवार में कोहराम मच गया। प्रशासन मामले की जांच कराकर कार्रवाई करने की बात कह रहा है। मजदूर के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
बिधौती फाजलपुर गांव निवासी जफरुद्दीन (50) पुत्र अब्दुल हसीम बढ़ईगीरी का काम करके अपने परिवार का जीवनयापन कर रहा था। दो साल पहले बेटी गुलनिशा की शादी की, जिसमें 14000 रुपये कर्ज लिया। उसके बाद बेटे नदीम की आंत के ऑपरेशन के लिए अपना मकान बेच दिया। जमीन का कुछ हिस्सा भी बेच दिया। करीब एक बीघा जमीन बची थी। जिससे जोतने की स्थिति भी नहीं थी। छोटी सी झोपड़ी डालकर वह अपने परिवार के लिए साथ जैसे-तैसे गुजर बसर कर रहा था। 2015-16 में 24 दिन मजदूरी मिली जिसका भुगतान उसे मिल गया था। 2016-17 में उसने कोई मजदूरी नहीं की।
परिवार पालने के लिए साहूकार से उधार ले रहा था। पत्नी मल्लों बेगम ने बताया कि साहूकार गुरुवार को उधारी मांगने आया था, रुपये नहीं होने की बात कहने पर उसने काफी खरीखोटी सुनाई, जिससे वह परेशान हो गया। उधारी चुकाने को और उधार लेने के लिए अपने गांव के अलावा तोतापुर व सिहोरा भी गया लेकिन किसी ने रुपये नहीं दिए। रात को टीनशेड में सोने गया। तंगहाली में बकरियों को बांधने वाली रस्सी का फंदा बनाकर झूल गया। सुबह पत्नी ने जाकर देखा तो होश उड़ गए। परिजन, रिश्तेदार व ग्रामीण इकट्ठा हो गए। कोतवाली पुलिस को सुबह दस बजे सूचना दी गई लेकिन दिनभर इंतजार के बाद शाम पांच बजे पुलिस मौके पर पहुंची, तब शव को पोस्टमार्टम के लिए ले गई। पत्नी मुल्लो ने बताया कि वह कई दिनों से बैंक के चक्कर काट रही थी। उसके खाते में 390 रुपये थे। वह भी नहीं निकल पाए।
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न अन्त्योदय में नाम, न मिला इंदिरा आवास
जुनावई। जफरुद्दीन के पास अन्त्योदय कार्ड था। लेकिन नई सूची मेें उसका नाम काट दिया गया। बेहद गरीबी हालत के बाद भी नाम क्यों काटा गया इसका जवाब किसी के पास नहीं है। प्रधान मुन्नी देवी के पति जीवन सिंह ने बताया कि ग्राम सचिव को इंदिरा आवास के लिए इसका नाम दिया गया था। लेकिन ग्राम सचिव ने यह कहकर मना कर दिया कि जफरुद्दीन इंदिरा आवास के लायक नहीं है। इसी की तरह दयनीय हालत एक और व्यक्ति की है, उसका भी नाम दिया था, उसे भी आवास देने से इनकार कर दिया। जब इस पूरे मामले में बीडीओ से बातचीत की गई तो बीडीओ बिजेंद्र सिंह यादव ने बताया कि ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया, यदि जानकारी मिलती तो जरूर सहायता की जाती।
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बिधौती फाजलपुर गांव निवासी जफरुद्दीन (50) पुत्र अब्दुल हसीम बढ़ईगीरी का काम करके अपने परिवार का जीवनयापन कर रहा था। दो साल पहले बेटी गुलनिशा की शादी की, जिसमें 14000 रुपये कर्ज लिया। उसके बाद बेटे नदीम की आंत के ऑपरेशन के लिए अपना मकान बेच दिया। जमीन का कुछ हिस्सा भी बेच दिया। करीब एक बीघा जमीन बची थी। जिससे जोतने की स्थिति भी नहीं थी। छोटी सी झोपड़ी डालकर वह अपने परिवार के लिए साथ जैसे-तैसे गुजर बसर कर रहा था। 2015-16 में 24 दिन मजदूरी मिली जिसका भुगतान उसे मिल गया था। 2016-17 में उसने कोई मजदूरी नहीं की।
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परिवार पालने के लिए साहूकार से उधार ले रहा था। पत्नी मल्लों बेगम ने बताया कि साहूकार गुरुवार को उधारी मांगने आया था, रुपये नहीं होने की बात कहने पर उसने काफी खरीखोटी सुनाई, जिससे वह परेशान हो गया। उधारी चुकाने को और उधार लेने के लिए अपने गांव के अलावा तोतापुर व सिहोरा भी गया लेकिन किसी ने रुपये नहीं दिए। रात को टीनशेड में सोने गया। तंगहाली में बकरियों को बांधने वाली रस्सी का फंदा बनाकर झूल गया। सुबह पत्नी ने जाकर देखा तो होश उड़ गए। परिजन, रिश्तेदार व ग्रामीण इकट्ठा हो गए। कोतवाली पुलिस को सुबह दस बजे सूचना दी गई लेकिन दिनभर इंतजार के बाद शाम पांच बजे पुलिस मौके पर पहुंची, तब शव को पोस्टमार्टम के लिए ले गई। पत्नी मुल्लो ने बताया कि वह कई दिनों से बैंक के चक्कर काट रही थी। उसके खाते में 390 रुपये थे। वह भी नहीं निकल पाए।
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न अन्त्योदय में नाम, न मिला इंदिरा आवास
जुनावई। जफरुद्दीन के पास अन्त्योदय कार्ड था। लेकिन नई सूची मेें उसका नाम काट दिया गया। बेहद गरीबी हालत के बाद भी नाम क्यों काटा गया इसका जवाब किसी के पास नहीं है। प्रधान मुन्नी देवी के पति जीवन सिंह ने बताया कि ग्राम सचिव को इंदिरा आवास के लिए इसका नाम दिया गया था। लेकिन ग्राम सचिव ने यह कहकर मना कर दिया कि जफरुद्दीन इंदिरा आवास के लायक नहीं है। इसी की तरह दयनीय हालत एक और व्यक्ति की है, उसका भी नाम दिया था, उसे भी आवास देने से इनकार कर दिया। जब इस पूरे मामले में बीडीओ से बातचीत की गई तो बीडीओ बिजेंद्र सिंह यादव ने बताया कि ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया, यदि जानकारी मिलती तो जरूर सहायता की जाती।