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Sambhal News: असमोली में हिंदू सम्मेलन, एकजुटता के मुद्दे को दी गई धार
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संभल। असमोली के किसान इंटर कॉलेज परिसर में रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें हिंदुओं की एकजुटता के मुद्दे को धार दी गई। कहा गया कि संघ का उद्देश्य संपूर्ण हिंदू समाज को एक साथ लाना और एकता का संदेश देकर लोगों को आपस में जोड़ना है।
मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक शरद ने सामाजिक सद्भाव, एकता और नेतृत्व द्वारा सुझाए गए पांच परिवर्तनकारी बदलाव पर चर्चा की। शरद बोले कि हिंदुओं को एकता और समरसता के साथ जाति, वर्ग, भाषा और क्षेत्र के भेदभाव से ऊपर उठकर संगठित करना है। सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति के मूल्यों को मजबूत बनाना है। राष्ट्र और समाज की रक्षा के लिए सक्षम नेतृत्व तैयार करना है। यह कैसे होगा, इसकी व्याख्या करते हुए बोलेे कि बच्चों को मोबाइल फोन नहीं देना है। उन्हें सत्संग, प्रवचन का स्मरण कराना है। टीवी पर डोरेमॉन, कॉर्टून नहीं, रामायण, गीता दिखानी है। नियमित रूप से संघ की शाखा भेजना है। डॉ. हेडगेवार के विचारों का उल्लेख करते हुए विभाग प्रचारक ने कहा कि उन्होंने संघ की स्थापना की तो कोई संख्या नहीं थी, लेकिन अपना इरादा मजबूत बनाए रखा। इसका परिणाम है कि आज इतना बड़ा संगठन है। इसलिए अपना इरादा मजबूत करना है। संस्कृति, परंपराओं से जुड़ना है। स्वदेशी अपनाना है और अपनी भाषा और संस्कृति पर गर्व करते हुए राष्ट्र के प्रति कर्तव्यों को समझना है। इतना सब कर लेने से ही भारत देश महान बना रहेगा। इस दौरान आरएसएस के जिला सेवा प्रमुख गौरव कुमार, सह जिला कार्यवाह जगतवीर, भाजपा जिलाध्यक्ष हरेंद्र सिंह, हरवेंद्र, महावीर सिंह, एससी/एसटी आयोग की सदस्या साध्वी गीता प्रधान, ओमवीर शर्मा, सोनू चाहल, हर्षित कुमार, डॉ.मनोज पाल आदि रहे। संचालन खंड कार्यवाह अंकुर कुमार ने किया।
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हिंदुत्व के लिए जान देनी पड़े या फिर लेनी पड़े, तैयार हैं-ऋषिराज गिरि महाराज
संभल। हिंदू सम्मेलन के मुख्य अतिथि कैलादेवी मंदिर के महंत ऋषिराज गिरि का उद्बोधन संभल में जामा मस्जिद बनाम हरिहर मंदिर प्रकरण के ईर्द-गिर्द रहा। लोगों को आश्वस्त करते हुए बोले कि डरने की कोई जरूरत नहीं है। हिंदुत्व के लिए जान देनी पड़े या फिर किसी की लेनी पड़े, वह तैयार हैं। किसी भी स्थिति में पीछे हटने वाले नहीं हैं। इस पर भीड़ में मौजूद लोगों ने जय श्री राम के नारों का जयघोष किया और तालियां बजाकर भाषण का जोरदार स्वागत किया। महंत ने बाद में संघ की कार्यशैली को सराहा और लोगों को परस्पर जोड़े रखने के लिए साधुवाद दिया। संवाद
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मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक शरद ने सामाजिक सद्भाव, एकता और नेतृत्व द्वारा सुझाए गए पांच परिवर्तनकारी बदलाव पर चर्चा की। शरद बोले कि हिंदुओं को एकता और समरसता के साथ जाति, वर्ग, भाषा और क्षेत्र के भेदभाव से ऊपर उठकर संगठित करना है। सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति के मूल्यों को मजबूत बनाना है। राष्ट्र और समाज की रक्षा के लिए सक्षम नेतृत्व तैयार करना है। यह कैसे होगा, इसकी व्याख्या करते हुए बोलेे कि बच्चों को मोबाइल फोन नहीं देना है। उन्हें सत्संग, प्रवचन का स्मरण कराना है। टीवी पर डोरेमॉन, कॉर्टून नहीं, रामायण, गीता दिखानी है। नियमित रूप से संघ की शाखा भेजना है। डॉ. हेडगेवार के विचारों का उल्लेख करते हुए विभाग प्रचारक ने कहा कि उन्होंने संघ की स्थापना की तो कोई संख्या नहीं थी, लेकिन अपना इरादा मजबूत बनाए रखा। इसका परिणाम है कि आज इतना बड़ा संगठन है। इसलिए अपना इरादा मजबूत करना है। संस्कृति, परंपराओं से जुड़ना है। स्वदेशी अपनाना है और अपनी भाषा और संस्कृति पर गर्व करते हुए राष्ट्र के प्रति कर्तव्यों को समझना है। इतना सब कर लेने से ही भारत देश महान बना रहेगा। इस दौरान आरएसएस के जिला सेवा प्रमुख गौरव कुमार, सह जिला कार्यवाह जगतवीर, भाजपा जिलाध्यक्ष हरेंद्र सिंह, हरवेंद्र, महावीर सिंह, एससी/एसटी आयोग की सदस्या साध्वी गीता प्रधान, ओमवीर शर्मा, सोनू चाहल, हर्षित कुमार, डॉ.मनोज पाल आदि रहे। संचालन खंड कार्यवाह अंकुर कुमार ने किया।
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हिंदुत्व के लिए जान देनी पड़े या फिर लेनी पड़े, तैयार हैं-ऋषिराज गिरि महाराज
संभल। हिंदू सम्मेलन के मुख्य अतिथि कैलादेवी मंदिर के महंत ऋषिराज गिरि का उद्बोधन संभल में जामा मस्जिद बनाम हरिहर मंदिर प्रकरण के ईर्द-गिर्द रहा। लोगों को आश्वस्त करते हुए बोले कि डरने की कोई जरूरत नहीं है। हिंदुत्व के लिए जान देनी पड़े या फिर किसी की लेनी पड़े, वह तैयार हैं। किसी भी स्थिति में पीछे हटने वाले नहीं हैं। इस पर भीड़ में मौजूद लोगों ने जय श्री राम के नारों का जयघोष किया और तालियां बजाकर भाषण का जोरदार स्वागत किया। महंत ने बाद में संघ की कार्यशैली को सराहा और लोगों को परस्पर जोड़े रखने के लिए साधुवाद दिया। संवाद
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