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हर समस्या का हल बंदूक व जेल नहीं है : जियाउर्रहमान
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संभल। सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में देश को वामपंथी नक्सलवाद से मुक्त करने के प्रयासों पर चर्चा के दौरान सरकार पर कई सवाल खड़े किए। अदिवासी लोगों को आज सबसे ज्यादा नजरअंदाज किया जा रहा है। नक्सलवाद का कारण सुविधाएं न देना है। सरकार को समझना होगा कि हर समस्या का हल बंदूक और जेल नहीं है। सुरक्षा जरुरी है लेकिन व्यवस्थाएं भी होनी चाहिए।
कहा कि यह सिर्फ सुरक्षा का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि लोकतंत्र, संविधान और खासकर हाशिये पर खड़े लोग, आदिवासी आदि, उनके मुस्तकबिल से जुड़ा अहम सवाल है। आज अलग तरह का माहौल है। कई मामलों में छात्र, पत्रकार, समाजसेवी, वकील और अल्पसंख्यकों को शक में दायरे में ला दिया जाता है। सवाल यह है कि क्या हर असहमति नक्सलवाद है, क्या सरकार से इंसाफ की बात करना जुर्म हो गया है। सरकार की आलोचना करने वाले को चुप कराने की कोशिश की जाती है।
कहा कि जब कानून ज्यादा सख्त हो जाते हैं तो लोग डरते हैं। सवाल पूछने से हटते हैं। दिल्ली में छात्रों पर पूछताछ के नाम पर मानसिक दबाव बनाने का मामला सामने आया। लखनऊ भी इसका उदाहरण है। वहां कई युवाओं को गंभीर धाराओं में गिरफ्तार किया गया। बाद में साक्ष्य न मिलने पर उन्हें छोड़ा गया। सरकार इस पर संज्ञान नहीं ले रही है।
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कहा कि यह सिर्फ सुरक्षा का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि लोकतंत्र, संविधान और खासकर हाशिये पर खड़े लोग, आदिवासी आदि, उनके मुस्तकबिल से जुड़ा अहम सवाल है। आज अलग तरह का माहौल है। कई मामलों में छात्र, पत्रकार, समाजसेवी, वकील और अल्पसंख्यकों को शक में दायरे में ला दिया जाता है। सवाल यह है कि क्या हर असहमति नक्सलवाद है, क्या सरकार से इंसाफ की बात करना जुर्म हो गया है। सरकार की आलोचना करने वाले को चुप कराने की कोशिश की जाती है।
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कहा कि जब कानून ज्यादा सख्त हो जाते हैं तो लोग डरते हैं। सवाल पूछने से हटते हैं। दिल्ली में छात्रों पर पूछताछ के नाम पर मानसिक दबाव बनाने का मामला सामने आया। लखनऊ भी इसका उदाहरण है। वहां कई युवाओं को गंभीर धाराओं में गिरफ्तार किया गया। बाद में साक्ष्य न मिलने पर उन्हें छोड़ा गया। सरकार इस पर संज्ञान नहीं ले रही है।
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