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दोस्त ऐसे हों जो परेशानी में काम आएं : मौलाना
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सिरसी। मोहल्ला चौधरियान में इमाम बारगाह इमाम रजा में शब्बेदारी हुई। इसमें अंजुमनों ने कलाम पेश किए। अजाखाने में हुई मजलिस में मर्सिया नसीमुल हसन और उनके साथियों ने पढ़ा। मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना यावर रजा ने कहा कि दोस्त सोच समझकर बनाईये, ताकि आप की परेशानी में काम आएं।
कहा कि दोस्त आप का राजदार हो और आप की परेशानी को अपनी परेशानी समझे। साथ ही अपने दोस्त की कमी या गलती को सबके सामने जाहिर नहीं करें। उसे एकांत में बताएं, जिससे उसके दिल को ठेस नहीं पहुंचे। मासूमीन ने फरमाया है कि अच्छे दोस्त हासिल करने से इंसान की इज्जत बढ़ जाती है। मजलिस के बाद अंजुमन हुसैनी की ओर से तरही शब्बेदारी का आगाज हुआ, जिसमें अंजुमन गुंचाए इस्लाम ने कलाम पढ़ते हुए कहा शहादत में कोई ताकीर होने ही नहीं देते। हुसैन इब्ने अली इतने गले तैयार रखते हैं।
इसके अलावा अंजुमन जुल्फकारे हैदरी, रौनके अजा, गुलदस्ते हैदरी, बहारे अजा, हाशमी, हैदरी, गोहरे अजा, दिलदारे हुसैनी, दास्ताने कर्बला, कारवाने हुसैनी, फैजे पन्जेतनी, सफीना ए अजा, मीसमे अजा आदि अंजुमनों ने कलाम पेश किए। संचालन शेर अली और हुसैन ने किया। अंत में मौलाना सफी असगर नजमी ने तकरीर करते हुए मासूमीन के फजाइल बयान किए।
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कहा कि दोस्त आप का राजदार हो और आप की परेशानी को अपनी परेशानी समझे। साथ ही अपने दोस्त की कमी या गलती को सबके सामने जाहिर नहीं करें। उसे एकांत में बताएं, जिससे उसके दिल को ठेस नहीं पहुंचे। मासूमीन ने फरमाया है कि अच्छे दोस्त हासिल करने से इंसान की इज्जत बढ़ जाती है। मजलिस के बाद अंजुमन हुसैनी की ओर से तरही शब्बेदारी का आगाज हुआ, जिसमें अंजुमन गुंचाए इस्लाम ने कलाम पढ़ते हुए कहा शहादत में कोई ताकीर होने ही नहीं देते। हुसैन इब्ने अली इतने गले तैयार रखते हैं।
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इसके अलावा अंजुमन जुल्फकारे हैदरी, रौनके अजा, गुलदस्ते हैदरी, बहारे अजा, हाशमी, हैदरी, गोहरे अजा, दिलदारे हुसैनी, दास्ताने कर्बला, कारवाने हुसैनी, फैजे पन्जेतनी, सफीना ए अजा, मीसमे अजा आदि अंजुमनों ने कलाम पेश किए। संचालन शेर अली और हुसैन ने किया। अंत में मौलाना सफी असगर नजमी ने तकरीर करते हुए मासूमीन के फजाइल बयान किए।
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