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Sambhal News: मानसून की आहट के बीच किसानों ने शुरू की धान की रोपाई
Thu, 11 Jun 2026 01:59 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Thu, 11 Jun 2026 01:59 AM IST
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बनियाठेर। तहसील क्षेत्र में मंगलवार को मानसून की आहट के बीच किसानों ने धान की रोपाई शुरू कर दी है तथा किसान तेजी से खेत को तैयार करने में जुट गए हैं। जिससे समय रहते पौध लगाई जा सके। पौध लगने के बाद से 25 दिन में तैयार होती है। इसके बाद किसान पौधों के तैयार खेत में 8 से 10 सेंटीमीटर पानी को भरकर उसमें पौध की रोपाई करते हैं। फिलहाल तापमान अधिक रहने के कारण किसान सुबह या शाम ठंडा और छायादार समय में पौध की रोपाई कर रहे हैं। जिससे पौधे पर तनाव कम पड़ता है और तेज धूप में झुलसने से बचाव होता है।
आमतौर पर उत्तर प्रदेश में धान की रोपाई 15 जून से लेकर 15 जुलाई के बीच सबसे उत्तम मानी जाती है। मुख्य खेत की तैयारी हेतु खेतों में दो-तीन बार अच्छी जुताई करके पानी भरकर छोड़ देते हैं तथा अलग-अलग संसाधनों से मिट्टी को बार-बार गूंधते हैं। जिससे मिट्टी कीचड़ की तरह बन जाती है। रोपाई से पहले खेत में गोबर की खाद फॉस्फोरस व अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व जिंक आदि का प्रयोग करते हैं। खेत में लगातार पानी बना रहने से पौधे धूप में झुलसने से बच जाते हैं तथा खरपतवार भी कम होते हैं।
तेज धूप और मजदूरों की कमी के चलते छोटे किसान पहले ही अपनी तैयारी कर तेजी से धान की रोपाई करवा लेना चाहते हैं। अपने खेत की धान रोपाई करवा रहे अकरौली के किसान भरे खान ने बताया कि बरसात होने के बाद किसानों के आगे धान रोपाई के लिए मजदूरों की किल्लत हो जाती है। ज्यादातर जून महीने के दूसरे पखवाड़े तक किसान धान की रोपाई शुरू कर देते हैं।
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आमतौर पर उत्तर प्रदेश में धान की रोपाई 15 जून से लेकर 15 जुलाई के बीच सबसे उत्तम मानी जाती है। मुख्य खेत की तैयारी हेतु खेतों में दो-तीन बार अच्छी जुताई करके पानी भरकर छोड़ देते हैं तथा अलग-अलग संसाधनों से मिट्टी को बार-बार गूंधते हैं। जिससे मिट्टी कीचड़ की तरह बन जाती है। रोपाई से पहले खेत में गोबर की खाद फॉस्फोरस व अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व जिंक आदि का प्रयोग करते हैं। खेत में लगातार पानी बना रहने से पौधे धूप में झुलसने से बच जाते हैं तथा खरपतवार भी कम होते हैं।
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तेज धूप और मजदूरों की कमी के चलते छोटे किसान पहले ही अपनी तैयारी कर तेजी से धान की रोपाई करवा लेना चाहते हैं। अपने खेत की धान रोपाई करवा रहे अकरौली के किसान भरे खान ने बताया कि बरसात होने के बाद किसानों के आगे धान रोपाई के लिए मजदूरों की किल्लत हो जाती है। ज्यादातर जून महीने के दूसरे पखवाड़े तक किसान धान की रोपाई शुरू कर देते हैं।
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