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खत्म हो रहे जलस्रोत, गिरा जलस्तर
ब्यूरो अमर उजाला / संभ्ाल
Updated Mon, 25 Jun 2018 01:27 AM IST
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बबराला क्षेत्र में सूखा पड़ा तालाब।
- फोटो : अमर उजाला
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कोई दौर था जमीन में लाठी गाड़ देने से पानी निकलता था। क्षेत्र की कई नदियां अपने भूजल स्रोत से अविरल बहती थी। गांव-गांव में बने तालाब जो पशु-पक्षियों के जल जीवन का प्रमुख स्रोत थे। लेकिन लगातार हो रहे जल दोहन से जल संकट बढ़ता जा रहा है। अब न तो नदी रही और न ही तालाब। जिन स्रोतों से नदियां व तालाबों से पानी निकलता था अब उनका अस्तित्व भी नहीं रहा। पानी सूखने के बाद अब उन स्थानों पर खेती की जा रही है।
गुन्नौर तहसील का खादर क्षेत्र जहां कभी गंगा नदी की बड़ी धारा बरसात के दिनों में बाढ़ का रूप लेकर 25 किमी के दायरे में बहती थी। लोगों को जीवन बचाने के लिए ऊंचे स्थानों पर जाना पड़ता था। बरसात के बाद यहां के तालाबों में पूरे साल पानी नहीं सूखता था। पांच फीट का गड्ढा खोदने पर पानी निकल जाता था। अब 50 फीट पर भी नहीं निकल रहा है।
बुजुर्गों की माने तो पूर्व में तालाब ही पानी के स्रोत होते थे। क्षेत्र की प्रमुख महावा नदी बेशक गंगा की धारा से निकलती थी लेकिन इसकी दर्जनों सहयोगी नदियां व झील अपने प्राकृतिक स्रोत के कारण लगातार बहती रहती थी। जिनसे पशु व पक्षियों की जिंदगी भी सुहानी होती थी। अब लगातार जल दोहन व सूख पड़ने से जलस्तर घट रहा है। गुन्नौर तहसील के भूड़ गांवों का आलम यह है कि बीस फीट पर मिलने वाला पानी अब पचास फीट पर मिल रहा है।
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जबकि सिंचाई करने वाले बोरिंग लगातार फेल हो रहे हैं। लिहाजा भविष्य में गंभीर जल संकट पैदा होने वाला है। क्षेत्र में घट रहे जलस्तर की चेतावनी देते हुए कई संगठनों के द्वारा आंदोलन चलाया जा रहा है। जो सरकारी फाइलों में अटक जाता है।
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गुन्नौर तहसील का खादर क्षेत्र जहां कभी गंगा नदी की बड़ी धारा बरसात के दिनों में बाढ़ का रूप लेकर 25 किमी के दायरे में बहती थी। लोगों को जीवन बचाने के लिए ऊंचे स्थानों पर जाना पड़ता था। बरसात के बाद यहां के तालाबों में पूरे साल पानी नहीं सूखता था। पांच फीट का गड्ढा खोदने पर पानी निकल जाता था। अब 50 फीट पर भी नहीं निकल रहा है।
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बुजुर्गों की माने तो पूर्व में तालाब ही पानी के स्रोत होते थे। क्षेत्र की प्रमुख महावा नदी बेशक गंगा की धारा से निकलती थी लेकिन इसकी दर्जनों सहयोगी नदियां व झील अपने प्राकृतिक स्रोत के कारण लगातार बहती रहती थी। जिनसे पशु व पक्षियों की जिंदगी भी सुहानी होती थी। अब लगातार जल दोहन व सूख पड़ने से जलस्तर घट रहा है। गुन्नौर तहसील के भूड़ गांवों का आलम यह है कि बीस फीट पर मिलने वाला पानी अब पचास फीट पर मिल रहा है।
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जबकि सिंचाई करने वाले बोरिंग लगातार फेल हो रहे हैं। लिहाजा भविष्य में गंभीर जल संकट पैदा होने वाला है। क्षेत्र में घट रहे जलस्तर की चेतावनी देते हुए कई संगठनों के द्वारा आंदोलन चलाया जा रहा है। जो सरकारी फाइलों में अटक जाता है।