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शहरों से पलायन करके आए लोग नहीं कर रहे क्वारंटीन का पालन
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संभल। संभल जिले में दूसरे राज्यों से पलायन करके आए दस हजार से अधिक लोगों को उनके ही घर में क्वारंटीन करने का प्रयास स्वास्थ्य विभाग ने किया है लेकिन इसे लोग गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। वे खुलेआम गांव में जगह जगह घूम रहे हैं और लोगों से मिल रहे हैं। इसके बारे में ग्राम प्रधान और आशाओं की ओर से चिकित्साधिकारियों के पास लगातार फोन कॉल आ रही हैं।
संभल स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चिकित्साधीक्षक डा. जुहेब करीम ने बताया कि लोग समझाने के बाद भी नहीं मान रहे हैं। भदरौला से सोमवार को रात काल आई थी कि बाहर से पलायन करके आए लोग क्वारंटीन नहीं हो रहे हैं और घूम रहे हैं। गांव वालों का कहना था कि समझाने के बाद नहीं मान रहे हैं। इसपर नखासा पुलिस को खबर दी गई थी। पुलिस ने जाकर जब डांट फटकार की तो लोग घरों में रहने के लिए राजी हुए।
नखासा के प्रभारी निरीक्षक देवेंद्र सिंह धामा ने बताया कि पुलिस की तीन टीमें दौड़ रही हैं जो गांव गांव जाकर बाहरसे आए लोगों को समझा रही हैं कि कम से कम 14 दिन अपने ही घर में रहें। वहीं प्रभारी चिकित्साधिकारी ने कहा कि क्वारंटीन को सफल बनाने की जिम्मेदारी आशाओं और ग्राम प्रधानों को सौंपी गई है। आशाएं ही बाहर से आए लोगों की सूची बना रही हैं और पल-पल फोन पर खबर दे रही हैं।
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संभल स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चिकित्साधीक्षक डा. जुहेब करीम ने बताया कि लोग समझाने के बाद भी नहीं मान रहे हैं। भदरौला से सोमवार को रात काल आई थी कि बाहर से पलायन करके आए लोग क्वारंटीन नहीं हो रहे हैं और घूम रहे हैं। गांव वालों का कहना था कि समझाने के बाद नहीं मान रहे हैं। इसपर नखासा पुलिस को खबर दी गई थी। पुलिस ने जाकर जब डांट फटकार की तो लोग घरों में रहने के लिए राजी हुए।
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नखासा के प्रभारी निरीक्षक देवेंद्र सिंह धामा ने बताया कि पुलिस की तीन टीमें दौड़ रही हैं जो गांव गांव जाकर बाहरसे आए लोगों को समझा रही हैं कि कम से कम 14 दिन अपने ही घर में रहें। वहीं प्रभारी चिकित्साधिकारी ने कहा कि क्वारंटीन को सफल बनाने की जिम्मेदारी आशाओं और ग्राम प्रधानों को सौंपी गई है। आशाएं ही बाहर से आए लोगों की सूची बना रही हैं और पल-पल फोन पर खबर दे रही हैं।
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