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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sambhal News ›   compensation problem for sambhals farmer

क्षति तो हुई पर क्षतिपूर्ति की सूची में शामिल नहीं किए गए 155 गांवों के किसान

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 24 Sep 2020 01:51 AM IST
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compensation problem for sambhals farmer
संभल। जिले की संभल तहसील के अधिकतर गांवों में 12-13 दिसंबर 2019 को तेज बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि में भारी क्षति हुई थी लेकिन राजस्व प्रशासन ने 244 गांवों के 25454 किसानों को क्षतिपूर्ति के लायक माना। ऐसे में तमाम किसान फसल की क्षति होने के बाद भी मुआवजा सूची में शामिल नहीं हो सके।
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इससे भी बड़ा तथ्य यह है कि तहसील क्षेत्र के 155 राजस्व गांव ऐसे हैं जिनके रकबे में खेती-किसानी करने वाले किसी किसान को मुआवजा सूची में जगह नहीं दी गई जबकि इन गांवों में ऐसे सैकड़ों किसानों की फसल शत-प्रतिशत बर्बाद हुई है। वे फसल बर्बाद होने का शोर करते रहे पर कोई सुनवाई नहीं हो सकी।
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अब यह मुद्दा एक बार फिर गर्माया है क्योंकि राज्य सरकार ने मुआवजा सूची में शामिल किसानों के लिए 12 करोड़ रुपये भेजे हैं। अब वे किसान राजस्व विभाग के क्षति संबंधी सर्वे पर सवाल उठा रहे हैं जिन्हें मुआवजे से दूर रखा गया है।
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भाकियू ने भी किसानों की आवाज उठाई है। तहसीलदार करमवीर सिंह का कहना है कि उन्हीं गांवों को क्षतिपूर्ति की सूची से बाहर रखा गया है जहां 33 प्रतिशत से कम क्षति हुई है। तहसीलदार का कहना है कि अगर किसी गांव में कुल रकबे का 33 प्रतिशत से कम क्षति होती है तो वहां पर क्षतिपूर्ति नहीं दी जाती है। वहीं पीड़ित किसानों का कहना है कि अगर लेखपाल आते और गांव में सर्वे करते तो क्षति 33 प्रतिशत से अधिक निकलती और मुआवजा भी मिलता। लेकिन कई स्थानों की क्षति का आकलन घर बैठे कर दिया गया जिसका खामियाजा अब किसान भुगत रहे हैं।
लेखपालों ने घर बैठे सर्वे कर रिपोर्ट दी, इसलिए आई दिक्कत
संभल। भाकियू के जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह और जिला उपाध्यक्ष जयवीर सिंह का कहना है कि कई लेखपालों ने घर बैठे सर्वे कर दिया था। कहां किस किसान का कितना नुकसान हुआ, इसकी रिपोर्ट तहसील प्रशासन को नहीं दी जिसके चलते फसल की क्षति के लिए आई क्षतिपूर्ति का लाभ पाने से तमाम किसान वंचित हो गए हैं।

मेरे गांव में 80 प्रतिशत किसानों की फसल नष्ट हुई
गोविंदपुर के किसान हफीज ने कहा कि उनके गांव के 80 प्रतिशत किसानों की आलू की फसल ओलावृष्टि में खराब हो गई थी पर क्षतिपूर्ति की सूची में किसी किसान का नाम नहीं रखा गया। उन्होंने कहा कि जब नुकसान हुआ था तब वे लेखपाल से कहते रहे लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई थी।
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