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चीनी की दरों में उछाल, गन्ना खरीद को लेकर मिलों में उत्साह
देव शर्मा/अमर उजाला, संभल
Updated Tue, 30 Aug 2016 01:09 AM IST
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वह गन्ना समितियों से अधिकाधिक गन्ना क्रय केंद्र आवंटित कराने के जुगाड़ में लग गई है। इससे करीबक दो लाख गन्ना किसानों की आर्थिक स्थिति सुधरने की उम्मीद है।
पिछले साल चीनी के भावों में लगातार गिरावट आती रही। इससे चीनी मिलों को नुकसान होने के साथ ही गन्ना किसानों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। समय पर चीनी मिलें नहीं चलने के कारण किसानों को अगली फसल की बुवाई करने के लिए गन्ना औने-पौने दाम में बेचना पड़ा। इसके बावजूद भुगतान भी समय पर नहीं किया गया।
अब चीनी के भावों में आए उछाल से किसानों को भी बेहतर मूल्य मिलने उम्मीद बंधी हैं। चीनी मिलों में भी भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। चीनी मिलें सहकारी समितियों को ज्यादा से ज्यादा गन्ना क्रय केंद्र आवंटित करने को दबाव बना रही हैं साथ ही समय से पेराई भी समय से शुरू करने के संकेत दिए हैं।
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क्या हुआ पिछले साल-
-वर्ष-2015-16 में किसानों के खेतों में गन्ना तैयार हो गया। लेकिन चीनी मिलें पेराई सत्र शुरू करने को तैयार नहीं हो रही थीं। प्रदेश सरकार ने चीनी मिलों को 28.60 रुपये प्रति क्विंटल की सब्सिडी दी, साथ ही चीनी मिलों को दो बार में भुगतान करने की रियायत दी। पहले 230 रुपये व शेष पचास रुपये का भुगतान बाद में किया गया। तब कहीं पेराई सत्र शुरू किया जा सका।
किसानों को घाटे में बेचना पड़ा था गन्ना
-शासन की ओर से घोषित गन्ना मूल्य अग्रणी प्रजाति के लिए 290 रुपये और सामान्य प्रजाति के लिए 280 रुपये घोषित किया गया था। लेकिन, चीनी मिलों के विलंब से चलने के कारण किसानों को अगली फसल के लिए खेतों को खाली करने की जल्दी में कोल्हुओं, क्रेसरों को 120 से 150 रुपये प्रति क्विंटल के भाव गन्ना बेचना पड़ा था।
-इसमें कोई दो राय नहीं कि गन्ना किसानों को इस साल गन्ने से काफी उम्मीदें हैं। हालांकि अभी शासन ने तो गन्ने का भाव घोषित नहीं किया है लेकिन चीनी के भावों व चीनी मिलों की उत्सुकता को देखते हुए किसानों को उम्मीद है कि इस साल गन्ना 350 रुपये से 400 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक सकता है।-सुबोध शर्मा, चेयरमैन, सहकारी गन्ना समिति चंदौसी
-जून 2015 से जनवरी 2016 तक चीनी का भाव 2200 रुपये प्रति क्विंटल था। इससे चीनी मिलों को भारी घाटा उठाना पड़ा। जनवरी के बाद स्थिति में सुधार आने लगा। आज भाव 3400 से 3600 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है।-सुभाष पांडेय, उपाध्यक्ष, डीएसएम शुगर मिल असमोली
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पिछले साल चीनी के भावों में लगातार गिरावट आती रही। इससे चीनी मिलों को नुकसान होने के साथ ही गन्ना किसानों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। समय पर चीनी मिलें नहीं चलने के कारण किसानों को अगली फसल की बुवाई करने के लिए गन्ना औने-पौने दाम में बेचना पड़ा। इसके बावजूद भुगतान भी समय पर नहीं किया गया।
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अब चीनी के भावों में आए उछाल से किसानों को भी बेहतर मूल्य मिलने उम्मीद बंधी हैं। चीनी मिलों में भी भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। चीनी मिलें सहकारी समितियों को ज्यादा से ज्यादा गन्ना क्रय केंद्र आवंटित करने को दबाव बना रही हैं साथ ही समय से पेराई भी समय से शुरू करने के संकेत दिए हैं।
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क्या हुआ पिछले साल-
-वर्ष-2015-16 में किसानों के खेतों में गन्ना तैयार हो गया। लेकिन चीनी मिलें पेराई सत्र शुरू करने को तैयार नहीं हो रही थीं। प्रदेश सरकार ने चीनी मिलों को 28.60 रुपये प्रति क्विंटल की सब्सिडी दी, साथ ही चीनी मिलों को दो बार में भुगतान करने की रियायत दी। पहले 230 रुपये व शेष पचास रुपये का भुगतान बाद में किया गया। तब कहीं पेराई सत्र शुरू किया जा सका।
किसानों को घाटे में बेचना पड़ा था गन्ना
-शासन की ओर से घोषित गन्ना मूल्य अग्रणी प्रजाति के लिए 290 रुपये और सामान्य प्रजाति के लिए 280 रुपये घोषित किया गया था। लेकिन, चीनी मिलों के विलंब से चलने के कारण किसानों को अगली फसल के लिए खेतों को खाली करने की जल्दी में कोल्हुओं, क्रेसरों को 120 से 150 रुपये प्रति क्विंटल के भाव गन्ना बेचना पड़ा था।
-इसमें कोई दो राय नहीं कि गन्ना किसानों को इस साल गन्ने से काफी उम्मीदें हैं। हालांकि अभी शासन ने तो गन्ने का भाव घोषित नहीं किया है लेकिन चीनी के भावों व चीनी मिलों की उत्सुकता को देखते हुए किसानों को उम्मीद है कि इस साल गन्ना 350 रुपये से 400 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक सकता है।-सुबोध शर्मा, चेयरमैन, सहकारी गन्ना समिति चंदौसी
-जून 2015 से जनवरी 2016 तक चीनी का भाव 2200 रुपये प्रति क्विंटल था। इससे चीनी मिलों को भारी घाटा उठाना पड़ा। जनवरी के बाद स्थिति में सुधार आने लगा। आज भाव 3400 से 3600 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है।-सुभाष पांडेय, उपाध्यक्ष, डीएसएम शुगर मिल असमोली