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हैंडीक्राफ्ट को जीएसटी में नहीं किया गया नोटिफाइड, आइटम के हिसाब टैक्स
Updated Wed, 14 Jun 2017 01:19 AM IST
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हैंडीक्राफ्ट पर देना पड़ेगा 5 से 28 प्रतिशत तक टैक्स
जीएसटी इफेक्ट: हैंडीक्राफ्ट को जीएसटी में नहीं किया गया नोटिफाइड, आइटम के हिसाब लगेगा टैक्स
अधिकतर आइटम 12 प्रतिशत टैक्स के दायरे में, कारोबारी सोच में पड़े
राकेश
संभल।
जीएसटी में हैंडीक्राफ्ट को नोटिफाइड नहीं किया गया है। अब आइटम के हिसाब से ही टैक्स देना पड़ेगा। अगर किसी आइटम पर 12 प्रतिशत टैक्स है तो हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री के उस प्रोडक्ट पर भी 12 प्रतिशत ही टैक्स लगेगा। हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री टैक्स के इस बोझ से उलझन में है।
संभल और सरायतरीन में तैयार होने वाला हड्डी सींग का हैंडीक्राफ्ट अब तक कर मुक्त था। हैंडीक्राफ्ट पहली बार टैक्स के दायरे में आया है। टैक्स लगने के बाद हैंडीक्राफ्ट निर्यातक और कारोबारी उलझन में हैं। संभल और सरायतरीन में 300 करोड़ रुपये सालाना टर्नओवर की इंडस्ट्री है। अभी तक हैंडीक्राफ्ट के कारोबारी टैक्स के दायरे में न थे। किसी भी तरह की लिखापढ़ी से मुक्त थे लेकिन जीएसटी प्रभावी होते ही उन्हें लिखापढ़ी करनी होगी। बिलिंग का लेखाजोखा रखना होगा। ऑनलाइन रिटर्न भी दाखिल करने पड़ेंगे। सरायतरीन से हैंडीक्राफ्ट के निर्यातक कमल कौशल वार्ष्णेय ने कहा कि जीएसटी में हैंडीक्राफ्ट के बारे में कोई उल्लेख नहीं आया है। आइटम वाइज टैक्स देना पड़ेगा। हड्डी-सींग के रॉ मैटेरियल पर भी टैक्स की स्थिति स्पष्ट नहीं है। जबकि ईपीसीएच के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर राकेश कुमार ने बताया कि जीएसटी में हैंडीक्राफ्ट को नोटिफाइड नहीं किया गया है। आइटम के हिसाब से टैक्स की दर है, जैसे कुर्सी को ही लीजिए, जितना टैक्स सामान्य कुर्सी पर लगेगा उतना ही टैक्स हैंडीक्राफ्ट से बनी कुर्सी पर भी लगेगा। क्योंकि हैंडीक्राफ्ट को अलग से नोटिफाइड नहीं किया गया है। प्रोडक्ट के हैंडीक्राफ्ट का होने से टैक्स में कोई बेनिफिट नहीं दिया गया है। ईपीसीएच की पैरवी यह है कि जीएसटी में हैंडीक्राफ्ट प्रोडक्ट को नोटिफाइड कर टैक्स की दरें न्यूनतम रखी जाएं ताकि विदेशी मार्केट में भारत के प्रोडक्ट अपनी हिस्सेदारी को और बढ़ा सकें। निर्यात को प्रोत्साहन मिल सके। विदेशी मुद्रा आती रही। निर्यात को बढ़ावा मिले।
हड्डी सींग से बने प्रोडक्ट टैक्स के दायरे में आने से पैदा हो सकती है परेशानी
संभल। हैंडीक्राफ्ट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष ताहिर सलामी और एक्सपोर्टर सुहेल परवेज का कहना है कि हड्डी सींग के प्रोडक्ट छोटे-छोटे कारोबारी और कारीगर बनाते हैं। उनके लिए जीएसटी की लिखापढ़ी और रिकार्ड रखना संभव नहीं है। हड्डी सींग एक वेस्ट मैटेरियल है। इससे विदेशी मुद्रा लाने वाली यह एक मात्र इंडस्ट्री है। इसलिए इसके रॉ मैटेरियल और फिनिश प्रोडक्ट को कर मुक्त रखना उचित होगा। इस संबंध में सांसद सत्यपाल सैनी से एसोसिएशन के सदस्य मिल चुके हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री और केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री तक ज्ञापन भेजा गया है।
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देश में करीब 40,000 करोड़ की हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री है। इसमें 25,500 करोड़ रुपये का प्रोडक्ट एक वर्ष में एक्सपोर्ट होता है। एक्सपोर्ट इंडस्ट्री के लिए सरकार ने पहले ही राहत दे रखी है लेकिन इंडस्ट्री यह जरूर चाहती है कि हैंडीक्राफ्ट को जीएसटी में नोटिफाइड कर दिया जाए। रिवर्स चार्जेज और स्टाक इन हैंड के बारे में कुछ चीजें अभी साफ नहीं हैं। जिसे लेकर ईपीसीएच की पैरवी जारी है।
राकेश कुमार, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल।
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जीएसटी इफेक्ट: हैंडीक्राफ्ट को जीएसटी में नहीं किया गया नोटिफाइड, आइटम के हिसाब लगेगा टैक्स
अधिकतर आइटम 12 प्रतिशत टैक्स के दायरे में, कारोबारी सोच में पड़े
राकेश
संभल।
जीएसटी में हैंडीक्राफ्ट को नोटिफाइड नहीं किया गया है। अब आइटम के हिसाब से ही टैक्स देना पड़ेगा। अगर किसी आइटम पर 12 प्रतिशत टैक्स है तो हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री के उस प्रोडक्ट पर भी 12 प्रतिशत ही टैक्स लगेगा। हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री टैक्स के इस बोझ से उलझन में है।
संभल और सरायतरीन में तैयार होने वाला हड्डी सींग का हैंडीक्राफ्ट अब तक कर मुक्त था। हैंडीक्राफ्ट पहली बार टैक्स के दायरे में आया है। टैक्स लगने के बाद हैंडीक्राफ्ट निर्यातक और कारोबारी उलझन में हैं। संभल और सरायतरीन में 300 करोड़ रुपये सालाना टर्नओवर की इंडस्ट्री है। अभी तक हैंडीक्राफ्ट के कारोबारी टैक्स के दायरे में न थे। किसी भी तरह की लिखापढ़ी से मुक्त थे लेकिन जीएसटी प्रभावी होते ही उन्हें लिखापढ़ी करनी होगी। बिलिंग का लेखाजोखा रखना होगा। ऑनलाइन रिटर्न भी दाखिल करने पड़ेंगे। सरायतरीन से हैंडीक्राफ्ट के निर्यातक कमल कौशल वार्ष्णेय ने कहा कि जीएसटी में हैंडीक्राफ्ट के बारे में कोई उल्लेख नहीं आया है। आइटम वाइज टैक्स देना पड़ेगा। हड्डी-सींग के रॉ मैटेरियल पर भी टैक्स की स्थिति स्पष्ट नहीं है। जबकि ईपीसीएच के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर राकेश कुमार ने बताया कि जीएसटी में हैंडीक्राफ्ट को नोटिफाइड नहीं किया गया है। आइटम के हिसाब से टैक्स की दर है, जैसे कुर्सी को ही लीजिए, जितना टैक्स सामान्य कुर्सी पर लगेगा उतना ही टैक्स हैंडीक्राफ्ट से बनी कुर्सी पर भी लगेगा। क्योंकि हैंडीक्राफ्ट को अलग से नोटिफाइड नहीं किया गया है। प्रोडक्ट के हैंडीक्राफ्ट का होने से टैक्स में कोई बेनिफिट नहीं दिया गया है। ईपीसीएच की पैरवी यह है कि जीएसटी में हैंडीक्राफ्ट प्रोडक्ट को नोटिफाइड कर टैक्स की दरें न्यूनतम रखी जाएं ताकि विदेशी मार्केट में भारत के प्रोडक्ट अपनी हिस्सेदारी को और बढ़ा सकें। निर्यात को प्रोत्साहन मिल सके। विदेशी मुद्रा आती रही। निर्यात को बढ़ावा मिले।
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हड्डी सींग से बने प्रोडक्ट टैक्स के दायरे में आने से पैदा हो सकती है परेशानी
संभल। हैंडीक्राफ्ट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष ताहिर सलामी और एक्सपोर्टर सुहेल परवेज का कहना है कि हड्डी सींग के प्रोडक्ट छोटे-छोटे कारोबारी और कारीगर बनाते हैं। उनके लिए जीएसटी की लिखापढ़ी और रिकार्ड रखना संभव नहीं है। हड्डी सींग एक वेस्ट मैटेरियल है। इससे विदेशी मुद्रा लाने वाली यह एक मात्र इंडस्ट्री है। इसलिए इसके रॉ मैटेरियल और फिनिश प्रोडक्ट को कर मुक्त रखना उचित होगा। इस संबंध में सांसद सत्यपाल सैनी से एसोसिएशन के सदस्य मिल चुके हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री और केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री तक ज्ञापन भेजा गया है।
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देश में करीब 40,000 करोड़ की हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री है। इसमें 25,500 करोड़ रुपये का प्रोडक्ट एक वर्ष में एक्सपोर्ट होता है। एक्सपोर्ट इंडस्ट्री के लिए सरकार ने पहले ही राहत दे रखी है लेकिन इंडस्ट्री यह जरूर चाहती है कि हैंडीक्राफ्ट को जीएसटी में नोटिफाइड कर दिया जाए। रिवर्स चार्जेज और स्टाक इन हैंड के बारे में कुछ चीजें अभी साफ नहीं हैं। जिसे लेकर ईपीसीएच की पैरवी जारी है।
राकेश कुमार, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल।