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मोबाइल एप के माध्यम से बच्चों की हेल्थ स्क्रीनिंग स्वास्थ्य विभाग करेगा, फर्जीबाड़ा थमेगा
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संभल। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अन्तर्गत विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों की समय-समय पर हेल्थ स्क्रीनिंग स्वास्थ्य विभाग द्वारा की जाती है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग की टीमें अक्सर इसमें फर्जीवाड़ा कर देती हैं। विद्यालयों में बिना जाए ही रिपोर्ट लगा दिया करती थी। कभी विद्यालय बंद या बच्चे नहीं मिले जैसे भी बहाने हुआ करते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं कर पाएंगे।
शासन ने हेल्थ स्क्रीनिंग में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए आरबीएसके (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) नाम से एक मोबाइल एप लांच किया है। जिसमें बच्चों की फोटो के साथ पूरी रिपोर्ट अपलोड की जाएगी। यह एप स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, शिक्षा विभाग जिला प्रशासन और शासन की निगरानी में होगी। मंगलवार को इसी क्रम में बहजोई स्थित मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय के सभागार में दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें एप की सभी जानकारी बारीकी से बताई गईं। जनपद के राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम अधिकारी डीईआईसी मनु तेवतिया ने मोबाइल ऐप के माध्यम से होने वाली निगरानी की जानकारी दी।
सभी मोबाइल हेल्थ टीमों के सदस्यों के प्रशिक्षण दिया गया। यह प्रशिक्षण सोमवार और मंगलवार को दिया गया है। राज्य स्तर से प्रशिक्षित होकर आए प्रशिक्षक डा. नीरज शर्मा और डा. मोहम्मद फहीम ने सभी कार्यरत चिकित्सकों व पेरामेडिकल स्टाफ को गहनता के साथ प्रशिक्षण दिया। एप की सभी बारीकियों को विशेष रुप से समझाया। जिससे एप का संचालन सफलता पूर्वक किया जा सके।
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जिला कार्यक्रम प्रबंधक संजीव राठौर ने कहा कि अब स्कूल व आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों की संख्या बढ़ जाएगी क्योंकि खंड शिक्षा अधिकारी व आगनवाड़ी मुख्य सेविका भी इस एप से जुड़ेंगे। नोडल अधिकारी डा. अजफर कमाल ने कहा कि अब बच्चों के उपचार संबंधी जानकारी मोबाइल एप के माध्यम से ले सकेंगे। टीम कब और कहां बच्चों का परीक्षण कर रही है।
इसकी जानकारी ब्लॉक से लेकर शासन स्तर तक होगी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. अमिता सिंह ने कहा कि जो बच्चे जन्मजात रोगों से पीड़ित हैं, उनका नि:शुल्क इलाज राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के माध्यम से किया जा रहा है। अब तक जनपद के सैेकड़ों बच्चे कार्यक्रम के अन्तर्गत नि:शुल्क उपचार का लाभ उठा चुके हैं।
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शासन ने हेल्थ स्क्रीनिंग में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए आरबीएसके (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) नाम से एक मोबाइल एप लांच किया है। जिसमें बच्चों की फोटो के साथ पूरी रिपोर्ट अपलोड की जाएगी। यह एप स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, शिक्षा विभाग जिला प्रशासन और शासन की निगरानी में होगी। मंगलवार को इसी क्रम में बहजोई स्थित मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय के सभागार में दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें एप की सभी जानकारी बारीकी से बताई गईं। जनपद के राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम अधिकारी डीईआईसी मनु तेवतिया ने मोबाइल ऐप के माध्यम से होने वाली निगरानी की जानकारी दी।
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सभी मोबाइल हेल्थ टीमों के सदस्यों के प्रशिक्षण दिया गया। यह प्रशिक्षण सोमवार और मंगलवार को दिया गया है। राज्य स्तर से प्रशिक्षित होकर आए प्रशिक्षक डा. नीरज शर्मा और डा. मोहम्मद फहीम ने सभी कार्यरत चिकित्सकों व पेरामेडिकल स्टाफ को गहनता के साथ प्रशिक्षण दिया। एप की सभी बारीकियों को विशेष रुप से समझाया। जिससे एप का संचालन सफलता पूर्वक किया जा सके।
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जिला कार्यक्रम प्रबंधक संजीव राठौर ने कहा कि अब स्कूल व आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों की संख्या बढ़ जाएगी क्योंकि खंड शिक्षा अधिकारी व आगनवाड़ी मुख्य सेविका भी इस एप से जुड़ेंगे। नोडल अधिकारी डा. अजफर कमाल ने कहा कि अब बच्चों के उपचार संबंधी जानकारी मोबाइल एप के माध्यम से ले सकेंगे। टीम कब और कहां बच्चों का परीक्षण कर रही है।
इसकी जानकारी ब्लॉक से लेकर शासन स्तर तक होगी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. अमिता सिंह ने कहा कि जो बच्चे जन्मजात रोगों से पीड़ित हैं, उनका नि:शुल्क इलाज राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के माध्यम से किया जा रहा है। अब तक जनपद के सैेकड़ों बच्चे कार्यक्रम के अन्तर्गत नि:शुल्क उपचार का लाभ उठा चुके हैं।