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जीएसटी इफेक्ट- मैंथा पर टैक्स घटा पर इंडस्ट्री संतुष्ट, इंसपेक्टर राज का अंदेशा
Updated Tue, 13 Jun 2017 01:25 AM IST
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मैंथा पर टैक्स घटा पर इंडस्ट्री असंतुष्ट, इंसपेक्टर राज का अंदेशा
जीएसटी इफेक्ट-
जीएसटी में अब मैंथा 18 प्रतिशत से 12 प्रतिशत में आया, जबकि वैट में कुल 5 प्रतिशत था टैक्स
देश में 3700 करोड़ की है मैंथा इंडस्ट्री, 2700 करोड़ रुपये के प्रोडक्ट का होता है निर्यात
अमर उजाला ब्यूरो
संभल। केंद्र सरकार की जीएसटी काउंसिल की 16 वीं बैठक के बाद मैंथा पर टैक्स की दर 18 प्रतिशत से घटाकर 12 प्रतिशत कर दी गई लेकिन इससे मैंथा इंडस्ट्री की चुनौतियां कम नहीं हुई हैं। मैंथा प्रोडक्ट के कारोबारियों की ताजा प्रतिक्रिया यह है कि सरकार ने उन्हें उम्मीद के मुताबिक राहत नहीं दी। वैट के मुकाबले टैक्स 7 प्रतिशत ज्यादा है। टैक्स के फेर में फंसी मैंथा इंडस्ट्री को इंस्पेक्टर राज का अंदेशा है। व्यापारियों ने मैंथा को जीएसटी में कर मुक्त रखने का आग्रह किया था। दूसरा सुझाव यह था कि अगर टैक्स लगाया जाना जरूरी भी हो तो 5 प्रतिशत से अधिक टैक्स न लगाया जाए। क्योंकि वैट में सिर्फ 5 प्रतिशत टैक्स लगाया गया था। इस संबंध में संभल के व्यापारियों का प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली और केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री हसमुख अढिया से दिल्ली में मिला था। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे बीजेपी नेता संजय सांख्यधर ने कहा कि उन्हें वित्तमंत्री ने राहत देने का भरोसा दिया था। इस मामले में वित्त मंत्री ने टैक्स घटाकर एक सराहनीय काम किया है। इस बीच स्थानीय मैंथा कारोबारियों ने कहा कि मैैंथा प्रोडक्ट का 70-80 प्रतिशत एक्सपोर्ट होता है। एक्सपोर्टर को टैक्स का रिफंड मिल जाता है। सिर्फ 20 प्रतिशत टर्नओवर के लिए टैक्स लगाया जाना उचित नहीं है। वैसे भी मैंथा आयल एग्रीकल्चर प्रोडक्ट है इसलिए इसे टैक्स के दायरे से बाहर रखा जाए। मैंथा को कर मुक्त किए जाने की पैरवी जारी रहेगी। मैंथा इंडस्ट्री 37,00 करोड़ रुपये की है। इसमें करीब 2700 करोड़ का निर्यात है। मैंथा कारोबारियों का कहना है कि टैक्स के चलते इंस्पेक्टर राज को बढ़ावा मिलता है। छोटे व्यापारी उलझन में आएंगे।
सिर्फ एक हजार करोड़ रुपये के टर्नओवर में टैक्स हासिल करने के लिए इतनी बड़ी कवायद करने की जरूरत क्या है। अगर मैंथा को टैक्स के दायरे से बाहर कर दिया जाए तो किसान और कारोबारियों को प्रोत्साहन मिलेगा। वहीं निर्यात इंडस्ट्री रिफंड और इंस्पेक्टर राज के दायरे से भी बाहर आ जाएगी। कारोबार को रफ्तार मिलेगी।
हिमांशु अग्रवाल, मैंथा प्रोडक्ट के एक्सपोर्टर।
मैंथा खेत में पैदा होता है और उससे मैंथा ऑयल निकलता है। मैंथा आयल से तैयार 80 प्रतिशत प्रोडक्ट निर्यात किए जा रहे हैं। सिर्फ 20 प्रतिशत के लिए टैक्स लगाने का कोई औचित्य नजर नहीं आता है मैं सोचता हूं कि जीएसटी काउंसिल इस पर विचार करेगी और मैंथा इंडस्ट्री को कर मुक्त करेगी।
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अंकुर अग्रवाल, सचिव मिंट एसोसिएशन।
मैंथा एसोसिएशन ने इंडस्ट्री को कर मुक्त करने की मांग उठाई
संभल। मैंथा एसोसिएशन ने जीएसटी की 11 जून की बैठक में टैक्स को 18 से 12 प्रतिशत करने के फैसले को सराहा गया है। इसके लिए स्थानीय बीजेपी जिलाध्यक्ष राजेश सिंघल और बीजेपी नेता संजय सांख्यधर का धन्यवाद दिया गया। एसोसिएशन से सचिव दीपक गुप्ता ने कहा कि एसोसिएशन की बात को सरकार तक पहुंचाने में राजेश सिंघल और संजय सांख्यधर का योगदान रहा। उन्होंने कहा कि मैंथा इंडस्ट्री सरकार से मैंथा आयल को कर मुक्त करने की मांग करती है। क्योंकि यह प्रोडक्ट कृषि आधारित है।
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जीएसटी इफेक्ट-
जीएसटी में अब मैंथा 18 प्रतिशत से 12 प्रतिशत में आया, जबकि वैट में कुल 5 प्रतिशत था टैक्स
देश में 3700 करोड़ की है मैंथा इंडस्ट्री, 2700 करोड़ रुपये के प्रोडक्ट का होता है निर्यात
अमर उजाला ब्यूरो
संभल। केंद्र सरकार की जीएसटी काउंसिल की 16 वीं बैठक के बाद मैंथा पर टैक्स की दर 18 प्रतिशत से घटाकर 12 प्रतिशत कर दी गई लेकिन इससे मैंथा इंडस्ट्री की चुनौतियां कम नहीं हुई हैं। मैंथा प्रोडक्ट के कारोबारियों की ताजा प्रतिक्रिया यह है कि सरकार ने उन्हें उम्मीद के मुताबिक राहत नहीं दी। वैट के मुकाबले टैक्स 7 प्रतिशत ज्यादा है। टैक्स के फेर में फंसी मैंथा इंडस्ट्री को इंस्पेक्टर राज का अंदेशा है। व्यापारियों ने मैंथा को जीएसटी में कर मुक्त रखने का आग्रह किया था। दूसरा सुझाव यह था कि अगर टैक्स लगाया जाना जरूरी भी हो तो 5 प्रतिशत से अधिक टैक्स न लगाया जाए। क्योंकि वैट में सिर्फ 5 प्रतिशत टैक्स लगाया गया था। इस संबंध में संभल के व्यापारियों का प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली और केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री हसमुख अढिया से दिल्ली में मिला था। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे बीजेपी नेता संजय सांख्यधर ने कहा कि उन्हें वित्तमंत्री ने राहत देने का भरोसा दिया था। इस मामले में वित्त मंत्री ने टैक्स घटाकर एक सराहनीय काम किया है। इस बीच स्थानीय मैंथा कारोबारियों ने कहा कि मैैंथा प्रोडक्ट का 70-80 प्रतिशत एक्सपोर्ट होता है। एक्सपोर्टर को टैक्स का रिफंड मिल जाता है। सिर्फ 20 प्रतिशत टर्नओवर के लिए टैक्स लगाया जाना उचित नहीं है। वैसे भी मैंथा आयल एग्रीकल्चर प्रोडक्ट है इसलिए इसे टैक्स के दायरे से बाहर रखा जाए। मैंथा को कर मुक्त किए जाने की पैरवी जारी रहेगी। मैंथा इंडस्ट्री 37,00 करोड़ रुपये की है। इसमें करीब 2700 करोड़ का निर्यात है। मैंथा कारोबारियों का कहना है कि टैक्स के चलते इंस्पेक्टर राज को बढ़ावा मिलता है। छोटे व्यापारी उलझन में आएंगे।
सिर्फ एक हजार करोड़ रुपये के टर्नओवर में टैक्स हासिल करने के लिए इतनी बड़ी कवायद करने की जरूरत क्या है। अगर मैंथा को टैक्स के दायरे से बाहर कर दिया जाए तो किसान और कारोबारियों को प्रोत्साहन मिलेगा। वहीं निर्यात इंडस्ट्री रिफंड और इंस्पेक्टर राज के दायरे से भी बाहर आ जाएगी। कारोबार को रफ्तार मिलेगी।
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हिमांशु अग्रवाल, मैंथा प्रोडक्ट के एक्सपोर्टर।
मैंथा खेत में पैदा होता है और उससे मैंथा ऑयल निकलता है। मैंथा आयल से तैयार 80 प्रतिशत प्रोडक्ट निर्यात किए जा रहे हैं। सिर्फ 20 प्रतिशत के लिए टैक्स लगाने का कोई औचित्य नजर नहीं आता है मैं सोचता हूं कि जीएसटी काउंसिल इस पर विचार करेगी और मैंथा इंडस्ट्री को कर मुक्त करेगी।
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अंकुर अग्रवाल, सचिव मिंट एसोसिएशन।
मैंथा एसोसिएशन ने इंडस्ट्री को कर मुक्त करने की मांग उठाई
संभल। मैंथा एसोसिएशन ने जीएसटी की 11 जून की बैठक में टैक्स को 18 से 12 प्रतिशत करने के फैसले को सराहा गया है। इसके लिए स्थानीय बीजेपी जिलाध्यक्ष राजेश सिंघल और बीजेपी नेता संजय सांख्यधर का धन्यवाद दिया गया। एसोसिएशन से सचिव दीपक गुप्ता ने कहा कि एसोसिएशन की बात को सरकार तक पहुंचाने में राजेश सिंघल और संजय सांख्यधर का योगदान रहा। उन्होंने कहा कि मैंथा इंडस्ट्री सरकार से मैंथा आयल को कर मुक्त करने की मांग करती है। क्योंकि यह प्रोडक्ट कृषि आधारित है।