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बीएएमएस के बजाय दूसरे कोर्स की पढ़ाई वाले संस्थान पर 20 हजार अर्थदंड
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चंदौसी। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग सम्भल ने विज्ञापन में दिए गए कोर्स के बजाय दूसरी पढ़ाई कराने के मामले में संस्थान पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। यह जुर्माना धनराशि छात्र को उपलब्ध करानी होगी।
आयोग के अधिवक्ता लव मोहन वार्ष्णेय ने बताया कि बहजोई के गांव सादातबाड़ी निवासी रिजवान अली ने वर्ष 2016 में आईआईएमटी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर आगरा में बीएएमएस की पढ़ाई के लिए अपना एडमिशन लिया था। विज्ञापन में 32500 प्रति सेमेस्टर के हिसाब से साढ़े चार साल की पढ़ाई का दावा किया था। रिजवान अली ने फीस जमा कराकर अपना एडमिशन ले लिया था। एडमिशन के बाद पता चला कि बीएएमएस की डिग्री के लिए आयुर्वेद की पढ़ाई नहीं कराई जा रही है, उसके बाद बैचलर ऑफ एक्वा पंचर मेडिकल साइंस के डिप्लोमा की पढ़ाई कराई जा रही है। यह कोर्स मात्र एक साल का होता है। संस्थान के पास उसकी कोई मान्यता भी नहीं है। उनके द्वारा फीस जमा कराने के बाद कोई सुनवाई नहीं की गई। रिजवान अली ने अधिवक्ता लव मोहन वार्ष्णेय के माध्यम से एक परिवाद जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में दर्ज कराया गया था। आयोग की ओर से विपक्षी को नोटिस दिए गए, पर वह अपना पक्ष रखने के लिए उपस्थित नहीं हुए। आयोग के अध्यक्ष राम अचल यादव व सदस्य आशुतोष ने सुनवाई के बाद इस मामले में अपना फैसला छात्र के पक्ष में सुनाया है। आदेश दिए हैं कि आईआईएमटी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर आगरा संस्थान छात्र द्वारा जमा की गई 43500 रुपये शुल्क पर नौ प्रतिशत ब्याज, 20000 मानसिक कष्ट के रूप में दस हजार रुपये परिवाद व्यय का भुगतान कराने के आदेश दिए हैं।
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आयोग के अधिवक्ता लव मोहन वार्ष्णेय ने बताया कि बहजोई के गांव सादातबाड़ी निवासी रिजवान अली ने वर्ष 2016 में आईआईएमटी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर आगरा में बीएएमएस की पढ़ाई के लिए अपना एडमिशन लिया था। विज्ञापन में 32500 प्रति सेमेस्टर के हिसाब से साढ़े चार साल की पढ़ाई का दावा किया था। रिजवान अली ने फीस जमा कराकर अपना एडमिशन ले लिया था। एडमिशन के बाद पता चला कि बीएएमएस की डिग्री के लिए आयुर्वेद की पढ़ाई नहीं कराई जा रही है, उसके बाद बैचलर ऑफ एक्वा पंचर मेडिकल साइंस के डिप्लोमा की पढ़ाई कराई जा रही है। यह कोर्स मात्र एक साल का होता है। संस्थान के पास उसकी कोई मान्यता भी नहीं है। उनके द्वारा फीस जमा कराने के बाद कोई सुनवाई नहीं की गई। रिजवान अली ने अधिवक्ता लव मोहन वार्ष्णेय के माध्यम से एक परिवाद जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में दर्ज कराया गया था। आयोग की ओर से विपक्षी को नोटिस दिए गए, पर वह अपना पक्ष रखने के लिए उपस्थित नहीं हुए। आयोग के अध्यक्ष राम अचल यादव व सदस्य आशुतोष ने सुनवाई के बाद इस मामले में अपना फैसला छात्र के पक्ष में सुनाया है। आदेश दिए हैं कि आईआईएमटी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर आगरा संस्थान छात्र द्वारा जमा की गई 43500 रुपये शुल्क पर नौ प्रतिशत ब्याज, 20000 मानसिक कष्ट के रूप में दस हजार रुपये परिवाद व्यय का भुगतान कराने के आदेश दिए हैं।
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