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संसद में यूपी के सबसे बुजुर्ग सांसद होंगे डा. शफीकुर्रहमान बर्क
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चंदौसी। महागठबंधन में सपा के टिकट पर अपने जीवन के 17 वां चुनाव लड़कर 17वीं लोकसभा में पहुंचे सांसद डा. शफीकुर्रहमान बर्क यूपी से संसद से पहुंचने वालों में तो सबसे उम्रदराज हैं ही, पूरे देश के भी सबसे अधिक आयु के सांसदों में भी शुमार हैं। उम्र के इस पड़ाव पर कम ही लोग संसद तक पहुंच पाते हैं। डा. शफीकुर्रहमान बर्क ने सत्रहवीं लोक सभा के लिए अपने जीवन का सत्रहवां चुनाव लड़ा और शानदार जीत हासिल की।
सियासत को इबादत कहने वाले डा. शफीकुर्रहमान बर्क ने चुनावी सियासत में कदम 1967 में रखा। यही वह वर्ष था जब मुलायम सिंह यादव ने भी अपनी सियासी पारी की शुरुआत की थी। फर्क इतना था कि मुलायम सिंह यादव 1967 का चुनाव जीत गए लेकिन डा. शफीकुर्रहमान बर्क चुनाव हार गए। उन्होंने अपने जीवन में दस विधान सभा चुनाव लड़े, जिसमें चार विधान सभा चुनाव जीते और छह हार गए।
1974 में वह पहली बार विधान सभा चुनाव जीते। इसके साथ ही 2019 में उन्होंने अपने जीवन का सातवां लोक सभा चुनाव लड़ा। पांचवीं बार उन्होंने लोक सभा का चुनाव जीता। यहां तक आते आते मुलायम सिंह यादव की उम्र 79 वर्ष हो गई तो डा. शफीकुर्रहमान बर्क की उम्र 86 के बार हो गई। उत्तर प्रदेश के सभी 80 सांसदों में डा. बर्क सबसे उम्र दराज सांसद हैं।
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कोई आंकड़ा उपलब्ध तो नहीं है लेकिन इतना तो तय है कि पूरे देशभर से संसद में पहुंचने वाले सबसे बुजुर्ग सांसदों में से एक हैं। यह भी इत्तेफाक ही है कि वह देश की सत्रहवीं लोक सभा में अपने जीवन का सत्रहवां चुनाव लड़कर ही पहुंचे हैं।
अपने 52 वर्ष से अधिक के सियासी सफर में डा. शफीकुर्रहमान बर्क ने कई उतार चढ़ाव देखे। भाजपा जहां बुजुर्गों को टिकट न देकर सियासत से सेवानिवृत्ति देने की नीति पर आगे बढ़कर पूर्ण बहुमत तक पहुंची, भाजपाई नीति के विपरीत डा. बर्क महागठबंधन के टिकट पर 86 साल से अधिक आयु में भी संसद पहुंचने में कामयाब रहे।
संसद में तो रहेगा मुरादाबादी अल्पसंख्यक राजनीति का दबदबा
चंदौसी। देश की सत्रहवीं लोक सभा में पूरे उत्तर प्रदेश से सिर्फ पांच मुस्लिम चेहरे ही सांसद बनकर पहुंचे हैं। जिसमें संभल का भी प्रतिनिधित्व है। यह दीगर बात है कि महागठबंधन ने मुरादाबाद मंडल की सभी सीटों पर विजय हासिल की है लेकिन पूरे देशभर में तो महागठबंधन की सियासत को भी जोरदार झटका लगा है।
यादव, जाटव और मुस्लिम मतों पर राजनीति करने वाले महा गठबंधन का जादू नहीं चल पाया है। लेकिन जहां तक अल्पसंख्यक सियासत की बात की जाए तो मुरादाबाद मंडल से मुरादाबाद से एसटी हसन, रामपुर से आजम खान व संभल से डा. बर्क ने गठबंधन की साख बचाते हुए अपनी शानदार जीत दर्ज की है।
यूपी से भारत की संसद ने इन तीनों के साथ-साथ बसपा के टिकट पर गाजीपुर से अफजाल अंसारी व सहारनपुर से फजलुर्रहमान शामिल हैं। कुल मिलाकर अल्पसंख्यक राजनीति में संसद में मुरादाबाद का दबदबा रहेगा।
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सियासत को इबादत कहने वाले डा. शफीकुर्रहमान बर्क ने चुनावी सियासत में कदम 1967 में रखा। यही वह वर्ष था जब मुलायम सिंह यादव ने भी अपनी सियासी पारी की शुरुआत की थी। फर्क इतना था कि मुलायम सिंह यादव 1967 का चुनाव जीत गए लेकिन डा. शफीकुर्रहमान बर्क चुनाव हार गए। उन्होंने अपने जीवन में दस विधान सभा चुनाव लड़े, जिसमें चार विधान सभा चुनाव जीते और छह हार गए।
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1974 में वह पहली बार विधान सभा चुनाव जीते। इसके साथ ही 2019 में उन्होंने अपने जीवन का सातवां लोक सभा चुनाव लड़ा। पांचवीं बार उन्होंने लोक सभा का चुनाव जीता। यहां तक आते आते मुलायम सिंह यादव की उम्र 79 वर्ष हो गई तो डा. शफीकुर्रहमान बर्क की उम्र 86 के बार हो गई। उत्तर प्रदेश के सभी 80 सांसदों में डा. बर्क सबसे उम्र दराज सांसद हैं।
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कोई आंकड़ा उपलब्ध तो नहीं है लेकिन इतना तो तय है कि पूरे देशभर से संसद में पहुंचने वाले सबसे बुजुर्ग सांसदों में से एक हैं। यह भी इत्तेफाक ही है कि वह देश की सत्रहवीं लोक सभा में अपने जीवन का सत्रहवां चुनाव लड़कर ही पहुंचे हैं।
अपने 52 वर्ष से अधिक के सियासी सफर में डा. शफीकुर्रहमान बर्क ने कई उतार चढ़ाव देखे। भाजपा जहां बुजुर्गों को टिकट न देकर सियासत से सेवानिवृत्ति देने की नीति पर आगे बढ़कर पूर्ण बहुमत तक पहुंची, भाजपाई नीति के विपरीत डा. बर्क महागठबंधन के टिकट पर 86 साल से अधिक आयु में भी संसद पहुंचने में कामयाब रहे।
संसद में तो रहेगा मुरादाबादी अल्पसंख्यक राजनीति का दबदबा
चंदौसी। देश की सत्रहवीं लोक सभा में पूरे उत्तर प्रदेश से सिर्फ पांच मुस्लिम चेहरे ही सांसद बनकर पहुंचे हैं। जिसमें संभल का भी प्रतिनिधित्व है। यह दीगर बात है कि महागठबंधन ने मुरादाबाद मंडल की सभी सीटों पर विजय हासिल की है लेकिन पूरे देशभर में तो महागठबंधन की सियासत को भी जोरदार झटका लगा है।
यादव, जाटव और मुस्लिम मतों पर राजनीति करने वाले महा गठबंधन का जादू नहीं चल पाया है। लेकिन जहां तक अल्पसंख्यक सियासत की बात की जाए तो मुरादाबाद मंडल से मुरादाबाद से एसटी हसन, रामपुर से आजम खान व संभल से डा. बर्क ने गठबंधन की साख बचाते हुए अपनी शानदार जीत दर्ज की है।
यूपी से भारत की संसद ने इन तीनों के साथ-साथ बसपा के टिकट पर गाजीपुर से अफजाल अंसारी व सहारनपुर से फजलुर्रहमान शामिल हैं। कुल मिलाकर अल्पसंख्यक राजनीति में संसद में मुरादाबाद का दबदबा रहेगा।