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बिना जन सहभागिता के संभव नहीं है जल संरक्षण
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बिना जन सहभागिता के संभव नहीं है जल संरक्षण
नागल (सहारनपुर)। कोटा स्थित राजकीय महिला महाविद्यालय में शनिवार को इको रेस्टोरेशन क्लब के तत्वावधान में जल संरक्षण विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई।
संगोष्ठी का प्रारंभ मुख्य वक्ता डॉक्टर पूनम खरे विभागाध्यक्ष भूविज्ञान जेवी जैन कॉलेज सहारनपुर द्वारा मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन करके किया गया। डॉ. प्रताप सिंह रावत ने कहा कि पेयजल संकट वर्तमान में राष्ट्रीय विमर्श का मुद्दा है। भूजल स्तर में निरंतर कमी, वर्षा से प्राप्त जल का पर्याप्त संचय न हो पाना तथा पेयजल का घरेलू इस्तेमाल के साथ साथ साथ फसल उगाने तथा विभिन्न उद्योगों में असीमित रूप से उपयोग होने के कारण पीने के पानी की घोर समस्या उत्पन्न हो जाएगी। इससे निजात पाने के लिए शासकीय प्रयासों के साथ साथ जनभागीदारी भी नितांत आवश्यक है। डॉ पूनम खरे ने गांव में पानी की उपलब्धता और मांग विषय पर विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि पानी के स्रोतों की उपलब्धता, भूजल स्तर की स्थिति, वर्षा से प्राप्त पानी के उपयोग की स्थिति तथा धरती में पेयजल की सीमित उपलब्धता किंतु असीमित उपयोग के कारण पेयजल संकट उत्पन्न होना लाजमी है। ऐसी दशा में समय रहते जल संरक्षण तथा भू जल संवर्धन हेतु पेय जल के उपयोग को नियंत्रित करने के साथ-साथ विभिन्न ठोस उपाय अपनाने होंगे। प्राचार्य प्रोफेसर अंजू सिंह ने कहा कि देश वर्तमान में पेयजल की समस्या से जूझ रहा है यदि समय रहते इस समस्या को नियंत्रित नहीं किया जाएगा तो धरती मरुभूमि में तब्दील हो जाएगी।
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नागल (सहारनपुर)। कोटा स्थित राजकीय महिला महाविद्यालय में शनिवार को इको रेस्टोरेशन क्लब के तत्वावधान में जल संरक्षण विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई।
संगोष्ठी का प्रारंभ मुख्य वक्ता डॉक्टर पूनम खरे विभागाध्यक्ष भूविज्ञान जेवी जैन कॉलेज सहारनपुर द्वारा मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन करके किया गया। डॉ. प्रताप सिंह रावत ने कहा कि पेयजल संकट वर्तमान में राष्ट्रीय विमर्श का मुद्दा है। भूजल स्तर में निरंतर कमी, वर्षा से प्राप्त जल का पर्याप्त संचय न हो पाना तथा पेयजल का घरेलू इस्तेमाल के साथ साथ साथ फसल उगाने तथा विभिन्न उद्योगों में असीमित रूप से उपयोग होने के कारण पीने के पानी की घोर समस्या उत्पन्न हो जाएगी। इससे निजात पाने के लिए शासकीय प्रयासों के साथ साथ जनभागीदारी भी नितांत आवश्यक है। डॉ पूनम खरे ने गांव में पानी की उपलब्धता और मांग विषय पर विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि पानी के स्रोतों की उपलब्धता, भूजल स्तर की स्थिति, वर्षा से प्राप्त पानी के उपयोग की स्थिति तथा धरती में पेयजल की सीमित उपलब्धता किंतु असीमित उपयोग के कारण पेयजल संकट उत्पन्न होना लाजमी है। ऐसी दशा में समय रहते जल संरक्षण तथा भू जल संवर्धन हेतु पेय जल के उपयोग को नियंत्रित करने के साथ-साथ विभिन्न ठोस उपाय अपनाने होंगे। प्राचार्य प्रोफेसर अंजू सिंह ने कहा कि देश वर्तमान में पेयजल की समस्या से जूझ रहा है यदि समय रहते इस समस्या को नियंत्रित नहीं किया जाएगा तो धरती मरुभूमि में तब्दील हो जाएगी।