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गोसेवा के लिए समर्पित हैं विजयकांत चौहान
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विजय कांत चौहान
- फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह से प्रेरित सहारनपुर के जूनियर भगत सिंह यानी ‘विजयकांत’ चौहान ने गोसेवा को अपना जीवन समर्पित कर दिया। गऊशाला बनाकर आवारा घूमने वाले गोवंश की रक्षा की तो कई बार तस्करों से गोवंश छुड़वाने को लेकर भिड़ गए। विजयकांत चौहान सात हजार से अधिक गोवंश का अंतिम संस्कार विधि-विधान से कर चुके हैं। इसको लेकर उन्हें कई राज्यों के मुख्यमंत्री, धर्म गुरुओं और संस्थाओं ने सम्मानित भी किया है। साथ ही वह विदेेेशों भी उनके बड़ी संख्या में समर्थक हैं। अब बीबीसी ने उनकी गोसेवा को देखते उन पर अलग-अलग भाषाओं में शॉर्ट फिल्म बनाई है।
1984 में लिया था गोसेवा का संकल्प, कई बार हुए हमले
सहारनपुर। मोहल्ला नुमाइशकैंप निवासी विजयकांत चौहान वंदेमातरम चिंगारी एक ट्रस्ट के संस्थापक हैं। विजयकांत चौहान ने 1984 में गोसेवा करने का संकल्प लिया था और आरएसएस ज्वाइन की। इसके साथ ही पढ़ाई छोड़कर गोसेवा में लग गए। इसलिए विजयकांत चौहान ने शादी भी नहीं की। उन्होंने कई बार गो तस्करों को रंगे हाथ पकड़ा। इसको लेकर कई बार विजयकांत चौहान पर जानलेवा हमले भी हुए, लेकिन वह अपने संकल्प के साथ गोसेवा करते रहे। उन्होंने नुमाइशकैंप में श्री गोदेवी मंदिर के नाम से गऊशाला बनाई और शहर में आवारा घूमने वाले गोवंश को वहां लाकर रखा। उनकी गऊशाला में एक भी दूध देने वाली गाय नहीं हैं। गऊशाला में वर्तमान में 80 गोवंश हैं।
करते हैं इलाज और अंतिम संस्कार
सहारनपुर। विजयकांत चौहान ने गाय के लिए एंबुलेंस भी बनाई है, जिसे वह खुद ही चलाते हैं। दिन हो या रात कहीं पर भी गोवंश के मरने और घायल होने की सूचना मिलती है तो वह एंबुलेंस लेकर पहुंच जाते हैं। घायल गोवंश का इलाज करते हैं और मृत गोवंश का विधि-विधान से अंतिम संस्कार करते हैं। विजयकांत अभी तक सात हजार से अधिक गोवंश का अंतिम संस्कार कर चुुुके हैं। इसको लेकर सर्वे कर इनोवेटिव वर्ल्ड रिकार्ड्स संस्था ने उन्हें सम्मानित किया था। दिल्ली के राज्यपाल, गुजरात, उत्तराखंड और राजस्थान के मुख्यमंत्री उन्हें सम्मानित कर चुके हैं। इसके अलावा देहरादून, दिल्ली, चंड़ीगढ़, जयपुर, हैदाराबद, मथुरा, बीकानेर, सहारनपुर, हरिद्वार, ऋषिकेश सहित कई शहरों अनेक संस्थाओं ने उन्हें सम्मान दिया।
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देश-विदेश में बड़ी संख्या में समर्थक
सहारनपुर। बीबीसी ने विजयकांत चौहान पर शार्ट फिल्म बनाई है। इससे पूर्व उन पर कई संस्थाओं की ओर भी शॉर्ट फिल्म बनाई गई है, जो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई और यू-ट्यूब पर भी लाखों लोगों ने देेेखी। कई बार फ्रांस, जर्मनी, पेरिस, लंदन, आस्ट्रेलिया, चाइना, श्रीलंका, नीदरलैंड से विदेशी भी उनके गऊशाला पहुंचे और विजयकांत से प्रेरित हुए। इसके अलावा इन देशों की मीडिया ने भी उनके इंटरव्यू लिए।
हो रही उपेक्षा : विजयकांत
सहारनपुर। विजयकांत चौहान का कहना है कि उनकी गऊशाला में 80 से अधिक गोवंश हैं। अब गऊशाला में पैर रखने की भी जगह नहीं बची हैं। बड़ी मुश्किल किसी तरह वह गोवंश को रख रहे हैं। प्रदेश सरकार ने गो आश्रय स्थल बनाए हैं। इसको लेकर उन्होंने कई बार शासन-प्रशासन से अनुरोध किया कि उनके यहां से कुछ गोवंश को सरकारी गो आश्रय स्थल भिजवाया जाए, जिससे अन्य गोवंश आराम से रह सकें, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। वह गऊशाला से जगह दिए जाने की मांग भी कर चुके हैं, लेकिन कुछ लोगों की वजह से उन्हें जगह नहीं मिल पा रही है। सरकार की ओर न ही कोई अनुदान मिल रहा है। उन पर काफी कर्जा हो गया है, जिस कारण मकान भी बिक चुका है।
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1984 में लिया था गोसेवा का संकल्प, कई बार हुए हमले
सहारनपुर। मोहल्ला नुमाइशकैंप निवासी विजयकांत चौहान वंदेमातरम चिंगारी एक ट्रस्ट के संस्थापक हैं। विजयकांत चौहान ने 1984 में गोसेवा करने का संकल्प लिया था और आरएसएस ज्वाइन की। इसके साथ ही पढ़ाई छोड़कर गोसेवा में लग गए। इसलिए विजयकांत चौहान ने शादी भी नहीं की। उन्होंने कई बार गो तस्करों को रंगे हाथ पकड़ा। इसको लेकर कई बार विजयकांत चौहान पर जानलेवा हमले भी हुए, लेकिन वह अपने संकल्प के साथ गोसेवा करते रहे। उन्होंने नुमाइशकैंप में श्री गोदेवी मंदिर के नाम से गऊशाला बनाई और शहर में आवारा घूमने वाले गोवंश को वहां लाकर रखा। उनकी गऊशाला में एक भी दूध देने वाली गाय नहीं हैं। गऊशाला में वर्तमान में 80 गोवंश हैं।
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करते हैं इलाज और अंतिम संस्कार
सहारनपुर। विजयकांत चौहान ने गाय के लिए एंबुलेंस भी बनाई है, जिसे वह खुद ही चलाते हैं। दिन हो या रात कहीं पर भी गोवंश के मरने और घायल होने की सूचना मिलती है तो वह एंबुलेंस लेकर पहुंच जाते हैं। घायल गोवंश का इलाज करते हैं और मृत गोवंश का विधि-विधान से अंतिम संस्कार करते हैं। विजयकांत अभी तक सात हजार से अधिक गोवंश का अंतिम संस्कार कर चुुुके हैं। इसको लेकर सर्वे कर इनोवेटिव वर्ल्ड रिकार्ड्स संस्था ने उन्हें सम्मानित किया था। दिल्ली के राज्यपाल, गुजरात, उत्तराखंड और राजस्थान के मुख्यमंत्री उन्हें सम्मानित कर चुके हैं। इसके अलावा देहरादून, दिल्ली, चंड़ीगढ़, जयपुर, हैदाराबद, मथुरा, बीकानेर, सहारनपुर, हरिद्वार, ऋषिकेश सहित कई शहरों अनेक संस्थाओं ने उन्हें सम्मान दिया।
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देश-विदेश में बड़ी संख्या में समर्थक
सहारनपुर। बीबीसी ने विजयकांत चौहान पर शार्ट फिल्म बनाई है। इससे पूर्व उन पर कई संस्थाओं की ओर भी शॉर्ट फिल्म बनाई गई है, जो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई और यू-ट्यूब पर भी लाखों लोगों ने देेेखी। कई बार फ्रांस, जर्मनी, पेरिस, लंदन, आस्ट्रेलिया, चाइना, श्रीलंका, नीदरलैंड से विदेशी भी उनके गऊशाला पहुंचे और विजयकांत से प्रेरित हुए। इसके अलावा इन देशों की मीडिया ने भी उनके इंटरव्यू लिए।
हो रही उपेक्षा : विजयकांत
सहारनपुर। विजयकांत चौहान का कहना है कि उनकी गऊशाला में 80 से अधिक गोवंश हैं। अब गऊशाला में पैर रखने की भी जगह नहीं बची हैं। बड़ी मुश्किल किसी तरह वह गोवंश को रख रहे हैं। प्रदेश सरकार ने गो आश्रय स्थल बनाए हैं। इसको लेकर उन्होंने कई बार शासन-प्रशासन से अनुरोध किया कि उनके यहां से कुछ गोवंश को सरकारी गो आश्रय स्थल भिजवाया जाए, जिससे अन्य गोवंश आराम से रह सकें, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। वह गऊशाला से जगह दिए जाने की मांग भी कर चुके हैं, लेकिन कुछ लोगों की वजह से उन्हें जगह नहीं मिल पा रही है। सरकार की ओर न ही कोई अनुदान मिल रहा है। उन पर काफी कर्जा हो गया है, जिस कारण मकान भी बिक चुका है।