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जनपद में गेहूं की पछेती प्रजाति एचडी-3298 का ट्रायल
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सहारनपुर। कृषि विज्ञान केंद्र गेहूं की पछेती प्रजाति एचडी-3298 का ट्रायल कर रहा है। 15 जनवरी तक बोई जाने वाली इस प्रजाति का ट्रायल सफल रहा तो जनपद के गन्ना किसानों के लिए यह वरदान साबित होगी। केवीके परिसर में छोटे स्तर पर इसका ट्रायल लगाया गया है।
जनपद में अधिकांश किसान गन्ने को शुगर मिल में सप्लाई करने के बाद गेहूं की बुवाई करते हैं। आमतौर पर शुगर मिल नवंबर के पहले सप्ताह के आसपास ही अपना पेराई सत्र शुरू करते हैं। इसके चलते गन्ने के खेत देरी से खाली हो पाते हैं। जिसका असर गेहूूं सहित अन्य रबी फसलों की बुवाई पर पड़ता है। इस प्रजाति का गेहूूं औसतन 103 दिनों में पककर तैयार हो जाता है। आमतौर पर जिले के किसान दिसंबर के आखिरी सप्ताह तक ही गेहूं की बुवाई करना पसंद करते हैं। क्योंकि इसके बाद बुवाई करने पर गेहूं का उत्पादन काफी कम रहता है। जनवरी में गन्ने का खेत खाली होने पर किसान गेहूं की बुवाई करने में हिचकते हैं। इसके बाद वे वसंत कालीन गन्ना या किसी अन्य फसलों की बुवाई करते हैं। इससे करीब दो से तीन माह तक खेत खाली रह जाता है। कृषि विज्ञान केंद्र गेहूं की नई पछेती प्रजाति एचडी-3298 का ट्रायल कर रहा है। गेहूं की यह प्रजाति औसतन 103 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। इसकी औसत उपज 16 क्विंटल प्रति एकड़ है। केवीके परिसर में गेहूं की इस प्रजाति का ट्रायल सफल रहा तो किसानों को इसका बीज उपलब्ध कराया जाएगा।
पोषक तत्वों से भरपूर
गेहूं की पछेती प्रजाति एचडी- 3298 पोषक तत्वों से भी भरपूर है। इसमें आयरन 4.31 प्रतिशत है और प्रोटीन की मात्रा 12.12 प्रतिशत है। जो गेहूं की सामान्य प्रजातियों से अधिक है। इसका उत्पादन भी 16 क्विंटल प्रति एकड़ है।
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कृषि विज्ञान केंद्र ने गेहूूं की एचडी -3298 प्रजाति का ट्रायल परिसर में लगाया है। यदि ट्रायल सफल रहा तो आगामी सीजन में जनपद के किसानों को इसका बीज बुवाई के लिए दिया जाएगा। जिससे गन्ना काटकर गेहूं की पछेती बुवाई करने वाले किसानों को फायदा होगा। - डॉक्टर आईके कुशवाहा, प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र।
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जनपद में अधिकांश किसान गन्ने को शुगर मिल में सप्लाई करने के बाद गेहूं की बुवाई करते हैं। आमतौर पर शुगर मिल नवंबर के पहले सप्ताह के आसपास ही अपना पेराई सत्र शुरू करते हैं। इसके चलते गन्ने के खेत देरी से खाली हो पाते हैं। जिसका असर गेहूूं सहित अन्य रबी फसलों की बुवाई पर पड़ता है। इस प्रजाति का गेहूूं औसतन 103 दिनों में पककर तैयार हो जाता है। आमतौर पर जिले के किसान दिसंबर के आखिरी सप्ताह तक ही गेहूं की बुवाई करना पसंद करते हैं। क्योंकि इसके बाद बुवाई करने पर गेहूं का उत्पादन काफी कम रहता है। जनवरी में गन्ने का खेत खाली होने पर किसान गेहूं की बुवाई करने में हिचकते हैं। इसके बाद वे वसंत कालीन गन्ना या किसी अन्य फसलों की बुवाई करते हैं। इससे करीब दो से तीन माह तक खेत खाली रह जाता है। कृषि विज्ञान केंद्र गेहूं की नई पछेती प्रजाति एचडी-3298 का ट्रायल कर रहा है। गेहूं की यह प्रजाति औसतन 103 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। इसकी औसत उपज 16 क्विंटल प्रति एकड़ है। केवीके परिसर में गेहूं की इस प्रजाति का ट्रायल सफल रहा तो किसानों को इसका बीज उपलब्ध कराया जाएगा।
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पोषक तत्वों से भरपूर
गेहूं की पछेती प्रजाति एचडी- 3298 पोषक तत्वों से भी भरपूर है। इसमें आयरन 4.31 प्रतिशत है और प्रोटीन की मात्रा 12.12 प्रतिशत है। जो गेहूं की सामान्य प्रजातियों से अधिक है। इसका उत्पादन भी 16 क्विंटल प्रति एकड़ है।
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कृषि विज्ञान केंद्र ने गेहूूं की एचडी -3298 प्रजाति का ट्रायल परिसर में लगाया है। यदि ट्रायल सफल रहा तो आगामी सीजन में जनपद के किसानों को इसका बीज बुवाई के लिए दिया जाएगा। जिससे गन्ना काटकर गेहूं की पछेती बुवाई करने वाले किसानों को फायदा होगा। - डॉक्टर आईके कुशवाहा, प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र।