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मौत बनकर दौड़ रहे बिना रिफलेक्टर लगे वाहन
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देहघादून रोड से हरियाणा की ओर बिना रिफ्लेक्टर लगे लकड़ी की पर्तियां ओवलोडेड लेकर जाती ट्रेक्टर-?
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। जिले में बिना रिफ्लेक्टर लगी ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रालियां खतरा बनी हैं, क्योंकि, सर्दी बढ़ने के साथ ही रात में कोहरा आने लगा है, जिससे यह वाहन दिखाई नहीं देते हैं। ऐसे में कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
शहर के दिल घंटाघर से होकर रोजाना रात में 2500 से 3000 हजार ट्रैक्टर-ट्रालियां गुजरती हैं। उत्तराखंड, पड़ोसी जनपदों और सहारनपुर के देहात क्षेत्रों से आने वाली लकड़ी से लदी ओवरलोडेड ट्रैक्टर-ट्रालियां हरियाणा जाती हैं। इसके अलावा गन्ने, घास और सब्जियों से भरी ट्रैक्टर-ट्रालियां निकलती हैं। रात दस बजे के बाद स्थिति यह हो जाती है कि ट्रैक्टर-ट्रालियों की लाइन लग जाती है।
इन ट्रैक्टर-ट्रालियों से हादसा होने का खतरा बना है। क्योंकि, सर्दी बढ़ने पर रात में कोहरा पड़ने लगा है। ट्रैक्टर-ट्रालियों में आगे की तरफ लाइट लगी होने की वजह से वह सामने से दिखाई दे जाती हैं, लेकिन पीछे से नजर नहीं आती हैं। क्योंकि, अधिकांश ट्रैक्टर-ट्रालियों पर पीछे की तरफ न ही लाइटें लगी हैं और न ही रिफ्लेक्टर लगे हैं। इस कारण रात के समय दिल्ली हाईवे, अंबाला हाईवे, देहरादून हाईवे, गंगोह मार्ग, मल्हीपुर रोड पर ट्रैक्टर-ट्रालियां अन्य राहगीरों के लिए खतरा बनी हैं।
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कई बार पलट चुकी हैं ट्रैक्टर-ट्रालियां
सहारनपुर। महानगर से होकर हरियाणा जाने वाली लकड़ी से लदी ओवरलोडेड ट्रैक्टर ट्रालियां कई बार पलट चुकी हैं। ढमोला नदी पुल पर आए दिन ऐसी दुर्घटनाएं होती हैं। ट्रैक्टर-ट्रालियों के पलटने की वजह से पुल की रेलिंग भी कई बार टूट चुकी हैं। इसी तरह मेला गुघाल पुल पर भी इस तरह के घटनाएं हो चुकी हैं। घंटाघर के व्यापारी अमित गुलाटी का कहना है कि ओवरलोडेड ट्रैक्टर-ट्रालियों की वजह से रात में खतरा बना है। ढमोला नदी पुल पर आए दिन हादसे होते हैं। ज्यादातर ट्रैक्टर-ट्रालियों पर रिफ्लेक्टर नहीं लगे हैं, जिससे पीछे की तरफ से ट्रैक्टर-ट्रालियां दिखाई नहीं देती हैं। बाजोरिया मार्ग के दवा कारोबारी प्रवीन खुराना का कहना है कि इन पर कार्रवाई होनी चाहिए। ट्रैक्टर-ट्रालियों की वजह से रात में महानगर की सड़कों पर सफर करना खतरे से भरा है।
लगाए जाएंगे रिफ्लेक्टर : तोमर
सहारनपुर। यातायात प्रभारी पवन तोमर का कहना है कि यातायात पुलिस की ओर से समय-समय पर वाहनों पर रिफ्लेक्टर लगाए जाते हैं। इसके साथ ही ओवरलोडेड वाहनों पर कार्रवाई भी की जाती है। बिना लाइट और रिफ्लेक्टर के ट्रैक्टर-ट्राली चलाने वाले चालकों पर कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही यातायात पुलिस की ओर से वाहनों पर रिफ्लेक्टर लगाए जाएंगे।
ट्रैक्टर-ट्राली से हुई रात में प्रमुख दुर्घटनाएं
-- देवबंद में ट्रैक्टर ट्राली की चपेट में आकर कार सवार विद्युत निगम दो एसडीओ की तीन महीने पहले हुई थी मौत।
-- अंबाला रोड पर बड़ी नहर के निकट ट्रैक्टर-ट्राली से टकराकर बाइक सवार व्यक्ति की जुलाई 2019 में हुई मौत।
-- अंबाला हाईवे पर नकुड़ तिराहे के पास ट्रैक्टर-ट्राली कार से टकराई कार, हादसे में करीब डेढ़ साल पहले तीन की मौत हुई थी।
-- चिलकाना रोड पर ट्रैक्टर-ट्राली की चपेट में आकर करीब आठ माह पहले साईकिल सवार की मौत।
-- रामपुर मनिहारान दिल्ली हाईवे पर ट्रैक्टर-ट्राली की चपेट में आकर सप्ताह भर पहले तीन युवक घायल हुए।
म्यूजिक सिस्टम बजाकर तेजी से दौड़ाते हैं वाहन
सहारनपुर। अक्सर देखा जाता है कि ट्रैक्टर-ट्राली में चालकों ने म्यूजिक सिस्टम लगा रहा है। चालक गाने बजाते हुए ट्रैक्टर-ट्राली को तेजी से दौड़ाते हैं और अगर पीछे से कोई अन्य वाहन हार्न बजाता है तो उन्हें सुनाई नहीं देता है। इसके अलावा कानों में मोबाइल फोन की लीड लगाकर गाने सुनते हुए भी ट्रैक्टर-ट्राली दौड़ाते हुए चालक देख जा सकते हैं। हादसे होने के बावजूद पुलिस-प्रशासन की से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है।
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शहर के दिल घंटाघर से होकर रोजाना रात में 2500 से 3000 हजार ट्रैक्टर-ट्रालियां गुजरती हैं। उत्तराखंड, पड़ोसी जनपदों और सहारनपुर के देहात क्षेत्रों से आने वाली लकड़ी से लदी ओवरलोडेड ट्रैक्टर-ट्रालियां हरियाणा जाती हैं। इसके अलावा गन्ने, घास और सब्जियों से भरी ट्रैक्टर-ट्रालियां निकलती हैं। रात दस बजे के बाद स्थिति यह हो जाती है कि ट्रैक्टर-ट्रालियों की लाइन लग जाती है।
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इन ट्रैक्टर-ट्रालियों से हादसा होने का खतरा बना है। क्योंकि, सर्दी बढ़ने पर रात में कोहरा पड़ने लगा है। ट्रैक्टर-ट्रालियों में आगे की तरफ लाइट लगी होने की वजह से वह सामने से दिखाई दे जाती हैं, लेकिन पीछे से नजर नहीं आती हैं। क्योंकि, अधिकांश ट्रैक्टर-ट्रालियों पर पीछे की तरफ न ही लाइटें लगी हैं और न ही रिफ्लेक्टर लगे हैं। इस कारण रात के समय दिल्ली हाईवे, अंबाला हाईवे, देहरादून हाईवे, गंगोह मार्ग, मल्हीपुर रोड पर ट्रैक्टर-ट्रालियां अन्य राहगीरों के लिए खतरा बनी हैं।
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कई बार पलट चुकी हैं ट्रैक्टर-ट्रालियां
सहारनपुर। महानगर से होकर हरियाणा जाने वाली लकड़ी से लदी ओवरलोडेड ट्रैक्टर ट्रालियां कई बार पलट चुकी हैं। ढमोला नदी पुल पर आए दिन ऐसी दुर्घटनाएं होती हैं। ट्रैक्टर-ट्रालियों के पलटने की वजह से पुल की रेलिंग भी कई बार टूट चुकी हैं। इसी तरह मेला गुघाल पुल पर भी इस तरह के घटनाएं हो चुकी हैं। घंटाघर के व्यापारी अमित गुलाटी का कहना है कि ओवरलोडेड ट्रैक्टर-ट्रालियों की वजह से रात में खतरा बना है। ढमोला नदी पुल पर आए दिन हादसे होते हैं। ज्यादातर ट्रैक्टर-ट्रालियों पर रिफ्लेक्टर नहीं लगे हैं, जिससे पीछे की तरफ से ट्रैक्टर-ट्रालियां दिखाई नहीं देती हैं। बाजोरिया मार्ग के दवा कारोबारी प्रवीन खुराना का कहना है कि इन पर कार्रवाई होनी चाहिए। ट्रैक्टर-ट्रालियों की वजह से रात में महानगर की सड़कों पर सफर करना खतरे से भरा है।
लगाए जाएंगे रिफ्लेक्टर : तोमर
सहारनपुर। यातायात प्रभारी पवन तोमर का कहना है कि यातायात पुलिस की ओर से समय-समय पर वाहनों पर रिफ्लेक्टर लगाए जाते हैं। इसके साथ ही ओवरलोडेड वाहनों पर कार्रवाई भी की जाती है। बिना लाइट और रिफ्लेक्टर के ट्रैक्टर-ट्राली चलाने वाले चालकों पर कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही यातायात पुलिस की ओर से वाहनों पर रिफ्लेक्टर लगाए जाएंगे।
ट्रैक्टर-ट्राली से हुई रात में प्रमुख दुर्घटनाएं
-- देवबंद में ट्रैक्टर ट्राली की चपेट में आकर कार सवार विद्युत निगम दो एसडीओ की तीन महीने पहले हुई थी मौत।
-- अंबाला रोड पर बड़ी नहर के निकट ट्रैक्टर-ट्राली से टकराकर बाइक सवार व्यक्ति की जुलाई 2019 में हुई मौत।
-- अंबाला हाईवे पर नकुड़ तिराहे के पास ट्रैक्टर-ट्राली कार से टकराई कार, हादसे में करीब डेढ़ साल पहले तीन की मौत हुई थी।
-- चिलकाना रोड पर ट्रैक्टर-ट्राली की चपेट में आकर करीब आठ माह पहले साईकिल सवार की मौत।
-- रामपुर मनिहारान दिल्ली हाईवे पर ट्रैक्टर-ट्राली की चपेट में आकर सप्ताह भर पहले तीन युवक घायल हुए।
म्यूजिक सिस्टम बजाकर तेजी से दौड़ाते हैं वाहन
सहारनपुर। अक्सर देखा जाता है कि ट्रैक्टर-ट्राली में चालकों ने म्यूजिक सिस्टम लगा रहा है। चालक गाने बजाते हुए ट्रैक्टर-ट्राली को तेजी से दौड़ाते हैं और अगर पीछे से कोई अन्य वाहन हार्न बजाता है तो उन्हें सुनाई नहीं देता है। इसके अलावा कानों में मोबाइल फोन की लीड लगाकर गाने सुनते हुए भी ट्रैक्टर-ट्राली दौड़ाते हुए चालक देख जा सकते हैं। हादसे होने के बावजूद पुलिस-प्रशासन की से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है।

अंबाला रोड पर बिना रिफ्लेक्टर लगी ट्रेक्टर-ट्राली सड़कों पर दौड़ती हुई।- फोटो : SAHARANPUR