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जिंदगी के लिए जूझ रहे घायल लोग
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Tue, 09 Aug 2016 01:20 AM IST
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चिलकाना क्षेत्र में रविवार को हुए हादसे में बचे एक दर्जन से अधिक गंभीर घायल शहर के विभिन्न अस्पतालों में जिंदगी के लिए जूझ रहे हैं। सभी गरीब परिवारों से हैं। ऐसे में इलाज का खर्च उठा पाना उनके लिए मुश्किल हो रहा है। हालांकि कुछ अस्पताल इसमें सेवाभाव से भी काम कर रहे हैं।
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रविवार की शाम करीब पांच बजे सुल्तानपुर से चाब देकर लौट रही ट्रैक्टर-ट्रॉली चिलकाना से कुछ दूर सड़क पर पलट गई थी, जिसमें दस लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 40 से अधिक लोग घायल हो गए थे।
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इनमें से कुछ को चिलकाना सीएचसी में भर्ती कराया गया था, जबकि अधिकतर को जिला अस्पताल भेजा गया था। जिला अस्पताल पहुंचे गंभीर रूप से घायल करीब एक दर्जन लोगों को रेफर कर दिया गया था, जिन्हें शहर के ही निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। इनमें कई की हालत अभी भी चिंताजनक बनी हुई है।
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अस्पताल में लगा रहा जमावड़ा
घायलों की देखरेख के लिए एक ओर जहां उनके परिजन रात से ही अस्पताल में जमे रहे। वहीं विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता और कार्यकर्ता भी घायलों का हाल जानने पहुंचे थे। ऐसे में अस्पताल में भीड़ लगी रही।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने की मदद
हादसे के बाद तीन दर्जन से अधिक घायलों को जिला अस्पताल भेजा गया। मौके पर मौजूद सीओ द्वितीय अमित नागर ने जिला अस्पताल में संसाधनों की कमी को देखते हुए व्हाट्सएप ग्रुप पर घायलों की मदद करने की अपील लोगों से की।
मैसेज पढ़ते ही सामाजिक संगठन जागते रहो के संयोजक अमित जैन ने सीओ से फोन पर संपर्क किया। जानकारी लेने के बाद उन्होंने अपने साथी संदीप जैन, मनोज जैन, सिद्धार्थ फरकाम, आशीष, अभय, पवनीश आदि को मौके पर भेजा।
इन लोगों ने गंभीर रूप से घायल करीब आठ लोगों का अपने खर्च से निजी अस्पताल में सीटी स्केन कराया। एक महिला की आंत फट चुकी थी। यहां चिकित्सक के न मिलने पर उसके परिजनों को दस हजार रुपये देकर जौलीग्रांट देहरादून भिजवाया। इसके अलावा करीब आधा दर्जन मरीजों को एक निजी अस्पताल में अपने खर्च पर अपनी ही गाड़ियों से ले जाकर भर्ती कराया।