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Saharanpur News: रजिस्टरों में छिपा है नकली सिक्कों के कारोबार का राज, मिली कई अहम जानकारी
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सहारनपुर। नकली सिक्के बनाने वाले गिरोह के पास से मिले सात रजिस्टरों में इस काले धंधे का पूरा राज छिपा हो सकता है। चर्चा है कि रजिस्टरों में दर्ज लेन-देन और सिक्कों की आपूर्ति सहित अनेक महत्वपूर्ण जानकारी पुलिस को लगी हैं। कई मोबाइल नंबर भी पुलिस के हाथ लगे हैं, जो गिरोह के फरार सदस्यों तक पुलिस को पहुंचने में मदद करेंगे।
शहर कोतवाली पुलिस गिरोह के पास से 20-20 रुपये के 6,400 नकली सिक्के, पांच लाख रुपये के अधबने सिक्के, आठ मोबाइल फोन, सात रजिस्टर बरामद मिले थे। माना जा रहा है कि इन्हीं रजिस्टरों में नकली सिक्कों के अवैध कारोबार के कई राज छिपे हो सकते हैं, जो कड़ी दर कड़ी इस धंधे से जुड़े लोगों तक पहुंचने में पुलिस की मदद करेंगे। पुलिस के मुताबिक, रजिस्टर में कारोबार से जुड़े लेनदेन और सिक्कों की सप्लाई का हिसाब दर्ज है।
आरोपी जो भी सिक्के बाजार, शराब के ठेकों और टोल प्लाजा आदि पर सप्लाई करते थे, उन सबका हिसाब रजिस्टर में दर्ज करते थे। इसके अनुसार ही उनका कमीशन तय होता था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह के सदस्य किन-किन लोगों के संपर्क थे। रजिस्टर में दर्ज नाम, मोबाइल नंबर और अन्य विवरणों का सत्यापन किया जा रहा है।
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-- बातचीत की जानकारी जुटा रही पुलिस
गिरोह के कुछ अन्य सदस्य अभी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। ऐसे में बरामद मोबाइल फोन और रजिस्टर में मिले नंबर जांच के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। पुलिस इन नंबरों के जरिए आरोपियों के संपर्कों और आपसी बातचीत की जानकारी जुटाने में लगी है। मोबाइल नंबरों और रजिस्टर के आधार पर गिरोह के पूरे नेटवर्क का पता लगेगा।
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शहर कोतवाली पुलिस गिरोह के पास से 20-20 रुपये के 6,400 नकली सिक्के, पांच लाख रुपये के अधबने सिक्के, आठ मोबाइल फोन, सात रजिस्टर बरामद मिले थे। माना जा रहा है कि इन्हीं रजिस्टरों में नकली सिक्कों के अवैध कारोबार के कई राज छिपे हो सकते हैं, जो कड़ी दर कड़ी इस धंधे से जुड़े लोगों तक पहुंचने में पुलिस की मदद करेंगे। पुलिस के मुताबिक, रजिस्टर में कारोबार से जुड़े लेनदेन और सिक्कों की सप्लाई का हिसाब दर्ज है।
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आरोपी जो भी सिक्के बाजार, शराब के ठेकों और टोल प्लाजा आदि पर सप्लाई करते थे, उन सबका हिसाब रजिस्टर में दर्ज करते थे। इसके अनुसार ही उनका कमीशन तय होता था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह के सदस्य किन-किन लोगों के संपर्क थे। रजिस्टर में दर्ज नाम, मोबाइल नंबर और अन्य विवरणों का सत्यापन किया जा रहा है।
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गिरोह के कुछ अन्य सदस्य अभी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। ऐसे में बरामद मोबाइल फोन और रजिस्टर में मिले नंबर जांच के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। पुलिस इन नंबरों के जरिए आरोपियों के संपर्कों और आपसी बातचीत की जानकारी जुटाने में लगी है। मोबाइल नंबरों और रजिस्टर के आधार पर गिरोह के पूरे नेटवर्क का पता लगेगा।