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बासमती धान पर बढा भूरा फुदका कीट का प्रकोप
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धान की फसल का निरीक्षण करते केवीके के प्रभारी
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। इस माह लगातार हुई बरसात के बाद जनपद में बासमती धान की फसल पर भूरा फुदका कीट का प्रकोप बढ़ा है। यह कीट पौधे के निचले हिस्से से रस चूसकर फसल को कमजोर कर देता है। समय पर नियंत्रण नहीं होने पर फसल की उत्पादकता में कमी आने की आशंका है।
जनपद में पहले सूखा और फिर लगातार हुई बरसात ने बासमती धान की फसल की सेहत खराब कर दी है। इसमें भूरा फुदका कीट का प्रकोप बढ़ गया है। यह कीट झुंड में रहता है। लगातार बारिश होने से इस कीट का प्रकोप तेजी से फैला है। एक ही स्थान पर इन कीटों की संख्या अधिक रहने के चलते उस स्थान पर खड़ी फसल से रस चूसकर उसे काफी कमजोर कर देता है। प्रभावित फसल के पौधों नीचे से ऐसे दिखते हैं जैसे उनकी नीचे की पत्तियां झुलस गई हों। समय पर उपचार नहीं होने पर प्रभावित फसल की न सिर्फ उत्पादकता कम हो जाती है बल्कि गुणवत्ता पर भी विपरीत असर पड़ता है।
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी एवं फसल सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर आईके कुशवाहा ने बताया कि बासमती धान में भूरा फुदका कीट का प्रकोप बढ़ने की शिकायत किसान लगातार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस कीट पर नियंत्रण के लिए किसानों को प्रभावित फसल पर डिनोटेफिरॉन की 100 ग्राम मात्रा को 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ छिड़काव करना कारगर रहता है। कीटनाशक दवा में स्टीकर का प्रयोग अवश्य किया जाए। प्रभावित फसल में किसान यूरिया का प्रयोग ना करें।
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जनपद में पहले सूखा और फिर लगातार हुई बरसात ने बासमती धान की फसल की सेहत खराब कर दी है। इसमें भूरा फुदका कीट का प्रकोप बढ़ गया है। यह कीट झुंड में रहता है। लगातार बारिश होने से इस कीट का प्रकोप तेजी से फैला है। एक ही स्थान पर इन कीटों की संख्या अधिक रहने के चलते उस स्थान पर खड़ी फसल से रस चूसकर उसे काफी कमजोर कर देता है। प्रभावित फसल के पौधों नीचे से ऐसे दिखते हैं जैसे उनकी नीचे की पत्तियां झुलस गई हों। समय पर उपचार नहीं होने पर प्रभावित फसल की न सिर्फ उत्पादकता कम हो जाती है बल्कि गुणवत्ता पर भी विपरीत असर पड़ता है।
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कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी एवं फसल सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर आईके कुशवाहा ने बताया कि बासमती धान में भूरा फुदका कीट का प्रकोप बढ़ने की शिकायत किसान लगातार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस कीट पर नियंत्रण के लिए किसानों को प्रभावित फसल पर डिनोटेफिरॉन की 100 ग्राम मात्रा को 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ छिड़काव करना कारगर रहता है। कीटनाशक दवा में स्टीकर का प्रयोग अवश्य किया जाए। प्रभावित फसल में किसान यूरिया का प्रयोग ना करें।
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