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दुश्मन फायर कर रहा था और वीर सैनिक बढ़ते जा रहे थे
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कर्नल मधुर गोयल
- फोटो : SAHARANPUR
दुश्मन फायर कर रहा था और वीर सैनिक बढ़ते जा रहे थे
सहारनपुर। ‘द्रास सेक्टर में हमारी तैनाती थी। दुश्मन ऊंची पहाड़ी पर था और मशीनगन से लैस था। मगर भारतीय सैनिकों का हौसला इतना मजबूत था कि ऊंची पहाड़ियां चढ़ते जा रहे थे। दुश्मन की तरफ से फायर किए जा रहे थे, मगर सैनिकों को मौत का जैसे कोई भय ही नहीं था। भारतीय सेना के इसी साहस ने कारगिल में विजय दिलाई’। यह कहना है सेना में कर्नल रहे मधुर गोयल का।
सहारनपुर स्थित न्यू आवास विकास कालोनी में रहने वाले कर्नल मधुर गोयल 31 अक्तूबर 2017 को सेवानिवृत्त हुए थे। कारगिल युद्ध में हिस्सा लेने और अन्य मोर्चों पर बहादुरी का परिचय देने के चलते ही उन्हें सेना मेडल (वीरता) से सम्मानित किया गया। उन्होंने बताया कि वह आर्मी में जाट रेजीमेंट के साथ संबद्ध थे। कारगिल युद्ध के दौरान उनकी तैनाती कश्मीर के द्रास इलाके में थी। भारत के वीर जवानों ने पाकिस्तान की तरफ से आए 10 आतंकियों को मार गिराया था। वहीं, आतंकियों के हमले में एक जवान भी शहीद हुआ था। हिमालय की पीर पंजाल रेंज में सैनिक अलर्ट मोड पर थे। एक-एक जवान जो पहाड़ पर चढ़ रहा था, उसके सामने फायरिंग का खतरा था। रास्ता भी पगडंडी वाला था, लेकिन दिल में डर कतई नहीं था। पाकिस्तान के सैनिक और आतंकियों के पास मशीनगन थीं। भारतीय सैनिक घबराए नहीं थे, मुंहतोड़ जवाब दिया था।
घर बात करने की फुर्सत ही नहीं होती थी
कर्नल मधुर गोयल का कहना है कि कारगिल युद्ध के दौरान काफी दिन तक इतने व्यस्त रहे थे कि घर पर बात करने के हालात नहीं होते थे। वैसे भी घर वालों से बात करके कमजोरी पैदा होने का डर रहता था। लड़ाई में हौसला कम न हो, लिहाजा ऑपरेशन खत्म होने पर ही बात होती थी।
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बेटी सिंगापुर में कर रही पढ़ाई, बेटा बैंक में कार्यरत
कर्नल मधुर गोयल ने बताया कि वह मूलरूप से सहारनपुर के ही रहने वाले हैं। परिवार में उनकी बेटी सिंगापुर में मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रही है और टॉपर बनी है। वहीं, उनका बेटा बैंक में नौकरी कर रहा है। परिवार में पहले कोई सेना में नहीं रहा।
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सहारनपुर। ‘द्रास सेक्टर में हमारी तैनाती थी। दुश्मन ऊंची पहाड़ी पर था और मशीनगन से लैस था। मगर भारतीय सैनिकों का हौसला इतना मजबूत था कि ऊंची पहाड़ियां चढ़ते जा रहे थे। दुश्मन की तरफ से फायर किए जा रहे थे, मगर सैनिकों को मौत का जैसे कोई भय ही नहीं था। भारतीय सेना के इसी साहस ने कारगिल में विजय दिलाई’। यह कहना है सेना में कर्नल रहे मधुर गोयल का।
सहारनपुर स्थित न्यू आवास विकास कालोनी में रहने वाले कर्नल मधुर गोयल 31 अक्तूबर 2017 को सेवानिवृत्त हुए थे। कारगिल युद्ध में हिस्सा लेने और अन्य मोर्चों पर बहादुरी का परिचय देने के चलते ही उन्हें सेना मेडल (वीरता) से सम्मानित किया गया। उन्होंने बताया कि वह आर्मी में जाट रेजीमेंट के साथ संबद्ध थे। कारगिल युद्ध के दौरान उनकी तैनाती कश्मीर के द्रास इलाके में थी। भारत के वीर जवानों ने पाकिस्तान की तरफ से आए 10 आतंकियों को मार गिराया था। वहीं, आतंकियों के हमले में एक जवान भी शहीद हुआ था। हिमालय की पीर पंजाल रेंज में सैनिक अलर्ट मोड पर थे। एक-एक जवान जो पहाड़ पर चढ़ रहा था, उसके सामने फायरिंग का खतरा था। रास्ता भी पगडंडी वाला था, लेकिन दिल में डर कतई नहीं था। पाकिस्तान के सैनिक और आतंकियों के पास मशीनगन थीं। भारतीय सैनिक घबराए नहीं थे, मुंहतोड़ जवाब दिया था।
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घर बात करने की फुर्सत ही नहीं होती थी
कर्नल मधुर गोयल का कहना है कि कारगिल युद्ध के दौरान काफी दिन तक इतने व्यस्त रहे थे कि घर पर बात करने के हालात नहीं होते थे। वैसे भी घर वालों से बात करके कमजोरी पैदा होने का डर रहता था। लड़ाई में हौसला कम न हो, लिहाजा ऑपरेशन खत्म होने पर ही बात होती थी।
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बेटी सिंगापुर में कर रही पढ़ाई, बेटा बैंक में कार्यरत
कर्नल मधुर गोयल ने बताया कि वह मूलरूप से सहारनपुर के ही रहने वाले हैं। परिवार में उनकी बेटी सिंगापुर में मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रही है और टॉपर बनी है। वहीं, उनका बेटा बैंक में नौकरी कर रहा है। परिवार में पहले कोई सेना में नहीं रहा।