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Saharanpur News: रेहड़े खरीदकर इस्तेमाल करना भूला निगम, बन गए कबाड़
Sun, 19 Jan 2025 12:41 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sun, 19 Jan 2025 12:41 AM IST
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सहारनपुर। घरों से कचरा इकट्ठा करने के लिए लाखों रुपये से खरीदे गए रेहड़ों को नगर निगम इस्तेमाल करना भूल गया। नतीजा, अनेक रेहड़े बीते दो साल से नगर निगम में खुले में खड़े-खड़े कचरा हो गए हैं। कुछ का सामान भी निकाल लिया गया है।
करीब दो वर्ष पहले नगर निगम ने घर-घर से कचरा इकट्ठा करने के लिए रेहड़े खरीदे थे। करीब 700 रेहड़े खरीदे गए थे और प्रत्येक रेहड़े की कीमत सात हजार रुपये थी।
लाखों रुपये से खरीदे गए रेहड़े सफाईकर्मियों को वितरित किए जाने थे, लेकिन रेहड़ों की गुणवत्ता पर सवाल उठने की वजह से कई महीने तक यह रेहड़े नगर निगम परिसर में खुले में खड़े रहे। इसके बाद आपूर्ति करने वाली फर्म ने रेहड़ों में कुछ सुधार कराया, जिसके बाद भी रेहड़े कई महीने तक खुले में धूप और बारिश में ऐसे ही खड़े रहे।
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इसके बाद रेहड़ों का वितरण सफाईकर्मियों को किया गया, लेकिन बड़ी संख्या में रेहड़े आज भी नगर निगम के पार्क में खड़े हैं, जिनमें से ज्यादातर जंग खा चुके हैं। कुछ के पहिए और अन्य सामान निकाल लिया गया है। यानी बिना इस्तेमाल के वह कचरा बन गए हैं। सवाल यह है कि यदि इतने रेहड़ों की जरूरत नहीं थी तो खरीदे किसलिए थे। लोग इसे जनता के पैसे की बर्बादी मान रहे हैं।
करीब दो वर्ष पहले नगर निगम ने घर-घर से कचरा इकट्ठा करने के लिए रेहड़े खरीदे थे। करीब 700 रेहड़े खरीदे गए थे और प्रत्येक रेहड़े की कीमत सात हजार रुपये थी।
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लाखों रुपये से खरीदे गए रेहड़े सफाईकर्मियों को वितरित किए जाने थे, लेकिन रेहड़ों की गुणवत्ता पर सवाल उठने की वजह से कई महीने तक यह रेहड़े नगर निगम परिसर में खुले में खड़े रहे। इसके बाद आपूर्ति करने वाली फर्म ने रेहड़ों में कुछ सुधार कराया, जिसके बाद भी रेहड़े कई महीने तक खुले में धूप और बारिश में ऐसे ही खड़े रहे।
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इसके बाद रेहड़ों का वितरण सफाईकर्मियों को किया गया, लेकिन बड़ी संख्या में रेहड़े आज भी नगर निगम के पार्क में खड़े हैं, जिनमें से ज्यादातर जंग खा चुके हैं। कुछ के पहिए और अन्य सामान निकाल लिया गया है। यानी बिना इस्तेमाल के वह कचरा बन गए हैं। सवाल यह है कि यदि इतने रेहड़ों की जरूरत नहीं थी तो खरीदे किसलिए थे। लोग इसे जनता के पैसे की बर्बादी मान रहे हैं।