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Saharanpur News: मीरपुर गंदेवड़ में साढ़े चार दशक तक चौधरी परिवार ने की निर्विरोध प्रधानी
Tue, 08 Jul 2025 12:31 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Tue, 08 Jul 2025 12:31 AM IST
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बेहट। ग्राम पंचायत मीरपुर गंदेवड़ में साढ़े चार दशक तक चौधरी परिवार ने निर्विरोध प्रधानी की। पहले दादा और फिर मां निर्विरोध प्रधान बनीं और इनके बाद बेटों ने चुनाव जीतकर प्रधानी की कमान संभाली। गत चुनाव में पंचायत की सत्ता हाथ से निकली, तो विश्वास चौधरी ने ब्लाॅक प्रमुखी का चुनाव जीत अपने परिवार की चौधराहट कायम रखी।
ब्लॉक साढ़ौली कदीम की ग्राम पंचायत मीरपुर गंदेवड़ में सबसे पहले चौधरी मामचंद सिंह प्रधान बने थे। बैलेट की व्यवस्था नहीं थी तो हाथ उठाकर प्रधान चुन लिया जाता था। इसलिए गांव के बड़े जमींदार और अच्छी सामाजिक छवि के चलते लोगों के बीच चौधरी मामचंद की मजबूत पकड़ रहती थी। इसलिए कोई उनके विरोध में नहीं आया। वह 40 साल तक गांव के निर्विरोध प्रधान बनते रहे। इसके बाद आरक्षण लागू होने से चुनाव भी हुए, जिनमें उनके समर्थन से दूसरे लोग भी प्रधान बने, लेकिन 2005 में चौधरी मामचंद की पुत्रवधू कमला देवी का नाम जैसे ही प्रधानी के लिए तय हुआ तो किसी ने उनके सामने नामांकन नहीं किया और वह भी निर्विरोध प्रधान चुनी गईं।
इसके बाद वर्ष 2010 के चुनाव में कमला देवी के बड़े बेटे चौधरी सुभाष सिंह ने भारी मतों से प्रधानी का चुनाव जीता। वर्ष 2015 में कमला देवी के छोटे बेटे चौधरी विश्वास सिंह ने प्रधानी का चुनाव जीतकर चौधरी परिवार का वर्चस्व कायम रखा। 2021 में हुए चुनाव में इस परिवार के हाथ से ग्राम पंचायत की सत्ता निकल गई। चौधरी विश्वास सिंह चुनाव हारे तो उन्होंने ब्लॉक प्रमुखी चुनाव में किस्मत आजमाई। विश्वास चौधरी ने चुनाव जीत परिवार का चौधराहट को कायम रखा।
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मिश्रित आबादी करती है निवास
मीरपुर गंदेवड़ ब्लॉक साढ़ौली कदीम की महत्वपूर्ण और साधन संपन्न ग्राम पंचायत है। 3150 की आबादी वाली यह ग्राम पंचायत दिल्ली-यमुनोत्री हाईवे किनारे बसी है। इस पंचायत में मिश्रित आबादी है। इसमें गुर्जर, ब्राह्मण, वैश्य, अनुसूचित जाति, सैनी और मुस्लिम समुदाय की कई बिरादरी के लोग निवास करते है।
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परिवार ने पहले गांव में सेवा और विकास किया। अब क्षेत्र की जनता ने प्रमुख बनाया है तो पूरे ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में विकास कार्य कराने का मौका मिल रहा है। लोगों की समस्याओं का समाधान कराने के साथ ही विकास कार्यों में कोई कमी नहीं छोड़ी गई है।
- चौधरी विश्वास सिंह, ब्लॉक प्रमुख
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एक बड़े और राजनीतिक परिवार को छोड़कर ग्रामीणों ने उन पर विश्वास किया और उन्हें प्रधान बनाया। गांव के विकास और ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करने में उनकी तरफ से कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही है।
-विनोद सैनी उर्फ भोला, ग्राम प्रधान
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ब्लॉक साढ़ौली कदीम की ग्राम पंचायत मीरपुर गंदेवड़ में सबसे पहले चौधरी मामचंद सिंह प्रधान बने थे। बैलेट की व्यवस्था नहीं थी तो हाथ उठाकर प्रधान चुन लिया जाता था। इसलिए गांव के बड़े जमींदार और अच्छी सामाजिक छवि के चलते लोगों के बीच चौधरी मामचंद की मजबूत पकड़ रहती थी। इसलिए कोई उनके विरोध में नहीं आया। वह 40 साल तक गांव के निर्विरोध प्रधान बनते रहे। इसके बाद आरक्षण लागू होने से चुनाव भी हुए, जिनमें उनके समर्थन से दूसरे लोग भी प्रधान बने, लेकिन 2005 में चौधरी मामचंद की पुत्रवधू कमला देवी का नाम जैसे ही प्रधानी के लिए तय हुआ तो किसी ने उनके सामने नामांकन नहीं किया और वह भी निर्विरोध प्रधान चुनी गईं।
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इसके बाद वर्ष 2010 के चुनाव में कमला देवी के बड़े बेटे चौधरी सुभाष सिंह ने भारी मतों से प्रधानी का चुनाव जीता। वर्ष 2015 में कमला देवी के छोटे बेटे चौधरी विश्वास सिंह ने प्रधानी का चुनाव जीतकर चौधरी परिवार का वर्चस्व कायम रखा। 2021 में हुए चुनाव में इस परिवार के हाथ से ग्राम पंचायत की सत्ता निकल गई। चौधरी विश्वास सिंह चुनाव हारे तो उन्होंने ब्लॉक प्रमुखी चुनाव में किस्मत आजमाई। विश्वास चौधरी ने चुनाव जीत परिवार का चौधराहट को कायम रखा।
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मिश्रित आबादी करती है निवास
मीरपुर गंदेवड़ ब्लॉक साढ़ौली कदीम की महत्वपूर्ण और साधन संपन्न ग्राम पंचायत है। 3150 की आबादी वाली यह ग्राम पंचायत दिल्ली-यमुनोत्री हाईवे किनारे बसी है। इस पंचायत में मिश्रित आबादी है। इसमें गुर्जर, ब्राह्मण, वैश्य, अनुसूचित जाति, सैनी और मुस्लिम समुदाय की कई बिरादरी के लोग निवास करते है।
परिवार ने पहले गांव में सेवा और विकास किया। अब क्षेत्र की जनता ने प्रमुख बनाया है तो पूरे ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में विकास कार्य कराने का मौका मिल रहा है। लोगों की समस्याओं का समाधान कराने के साथ ही विकास कार्यों में कोई कमी नहीं छोड़ी गई है।
- चौधरी विश्वास सिंह, ब्लॉक प्रमुख
एक बड़े और राजनीतिक परिवार को छोड़कर ग्रामीणों ने उन पर विश्वास किया और उन्हें प्रधान बनाया। गांव के विकास और ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करने में उनकी तरफ से कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही है।
-विनोद सैनी उर्फ भोला, ग्राम प्रधान