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खास खबर, शोभायात्रा के पक्ष में नहीं थे गांव के लोग

Sun, 23 Apr 2017 12:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर Updated Sun, 23 Apr 2017 12:28 AM IST
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Special news, people of the village were not in favor of Shobhayatra
बवाल के बाद बंद पड़ा स्कूल। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर में सड़क दूधली में बाबा साहब डा. भीमराव अंबेडकर की शोभायात्रा पर हुए पथराव के बाद सांप्रदायिक उपद्रव के पीछे खुराफातियों की साजिश से इनकार नहीं किया जा सकता।
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20 अप्रैल को निकाली गई बिना अनुमति की शोभायात्रा के पक्ष में गांव के ज्यादातर लोग नहीं थे। सबसे बड़ी बात यह है कि गांव में 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती मनाई गई थी और उस वक्त दूसरे समुदाय के लोगों को ऐतराज नहीं हुआ था।
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गांव की अंबेडकर सेवा समिति भी किसी शोभायात्रा के पक्ष में नहीं थी। मगर, 20 अप्रैल को शोभायात्रा को लेकर कड़े विरोध के पीछे के भाजपाइयों की मौजूदगी को कारण माना जा रहा है।
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इतना ही नहीं, एलआईयू ने भी 18 अप्रैल को भेजी अपनी रिपोर्ट में शोभायात्रा में जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी से तनाव की आशंका व्यक्त की थी। इस पूरे उपद्रव के पीछे दोनों पक्षों में बाहरियों की मौजूदगी भी बड़ा कारण रही है। 

 बिना अनुमति अंबेडकर शोभायात्रा को लेकर हुए सांप्रदायिक उपद्रव के बाद अब शुरु हुई पड़ताल में इसका बड़ा कारण बाहरियों को माना जा रहा है। अब तक की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि गांव में भाजपाइयों की मौजूदगी में निकाली जाने वाली शोभायात्रा के विरोध में दूसरे समुदाय के लोग एकजुट हो गए थे।

उधर, भाजपाइयों के साथ पहुंची भीड़ और नारेबाजी से तनाव की स्थिति बन गई थी। सबसे बड़ी बात यह है कि शोभायात्रा में गांव के लोगों की नगण्य थी।  20 अप्रैल को निकलने वाली शोभायात्रा पूर्व योजित और भारी संख्या में भाजपा नेताओं की मौजूदगी के कारण दूसरे समुदाय के लोगों में भी इसे भाजपा के कार्यक्रम के रुप में प्रचारित किया गया। 


आपको बता दें कि शोभायात्रा निकालने के लिए अनुमति मांगी गई थी। मगर, प्रशासन का दावा था कि गांव के अंबेडकर भवन में 14 अप्रैल केे गोष्ठी कर जयंती मनाई जा चुकी है।

गांव के दलित समाज के रजनीश, रविकुमार, अंकित, राहुल, शुभम सहित अन्य लोगों ने बताया कि शोभायात्रा के कार्यक्रम में स्थानीय लोगों की भूमिका नहीं थी।
 
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