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Saharanpur News: पीकू वार्ड में शिफ्ट होगा महिला अस्पताल का एसएनसीयू
Mon, 15 Jan 2024 02:41 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Mon, 15 Jan 2024 02:41 AM IST
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सहारनपुर। जिला महिला अस्पताल में नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) को जल्द ही पीकू वार्ड में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। इससे पहले पीकू वार्ड में सभी व्यवस्थाओं को परखा जाएगा। एसएनसीयू में अलग केबिन, नई टाइल्स बिछाने और बिजली संबंधित काम होंगे। इसकी तैयारी अस्पताल प्रबंधन ने पूरी कर ली है।
जिला अस्पताल में नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) बच्चों के लिए संजीवनी साबित हो रही है। इसमें रोजाना चार से छह नवजात शिशु भर्ती होते हैं। एसएनसीयू 14 बेड का है। इसमें बीमार नवजात शिशुओं को भर्ती किया जाता है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनदीप सिंह ने बताया कि एसएनसीयू में 0-28 दिन के वह नवजात भर्ती किए जाते हैं, जो बीमार होते हैं। एसएनसीयू में नवजात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और निजी अस्पतालों से रेफर होकर आते हैं।
कुछ नवजात महिला अस्पताल के प्रसव कक्ष से रेफर किए जाते हैं, जो पैदा होने के बाद रोते नहीं हैं या जो समय से पहले पैदा हो जाते हैं। नवजात बुखार, खांसी व निमोनिया से ग्रसित होते हैं, उनको भी भर्ती किया जाता है। अब एसएनसीयू में कुछ जरूरी काम होने हैं। इसके लिए एसएनसीयू को पीकू वार्ड में स्थानांतरित किया जाएगा। इससे पहले स्वास्थ्य अधिकारी, चिकित्सक पीकू वार्ड में तीन से चार दिन ट्रायल के तौर पर सुविधाओं को परखेंगे।
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एसएनसीयू में टाइल्स बिछाने और बिजली संबंधित काम कराएं जाएंगे। इसलिए एसएनसीयू को पीकू वार्ड में शिफ्ट किया जाएगा। नवजात शिशुओं को कोई दिक्कत न आए। इससे पूर्व पीकू वार्ड में सभी सुविधाओं को देखा जाएगा। एक सप्ताह के अंदर एसएनसीयू शिफ्ट कर देंगे।
- डॉ. इंद्रा सिंह, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल
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जिला अस्पताल में नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) बच्चों के लिए संजीवनी साबित हो रही है। इसमें रोजाना चार से छह नवजात शिशु भर्ती होते हैं। एसएनसीयू 14 बेड का है। इसमें बीमार नवजात शिशुओं को भर्ती किया जाता है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनदीप सिंह ने बताया कि एसएनसीयू में 0-28 दिन के वह नवजात भर्ती किए जाते हैं, जो बीमार होते हैं। एसएनसीयू में नवजात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और निजी अस्पतालों से रेफर होकर आते हैं।
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कुछ नवजात महिला अस्पताल के प्रसव कक्ष से रेफर किए जाते हैं, जो पैदा होने के बाद रोते नहीं हैं या जो समय से पहले पैदा हो जाते हैं। नवजात बुखार, खांसी व निमोनिया से ग्रसित होते हैं, उनको भी भर्ती किया जाता है। अब एसएनसीयू में कुछ जरूरी काम होने हैं। इसके लिए एसएनसीयू को पीकू वार्ड में स्थानांतरित किया जाएगा। इससे पहले स्वास्थ्य अधिकारी, चिकित्सक पीकू वार्ड में तीन से चार दिन ट्रायल के तौर पर सुविधाओं को परखेंगे।
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एसएनसीयू में टाइल्स बिछाने और बिजली संबंधित काम कराएं जाएंगे। इसलिए एसएनसीयू को पीकू वार्ड में शिफ्ट किया जाएगा। नवजात शिशुओं को कोई दिक्कत न आए। इससे पूर्व पीकू वार्ड में सभी सुविधाओं को देखा जाएगा। एक सप्ताह के अंदर एसएनसीयू शिफ्ट कर देंगे।
- डॉ. इंद्रा सिंह, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल