{"_id":"608fc850c8230824ce7f127d","slug":"senior-master-of-darul-uloom-maulana-noor-alam-khalil-amini-is-death-in-saharanpur-at-today","type":"story","status":"publish","title_hn":"देवबंद: नहीं रहे दारुल उलूम के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना नूर आलम, दुनिया भर में था बड़ा नाम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
देवबंद: नहीं रहे दारुल उलूम के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना नूर आलम, दुनिया भर में था बड़ा नाम
Mon, 03 May 2021 04:13 PM IST
कपिल kapil
अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर
अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर
Published by: कपिल kapil
Updated Mon, 03 May 2021 04:13 PM IST
सार
इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम के वरिष्ठ उस्ताद व अरबी भाषा के बड़े विद्वान मौलाना नूर आलम खलील अमीनी का लंबी बीमारी के बाद इंतकाल हो गया। वे 70 वर्ष के थे। उनके इंतकाल की खबर से इस्लामिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई।
विज्ञापन
दारुल उलूम के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना नूर आलम का फाइल फोटो।
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम के वरिष्ठ उस्ताद व अरबी भाषा के बड़े विद्वान मौलाना नूर आलम खलील अमीनी का लंबी बीमारी के बाद इंतकाल हो गया। वे 70 वर्ष के थे। उनके इंतकाल की खबर से इस्लामिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। देश ही नहीं दुनिया भर में मौलाना अमीनी के हजारों शागिर्द हैं।
विज्ञापन
मूलरूप से बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी मौलाना नूर आलम खलील अमीनी दारुल उलूम में वरिष्ठ उस्ताद होने के साथ-साथ अरबी के बड़े विद्वानों में शामिल थे। वे पिछले काफी दिनों से बीमार थे। मेरठ के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। रविवार की देर रात उनकी तबीयत बिगड़ गई, उन्हें चिकित्सक के यहां ले जाया जाता उससे पहले ही उनकी मौत हो गई। मौलाना अमीनी के इंतकाल की खबर से इस्लामिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। देखते ही देखते लोगों की भीड़ अफ्रीकी मंजिल स्थित उनके आवास पर जमा हो गई।
विज्ञापन
18 दिसंबर 1952 को बिहार में जन्मे मौलाना नूर आलम खलील अमीनी का दुनिया के इस्लामिक जगत में बड़ा नाम था। उनके दुनिया भर में हजारों शागिर्द हैं। दारुल उलूम में अरबी साहित्य के शिक्षक मौलाना अमीनी की पुस्तक मुफ्ता अल-अरबिया विभिन्न मदरसों में दर्स निजामी के पाठ्यक्रम में शामिल है। अरबी भाषा में सराहनीय सेवाओं के लिए मौलाना नूर आलम खलील अमीनी को वर्ष 2018 में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने विशेष सम्मान से नवाजा था।
विज्ञापन
उनके इंतकाल पर दारुल उलूम के मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी, नायाब मोहतमिम मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासी, जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी, महासचिव मौलाना महमूद मदनी, दारुल उलूम वक्फ के मोहतमिम मौलाना सुफियान कासमी, मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर, मौलाना अहमद खिजर शाह मसूदी, मौलाना शकेब कासमी ने गहरा दुख जताया है।
ये भी पढ़ें
. UP Panchayat Chunav Result 2021: भाजपा-सपा और बसपा प्रत्याशियों में चल रही कांटे की टक्कर, जानें- कौन कहां से आगे
. मेरठ: युवती से प्रेम प्रसंग के चलते मारी गई थी राजा को गोली, पुलिस ने हमलावरों को धर दबोचा