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खेती के साथ निभा रहीं परिवार और समाज का दायित्व

Wed, 13 Oct 2021 11:45 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 13 Oct 2021 11:45 PM IST
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Responsibility of family and society fulfilling with farming
- सविता देवी, ग्राम प्रधान, चकवाली - फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। ग्रामीण परिवेश में पैदा हुई और शहरी माहौल सरीखी पढ़ाई नहीं हुई, लेकिन इनमें जज्बा है समाज के लिए कुछ अच्छा करने की। परिवार और सामाजिक जिम्मेदारी का भी खूब ख्याल रखती हैं। ऐसी हैं गांव की जागरूक महिलाएं। कोई प्रधान बन समाजसेवा का संकल्प लेकर अनूठी मुहिम चला रही है तो कोई खेती करते हुए परिवार और समाज के प्रति अपने दायित्व निभा रही है। पेश है जिले की ऐसी महिलाओं पर आधारित रिपोर्ट...
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पर्यावरण की शुद्धता को चलाई पौधे लगाने की मुहिम
रामपुर मनिहारान। ग्राम पंचायत चकवाली की प्रधान सविता ने अनूठी मुहिम शुरू कराई। इसे नाम दिया गया सेल्फी विद ट्री। ऐसा करके लोगों को पौधरोपण के लिए प्रेरित किया। आज वह करीब ढाई हजार पौधों का रोपण ग्राम पंचायत में करा चुकी हैं। ग्राम प्रधान सविता ने बताया कि पर्यावरण को शुद्ध बनाने के लिए पौधों का संरक्षण और पौधरोपण जरूरी है। पौधे कभी बेवफा नहीं होते, वह दूसरों को कुछ देते ही हैं। कोरोना काल में लोगों ने ऑक्सीजन की कमी का अहसास न सिर्फ महसूस किया, बल्कि उसकी कीमत का अंदाज भी लगाया, इसलिए जरूरी है कि ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाए जाएं। उन्होंने गांव में लोगों से अपील की है कि परिवार के किसी सदस्य के जन्मदिन, शादी की वर्षगांठ अथवा पितरों के नाम पर पौधे लगाकर उनका संरक्षण करें। इसके लिए उनके बेटे नकुल ने पोर्टल भी बनाया है, जिससे काफी लोगों को जोड़ा है।
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पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने को करती हैं भागदौड़
चिलकाना। गांव सुल्तानपुर निवासी साधारण परिवार में जन्मी सुरेशो सैनी लघु किसान है। खेती किसानी के साथ ही उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में अपनी पहचान बनाई है। 48 वर्षीय सुरेशो बहुत कम पढ़ी लिखी हैं, लेकिन अपनी मेहनत के बलबूते अपने बेटे को उच्च शिक्षा दिलवा रही हैं। पिता की मौत के बाद से वह मायके में ही रहकर अपनी मां की भी जिम्मेदारी उठा रही हैं। सामाजिक संस्था दिशा में लंबे समय से स्वयं सहायता समूह, महिला सुरक्षा तथा उनके हितों के लिए कार्य कर रही हैं। घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए थाने से कचहरी तक भागदौड़ करती हैं। सुरेशो ने 15 वर्ष तक स्वयं सहायता समूहों को बनवाकर उनके द्वारा महिलाओं को रोजगार से जोड़ा है। वर्तमान में अपनी छह बीघा जमीन में बाग लगाकर उसकी देखभाल भी सुरेशो खुद ही करती हैं। सुरेशो कहती हैं कि यदि महिला चाहे तो हर कठिन कार्य कर सकती है।
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बड़ी सोच के साथ बन गई मशरूम उत्पादक
बेहट। मुर्तजापुर गांव निवासी पूजा ने मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है। ब्लॉक साढ़ौली कदीम क्षेत्र के गांव मुर्तजापुर निवासी पूजा सामान्य गृहिणी हैं। पति हिमांशु लघु किसान हैं। वर्ष 2019 में पूजा स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह के माध्यम से कृषि विज्ञान केंद्र सहारनपुर जाने का मौका मिला। यहां डॉ. आईके कुशवाहा से पूजा को मशरूम उत्पादन के तौर तरीकों की जानकारी मिली। पूजा ने बताया कि खुद को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही परिवार की आय बढ़ाने की ठान ली और मशरूम उत्पादन में हाथ आजमाया। वर्तमान में पूजा मशरूम की दो किस्मों के उत्पादन कर रही है। साल में 100 क्विंटल से अधिक मशरूम का उत्पादन कर लाखों रुपये कमा रही हैं। पूजा ने बताया कि वह मशरूम की तीसरी प्रजाति गेनोड्रमा के उत्पादन पर प्रयोग कर रही हैं। मशरूम की यह प्रजाति कैंसर की दवाई बनाने के काम आती है। इसके उत्पादन से उसे और अधिक मुनाफा होगा।

मशरुम के साथ पूजा

मशरुम के साथ पूजा- फोटो : SAHARANPUR

सुरेशो

सुरेशो- फोटो : SAHARANPUR

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