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प्रशासन को नहीं मिल रहे गरीब
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Wed, 24 Aug 2016 12:25 AM IST
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awas yojna
- फोटो : ब्यूरो
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सहारनपुर जिले में काफी तलाश करने पर भी प्रशासन को गरीब नहीं मिल पा रहे हैं। पूरे जिले में अधिकारियों को सिर्फ 436 लोग ही ऐसे मिल सके हैं, जिनके पास अपना घर नहीं हैं और गरीब हैं।
जबकि शासन ने 770 गरीबों के लिए लोहिया आवासों के निर्माण के लिए 10.56 करोड़ रुपये की पहली किश्त जारी भी कर दी है। जिस कारण अब 334 आवासों का बजट वापस जाएगा।
ऐसा नहीं है कि जिले में गरीब न हों। ऐसा भी नहीं है कि अब सबके अपने मकान बन चुके है। लेकिन प्रशासन की नजर में जिले में 436 के अलावा कोई गरीब नहीं बचा है कि जिसका मकान बनाने के लिए सरकार से बजट दिला सकें।
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यहां तक कि जो बजट सरकार द्वारा जारी किया गया है अब उसके लिए भी गरीब नहीं मिल पा रहे हैं। प्रदेश सरकार द्वारा जिले में लोहिया आवासों के निर्माण केे लिए पहली किश्त के रूप में 10 करोड़ 58 लाख 75000 रुपये जारी किए हैं।
यह बजट शासन ने 770 लोगों के लोहिया आवासों के लिए जारी किया है। लेकिन अभी तक आवासों के लिए पूरे जिले में सिर्फ 436 लोग ही पात्र मिल सके हैं।
प्रशासन द्वारा लोहिया आवासों के लिए तैयार की गई सूची सिर्फ मजाक बनकर रह गई है। सूची से साफ पता चल रहा है कि न तो सही तरह से सर्वे किया गया है और न ही पारदर्शिता बरती गई है।
अन्यथा ऐसा नहीं होता कि एक पूरे गांव में एक भी गरीब न मिलें। एक गांव में एक भी गरीब मिल जाता तो कम से कम 1249 गरीब तो सूची में दर्ज होते।
गरीब नहीं मिले तो वापस जाएगा बजट
प्रशासनिक अधिकारियों को जिले में गरीब नहीं मिल पा रहे हैं। जबकि शासन ने 770 आवासों के लिए पहली किश्त जारी कर दी है। अधिकारी और गरीब तलाश नहीं कर पाए तो 334 आवासों का बजट वापस जा सकता है।
नियमानुसार ही किया गया है चयन
जिला ग्राम्य विकास अधिकारी के परियोजना निदेशक चंद्रशेखर का कहना है कि लोहिया आवासों के लिए नियमानुसार ही पात्रों का चयन किया गया है। अभी और पात्र नहीं मिल सके हैं।
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जबकि शासन ने 770 गरीबों के लिए लोहिया आवासों के निर्माण के लिए 10.56 करोड़ रुपये की पहली किश्त जारी भी कर दी है। जिस कारण अब 334 आवासों का बजट वापस जाएगा।
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ऐसा नहीं है कि जिले में गरीब न हों। ऐसा भी नहीं है कि अब सबके अपने मकान बन चुके है। लेकिन प्रशासन की नजर में जिले में 436 के अलावा कोई गरीब नहीं बचा है कि जिसका मकान बनाने के लिए सरकार से बजट दिला सकें।
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यहां तक कि जो बजट सरकार द्वारा जारी किया गया है अब उसके लिए भी गरीब नहीं मिल पा रहे हैं। प्रदेश सरकार द्वारा जिले में लोहिया आवासों के निर्माण केे लिए पहली किश्त के रूप में 10 करोड़ 58 लाख 75000 रुपये जारी किए हैं।
यह बजट शासन ने 770 लोगों के लोहिया आवासों के लिए जारी किया है। लेकिन अभी तक आवासों के लिए पूरे जिले में सिर्फ 436 लोग ही पात्र मिल सके हैं।
प्रशासन द्वारा लोहिया आवासों के लिए तैयार की गई सूची सिर्फ मजाक बनकर रह गई है। सूची से साफ पता चल रहा है कि न तो सही तरह से सर्वे किया गया है और न ही पारदर्शिता बरती गई है।
अन्यथा ऐसा नहीं होता कि एक पूरे गांव में एक भी गरीब न मिलें। एक गांव में एक भी गरीब मिल जाता तो कम से कम 1249 गरीब तो सूची में दर्ज होते।
गरीब नहीं मिले तो वापस जाएगा बजट
प्रशासनिक अधिकारियों को जिले में गरीब नहीं मिल पा रहे हैं। जबकि शासन ने 770 आवासों के लिए पहली किश्त जारी कर दी है। अधिकारी और गरीब तलाश नहीं कर पाए तो 334 आवासों का बजट वापस जा सकता है।
नियमानुसार ही किया गया है चयन
जिला ग्राम्य विकास अधिकारी के परियोजना निदेशक चंद्रशेखर का कहना है कि लोहिया आवासों के लिए नियमानुसार ही पात्रों का चयन किया गया है। अभी और पात्र नहीं मिल सके हैं।