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नए पाठ्यक्रम के साथ बदला नजर आएगा भौतिक परिवेश

Sun, 14 Mar 2021 11:10 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 14 Mar 2021 11:10 PM IST
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Physical environment will be changed with new curriculum
सहारनपुर। परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में एक अप्रैल से शुरू हो रहे नए सत्र को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। एक ओर जहां करीब तीन दशक बाद विद्यार्थी नए पाठ्यक्रम से रूबरू होंगे, वहीं विद्यालयों का भौतिक परिवेश भी पूरी तरह बदला नजर आएगा। इसकी तैयारियों में विभागीय अधिकारियों के साथ ही शिक्षक भी जुटे हुए हैं। पेश है रिपोर्ट...
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कक्षा एक में नया पाठ्यक्रम
करीब तीन दशक बाद कक्षा एक का पाठ्यक्रम बदला गया है। कक्षा एक में अभी तक पढ़ाई जा रही कलरव किताब को रिप्लेस कर एनसीईआरटी की नई किताबें पाठ्यक्रम में लाई गई हैं। इन किताबों की खास बात यह है कि प्रत्येक अध्याय पर बार कोड दर्ज है, जिसको दिशा एप के जरिए स्केन कर अध्याय को ऑनलाइन भी पढ़ा जा सकता है। जिससे बच्चे अध्याय को आसानी से समझ सकते हैं।
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शिक्षकों को दिया जा रहा प्रशिक्षण
एनसीईआरटी की आधुनिक किताबों को कैसे पढ़ाना है? इसे लेकर इन दिनों जनपद में मास्टर ट्रेनर्स के द्वारा सभी शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि नई किताबों को लेकर बच्चों के साथ ही शिक्षकों के सामने भी कठिनाई आ सकती हैं। ऐसे में एक अप्रैल से पहले शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे भविष्य में कोई कठिनाई ना आए। इसके अलावा मिशन प्रेरणा को लागू करने के लिए आधारशिला क्रियान्वयन संदर्शिका का प्रशिक्षण भी चल रहा है, जो अंतिम दौर में है। आधारशिला में कक्षा एक से पांच तक का पूरा सैट है, जिसके लिए शिक्षकों को आधारशिला, ध्यानाकर्षण और शिक्षण संग्रह संदर्शिका उपलब्ध कराई गई हैं। इनमें कक्षा एक से पांच तक का पूरे साल का कार्यक्रम है कि बच्चों को कैसे पढ़ाना है।
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बदला जा रहा भौतिक परिवेश
मिशन प्रेरणा के ही तहत सभी परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों का भौतिक परिवेश बदला जा रहा है। इसके लिए मिशन कायाकल्प चल रहा है। इसमें 14 बिंदू दिए गए हैं, जिनमें शौचालयों में रनिंग वाटर व्यवस्था, मल्टीपल हैंडवॉश व्यवस्था, कक्षाओं में व्हाइट बोर्ड, कक्षों और रसोई के फर्श पर टाइल्स बिछवाना, विद्यालय परिसर में खुले स्थान पर इंटरलॉकिंग टाइल्स लगवाना, प्रत्येक कक्ष में पंखा और प्रकाश के लिए लाइट की व्यवस्था, पूरे विद्यालय की रंगाई-पुताई, यदि विद्यालय ऊंचाई पर है तो रैंप की व्यवस्था, शुद्ध पेयजल आदि शामिल हैं। एक तरह से विद्यालयों को आकर्षक बनाया जा रहा है, जिससे कि बच्चों के साथ ही अभिभावक भी आकर्षित हों।

नए सत्र को लेकर विभाग तैयारी में जुटा है। 90 फीसदी विद्यालयों में मिशन कायाकल्प के तहत कार्य पूर्ण कर लिए गए हैं, जबकि शेष में इसी माह पूर्ण हो जाएंगे। इसके अलावा एनसीईआरटी का प्रशिक्षण चल रहा है। निश्चित ही नए सत्र में काफी चीजें नई देखने को मिलेंगी। प्रयास यही है कि परिषदीय विद्यालयों में पंजीकरण बढ़े और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आए।
- रमेंद्र कुमार सिंह, बीएसए।
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