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नगर निगम ने निरस्त किया राकेश का मृत्यु प्रमाणपत्र
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अमर उजाला द्वारा 24 नवंबर में प्रकाशित खबर
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। नगर निगम ने जिंदा व्यक्ति का बनाया गया मृत्यु प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया है। अमर उजाला ने 24 नवंबर के संस्करण में जिंदा व्यक्ति का मृत्यु प्रमाणपत्र बना दिए जाने का समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिसके बाद से निगम ने प्रमाणपत्र की सत्यता की पड़ताल करने के बाद निरस्तीकरण की कार्रवाई की है।
बड़गांव क्षेत्र के गांव नूनाबड़ी निवासी राकेश कुमार अपना मृत्यु प्रमाणपत्र लेकर 23 नवंबर को नगर निगम पहुंचा था। उसने अधिकारियों को बताया था कि वर्ष 2012 में वह परिवार सहित शहर की रक्खा कॉलोनी में रहते थे। दस जुलाई 2012 को उनके पिता हरद्वारी का निधन हो गया था। पिता की मृत्यु के बाद वह काम के लिए बाहर चला गया था। कुछ माह बाद जब वह लौटा तो पता चला कि उसके भाई ने उसके हिस्से की भी जमीन अपने नाम करा ली है। जब उसने तहसील से कागज निकलवाए तो वहां उसका मृत्यु प्रमाणपत्र लगा पाया गया, जो नगर निगम ने 31 अक्तूबर 2012 को जारी किया गया था। मृत्यु प्रमाणपत्र का क्रमांक संख्या 2576 है, जिसमें राकेश कुमार पुत्र हरद्वारी निवासी खाताखेड़ी लिखा है। पीड़ित का आरोप था कि उस समय जन्म एवं मृत्य प्रमाण पत्र विभाग में कर्मचारियों ने उसके भाई के साथ मिलकर साज कर फर्जी प्रमाणपत्र जारी किया है। पीड़ित ने दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने तथा मृत्यु प्रमाणपत्र रद्द करने की मांग की है। राकेश के सामने आने के बाद नगर निगम ने अपना रिकॉर्ड खंगाला था, जिसमें राकेश कुमार के मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए उनकी मां की ओर से शपथ पत्र दिया जाना पाया गया था। इसके बाद नगर निगम ने मृत्यु प्रमाण पत्र लेकर निगम पहुंचे व्यक्ति की पड़ताल कराई कि वह वही राकेश है, जिसके नाम का प्रमाण पत्र बना है या कोई अन्य व्यक्ति? । तमाम पड़ताल और औपचारिकताओं में शिकायत सही पाई गई, जिसके बाद निगम ने मृत्यु प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया है।
राकेश नाम का आरोप था कि उसके परिवार वालों ने ही गलत तरीके से उसका मृत्यु प्रमाणपत्र बनवा दिया है, जबकि वह जिंदा है। मामला वर्ष 2012 का था, जिसकी विभाग के द्वारा जांच कराई गई। तमाम औपचारिकताओं के बाद शिकायत सही पाई गई, जिसके बाद राकेश का मृत्यु प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया गया है।
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डॉ. कुनाल जैन, नगर स्वास्थ्य अधिकारी।
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बड़गांव क्षेत्र के गांव नूनाबड़ी निवासी राकेश कुमार अपना मृत्यु प्रमाणपत्र लेकर 23 नवंबर को नगर निगम पहुंचा था। उसने अधिकारियों को बताया था कि वर्ष 2012 में वह परिवार सहित शहर की रक्खा कॉलोनी में रहते थे। दस जुलाई 2012 को उनके पिता हरद्वारी का निधन हो गया था। पिता की मृत्यु के बाद वह काम के लिए बाहर चला गया था। कुछ माह बाद जब वह लौटा तो पता चला कि उसके भाई ने उसके हिस्से की भी जमीन अपने नाम करा ली है। जब उसने तहसील से कागज निकलवाए तो वहां उसका मृत्यु प्रमाणपत्र लगा पाया गया, जो नगर निगम ने 31 अक्तूबर 2012 को जारी किया गया था। मृत्यु प्रमाणपत्र का क्रमांक संख्या 2576 है, जिसमें राकेश कुमार पुत्र हरद्वारी निवासी खाताखेड़ी लिखा है। पीड़ित का आरोप था कि उस समय जन्म एवं मृत्य प्रमाण पत्र विभाग में कर्मचारियों ने उसके भाई के साथ मिलकर साज कर फर्जी प्रमाणपत्र जारी किया है। पीड़ित ने दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने तथा मृत्यु प्रमाणपत्र रद्द करने की मांग की है। राकेश के सामने आने के बाद नगर निगम ने अपना रिकॉर्ड खंगाला था, जिसमें राकेश कुमार के मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए उनकी मां की ओर से शपथ पत्र दिया जाना पाया गया था। इसके बाद नगर निगम ने मृत्यु प्रमाण पत्र लेकर निगम पहुंचे व्यक्ति की पड़ताल कराई कि वह वही राकेश है, जिसके नाम का प्रमाण पत्र बना है या कोई अन्य व्यक्ति? । तमाम पड़ताल और औपचारिकताओं में शिकायत सही पाई गई, जिसके बाद निगम ने मृत्यु प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया है।
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राकेश नाम का आरोप था कि उसके परिवार वालों ने ही गलत तरीके से उसका मृत्यु प्रमाणपत्र बनवा दिया है, जबकि वह जिंदा है। मामला वर्ष 2012 का था, जिसकी विभाग के द्वारा जांच कराई गई। तमाम औपचारिकताओं के बाद शिकायत सही पाई गई, जिसके बाद राकेश का मृत्यु प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया गया है।
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डॉ. कुनाल जैन, नगर स्वास्थ्य अधिकारी।