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Saharanpur News: मानक से अधिक सफाईकर्मी, फिर भी सफाई व्यवस्था बदहाल
Wed, 29 Nov 2023 12:40 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Wed, 29 Nov 2023 12:40 AM IST
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सहारनपुर। एक तरफ हर विभाग का रोना रहता है कि उनके पास स्टाफ की कमी है, लेकिन नगर निगम में सफाईकर्मियों की संख्या पर नजर डालें तो मानक से कहीं ज्यादा हैं। सफाईकर्मियों की संख्या ज्यादा होने के बावजूद महानगर के कई इलाके ऐसे हैं, जिसमें आज भी गंदगी के ढेर लगे रहते हैं। जिस पर किसी का ध्यान नहीं है। हाल ही में प्रमुख सचिव नगर विकास की तरफ से भी बयान दिया है कि सफाईकर्मियों की भर्ती में अब मनमानी नहीं चलेगी।
दरअसल, 70 वार्डों में 1.80 लाख भवन हैं, जिनमें करीब आठ लाख आबादी रहती है। दस हजार की आबादी पर 21 सफाईकर्मी रखने का प्रावधान है। इस लिहाज से आठ लाख की आबादी पर 1680 सफाईकर्मी होने चाहिए, लेकिन यहां करीब दो हजार सफाईकर्मी हैं। इनमें करीब 1200 ठेका कर्मचारी, करीब 450 स्थायी और शेष संविदा पर कार्यरत हैं। हैरानी की बात है कि सफाईकर्मियों की संख्या मानक से ज्यादा होने के बावजूद कुछ एरिया आज भी गंदगी से बदहाल है।
इन स्थानों पर है गंदगी के ढेर
कोर्ट रोड से सटी कॉलोनियां, दिल्ली रोड से सटी कॉलोनियों, घंटाघर के आसपास का क्षेत्र, नुमाइश कैंप क्षेत्र, हकीकतनगर क्षेत्र, माधोनगर क्षेत्र आदि ही साफ नजर आते हैं, जबकि पुराने शहर में सफाई व्यवस्था बहुत अधिक ठीक नहीं है। बाहरी कॉलोनियों और निगम के अधीन आने वाले 32 गांवों की स्थिति देखें तो वहां भी सफाई व्यवस्था को दुरुस्त नहीं कहा जा सकता। वार्ड 47 में 28 सफाईकर्मियों के सापेक्ष 17 ही तैनात हैं।
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पार्षद टिंकू अरोड़ा पांच साल से दस सफाईकर्मियों की मांग कर रहे हैं। वार्ड 44 में 17 सफाईकर्मी हैं, जबकि 11 की ओर जरूरत है। कम कर्मचारियों के कारण सफाई व्यवस्था ठीक नहीं है। प्रभारी अधिकारी कार्मिक/अपर नगरायुक्त एसके तिवारी ने बताया कि दस हजार की आबादी पर 21 सफाईकर्मी रखे जाने का प्रावधान है। नगर निगम सहारनपुर में पर्याप्त सफाईकर्मी हैं।
हर माह करीब दो करोड़ रुपये खर्च
सफाईकर्मियों के वेतन तथा नगर निगम के अधीन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, सफाई निरीक्षकों आदि के वेतन के रूप में नगर निगम प्रति माह करीब दो करोड़ रुपये खर्च करता है। इसके अलावा 120 से अधिक छोटे और बड़े वाहन भी सफाई व्यवस्था में लगे हैं, जिनके डीजल पर प्रति माह 25 से 30 लाख रुपया खर्च होता है।
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दरअसल, 70 वार्डों में 1.80 लाख भवन हैं, जिनमें करीब आठ लाख आबादी रहती है। दस हजार की आबादी पर 21 सफाईकर्मी रखने का प्रावधान है। इस लिहाज से आठ लाख की आबादी पर 1680 सफाईकर्मी होने चाहिए, लेकिन यहां करीब दो हजार सफाईकर्मी हैं। इनमें करीब 1200 ठेका कर्मचारी, करीब 450 स्थायी और शेष संविदा पर कार्यरत हैं। हैरानी की बात है कि सफाईकर्मियों की संख्या मानक से ज्यादा होने के बावजूद कुछ एरिया आज भी गंदगी से बदहाल है।
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इन स्थानों पर है गंदगी के ढेर
कोर्ट रोड से सटी कॉलोनियां, दिल्ली रोड से सटी कॉलोनियों, घंटाघर के आसपास का क्षेत्र, नुमाइश कैंप क्षेत्र, हकीकतनगर क्षेत्र, माधोनगर क्षेत्र आदि ही साफ नजर आते हैं, जबकि पुराने शहर में सफाई व्यवस्था बहुत अधिक ठीक नहीं है। बाहरी कॉलोनियों और निगम के अधीन आने वाले 32 गांवों की स्थिति देखें तो वहां भी सफाई व्यवस्था को दुरुस्त नहीं कहा जा सकता। वार्ड 47 में 28 सफाईकर्मियों के सापेक्ष 17 ही तैनात हैं।
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पार्षद टिंकू अरोड़ा पांच साल से दस सफाईकर्मियों की मांग कर रहे हैं। वार्ड 44 में 17 सफाईकर्मी हैं, जबकि 11 की ओर जरूरत है। कम कर्मचारियों के कारण सफाई व्यवस्था ठीक नहीं है। प्रभारी अधिकारी कार्मिक/अपर नगरायुक्त एसके तिवारी ने बताया कि दस हजार की आबादी पर 21 सफाईकर्मी रखे जाने का प्रावधान है। नगर निगम सहारनपुर में पर्याप्त सफाईकर्मी हैं।
हर माह करीब दो करोड़ रुपये खर्च
सफाईकर्मियों के वेतन तथा नगर निगम के अधीन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, सफाई निरीक्षकों आदि के वेतन के रूप में नगर निगम प्रति माह करीब दो करोड़ रुपये खर्च करता है। इसके अलावा 120 से अधिक छोटे और बड़े वाहन भी सफाई व्यवस्था में लगे हैं, जिनके डीजल पर प्रति माह 25 से 30 लाख रुपया खर्च होता है।