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मदरसों में बदलाव से ऊंची उड़ान भर सकेंगे तलबा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 16 Apr 2017 12:31 AM IST
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सहारनपुर। मदरसों में दीनी तालीम के अलावा विज्ञान, गणित, हिंदी, अंग्रेजी आदि विषय पढ़ाए जाने के फैसले के बाद जनपद के मदरसों में सुधार की उम्मीद जगी है। इन विषयों की पढ़ाई होने से मदरसों की सूरत तो बदलेगी ही, मदरसों के वाले तलबा भी ऊंची उड़ाने भर सकेंगे।
प्रदेश की नई सरकार ने मदरसों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए मदरसों की शिक्षा में बदलाव की योजना बनाई है। मदरसों में अब इस्लामिक शिक्षा के साथ गणित, अंग्रेजी, विज्ञान, हिंदी आदि विषयों को पढ़ाने का निर्णय लिया गया है। जनपद में 100 से ज्यादा मान्यता प्राप्त मदरसे संचालित हैं। मदरसा शिक्षकों ने बातचीत में बताया कि मदरसों में यदि दीनी तालीम के अलावा अन्य विषय की पढ़ाई भी लागू की जाए तो छात्रों के भविष्य को नई दिशा मिल सकेगी। उनकी जानकारी बढ़ने के साथ बेहतर भविष्य का निर्माण होगा।
उधर, नायब शहर काजी नदीम अख्तर का कहना है कि मदरसों में हिंदी, गणित, विज्ञान जैसे विषयों को लागू करने से पहले विश्लेषण करना जरूरी है। दारुल उलूम देवबंद, मजाहिर उलूम आदि में मूल शिक्षा इस्लाम पर आधारित है। सरकार को चाहिए कि इनमें बदलाव न किया जाए। सरकार को चाहिए कि इस संदर्भ में मदरसा संचालकों से बातचीत भी की जाएं।
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प्रदेश की नई सरकार ने मदरसों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए मदरसों की शिक्षा में बदलाव की योजना बनाई है। मदरसों में अब इस्लामिक शिक्षा के साथ गणित, अंग्रेजी, विज्ञान, हिंदी आदि विषयों को पढ़ाने का निर्णय लिया गया है। जनपद में 100 से ज्यादा मान्यता प्राप्त मदरसे संचालित हैं। मदरसा शिक्षकों ने बातचीत में बताया कि मदरसों में यदि दीनी तालीम के अलावा अन्य विषय की पढ़ाई भी लागू की जाए तो छात्रों के भविष्य को नई दिशा मिल सकेगी। उनकी जानकारी बढ़ने के साथ बेहतर भविष्य का निर्माण होगा।
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उधर, नायब शहर काजी नदीम अख्तर का कहना है कि मदरसों में हिंदी, गणित, विज्ञान जैसे विषयों को लागू करने से पहले विश्लेषण करना जरूरी है। दारुल उलूम देवबंद, मजाहिर उलूम आदि में मूल शिक्षा इस्लाम पर आधारित है। सरकार को चाहिए कि इनमें बदलाव न किया जाए। सरकार को चाहिए कि इस संदर्भ में मदरसा संचालकों से बातचीत भी की जाएं।
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