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यमुना में नहीं बढ़ रहा जलस्तर, सिंचाई का संकट गहराया

Thu, 09 Jun 2022 10:48 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 09 Jun 2022 10:48 PM IST
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Irrigation crisis deepens due to non-increasing water level of Yamuna
सहारनपुर मे पूर्वी यमुना नहर जिसमें कम पानी आ रहा है - फोटो : SAHARANPUR
अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर। गर्मी के मौसम के चलते यमुना में पानी कम आ रहा है। इस कारण पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत, गाजियाबाद जिलों के किसानों को फसलों की सिंर्चाई के लिए पूर्वी यमुना नहर को हथनीकुंड बैराज से पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। पूर्वी यमुना नहर में वर्तमान में 434 क्यूसेक पानी है, यह शामली में 300 क्यूसेक रह जाता है। यह स्थिति तब है, जब कुआंखेड़ा में आसफनगर नहर के माध्यम से 900 क्यूसेक पानी पूर्वी यमुना नहर में छोड़ा जा रहा है। इसके बावजूद शामली और बागपत जिलों के किसानों को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है।
हथनीकुंड बैराज पर जलस्तर बृहस्पतिवार को 2972 क्यूसेक रिकार्ड किया गया। पूर्वी यमुना नहर को 434 क्यूसेक, हरियाणा को जाने वाली पश्चिमी नहर में 2300 क्यूसेक व यमुना में 352 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। 4400 क्यूसेक क्षमता वाली पूर्वी यमुना नहर में बैराज से मिल रहे पानी की मात्रा बेहद कम है। वहीं, विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जिले में पर्याप्त सिंचाई के लिए पूर्वी यमुना नहर में 1000 क्यूसेक से अधिक पानी मिलना चाहिए।
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केवल चार नहर चल रहीं
जनपद में 73 नहरें, रजबहे और माइनरों से खेतों की सिंचाई की जाती है। अब पूर्वी यमुना नहर में पानी बेहद कम होने पर रोस्टर जारी है। वर्तमान में जनपद के चार प्रमुख नहरों नल्हेड़ा, सीजूर, हंगावली और रहेड़ी में ही पानी छोड़ा गया है।
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कई वर्षों बाद कम पानी आया
9 लाख 95 हजार क्यूसेक पानी की क्षमता वाला हथनीकुंड बैराज कई वर्षों बाद पानी की कमी से जूझ रहा है। बैराज के रेगुलेशन ऑपरेटर राजेश कुमार ने बताया कि हर वर्ष अप्रैल में बैराज का जलस्तर बढ़ना शुरू हो जाता है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। ऐसा कई वर्षों बाद देखने को मिला है।
नल्हेड़ा माइनर में तीन माह से पानी नहीं
बड़गांव क्षेत्र में नल्हेड़ा माइनर में तीन माह से पानी नहीं आने से किसान परेशान हैं। क्षेत्र के जड़ौदा पांडा, जयपुर, किशनपुरा, घिसरपड़ी, बालुमाजरा, लौटनी, उमरी मजबता, मौरा, झबीरन, दल्हेड़ी, रायचंदा, गुड़ंब आदि गांवों के किसानों की जमीन की सिंचाई माइनर से होती है। माइनर में पानी नहीं आने से किसान अन्य साधनों से सिंचाई करने के लिए मजबूर हैं।

यमुना में कम पानी है। बंटवारे के हिसाब से 33 फीसदी पानी पूर्वी यमुना नहर को मिलता है। इन दिनों 270 से लेकर 450 क्यूसेक पानी मिल रहा है। जिससे जनपद के रजबहे और माइनर नहीं चल पा रहे हैं। पानी रोस्टर अनुसार छोड़ा जा रहा है।-अभिमन्यु सिंह राय, अधिशासी अभियंता, अपर खंड पूर्वी यमुना नहर, सहारनपुर
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